
भाजपा के 49 सवर्ण में 21 राजपूत, जदयू ने 37 ओबीसी और 22 अति पिछड़ा कैंडिडेट उतारे
संक्षेप: बिहार चुनाव में एनडीए के अंदर भाजपा, जदयू समेत अन्य दलों ने सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए टिकट बांटे हैं। भाजपा से सर्वाधिक सवर्ण हैं, तो जदयू की लिस्ट में पिछड़ा एवं अति पिछड़ा उम्मीदवार ज्यादा हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की कैंडिडेट लिस्ट में घटक दलों ने सामाजिक समीकरणों को खास ध्यान रखा है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सर्वाधिक 49 सवर्ण उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। इनमें सबसे ज्यादा 21 कैंडिडेट राजपूत जाति से हैं। वहीं, नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने 37 पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और 22 अति पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) वर्ग से प्रत्याशी दिए हैं। एनडीए गठबंधन के दोनों दलों ने अपने कोर वोटरों का विशेष ख्याल रखा है।

एनडीए के सीट बंटवारे में भाजपा-जदयू के हिस्से कुल 202 (101-101) सीटें हैं। इनमें से दोनों दलों के द्वारा 99 सीटों पर पिछड़ा-अतिपिछड़ा तो 71 सीटों पर सवर्ण समाज के नेताओं पर दांव खेला गया है। दलित प्रत्याशियों को उतारने में भी इन्होंने उदारता बरती है। एनडीए के पांच दलों ने कुल 35 महिला प्रत्याशियों को उम्मीदवार बनाया है। जदयू और भाजपा ने 13-13 तो लोजपा आर ने 6, हम ने 2 और रालोमो ने एक सीट पर महिला प्रत्याशी उतारे हैं।
जेडीयू का ओबीसी, ईबीसी पर दांव
नीतीश की पार्टी ने अपने 101 उम्मीदवारों में सोशल इंजीनियरिंग पर गंभीरता से काम किया है। यहां तक कि जदयू ने अति पिछड़ी जातियों में अत्यन्त उपेक्षित जातियों को भी अवसर दिया है। मसलन अग्रहरि, बांसफोर, खरवार जाति से भी उम्मीदवार बनाए गए हैं। पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन में क्षेत्रवार सामाजिक समीकरण का ध्यान रखा है। पिछली बार 22, जबकि इस बार 13 महिलाओं को जदयू से टिकट मिला है। 37 पिछड़ा तो 22 अति पिछड़ा समाज के उम्मीदवारों के अलावा, जेडीयू के 22 सवर्ण उम्मीदवारों में ब्राह्मण, राजपूत, भूमिहार और कायस्थ शामिल हैं।
नीतीश ने मुस्लिम उम्मीदवार घटाए
वहीं, जदयू ने दलित वर्ग के 15 और आदिवासी समाज के एक उम्मीदवार को टिकट दिया है। इसके अलावा मुस्लिम समाज से 4 उम्मीदवार बनाए गए हैं। अररिया से शगुफ्ता अजीम, जोकीहाट से मंजर आलम, अमौर से सबा जफर और चैनपुर से जमा खान को जदयू का टिकट मिला है। हालांकि, नीतीश की पार्टी ने पिछली बार 11 अल्पसंख्यकों को मैदान में उतारा था। पार्टी ने युवाओं पर खूब दांव खेला है। उसने दो दर्जन से अधिक युवा उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। इसके अलावा पार्टी ने अपने पुराने नेताओं मंजर आलम और गोपाल अग्रवाल को फिर से टिकट दिया है। ये दोनों विधायक रह चुके हैं।
भाजपा की लिस्ट में सर्वाधिक सवर्ण, यादव में कटौती, एक भी मुस्लिम नहीं
भारतीय जनता पार्टी ने अपने कोटे के 101 उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की है। पार्टी ने सवर्ण समुदाय के 49, पिछड़ा और अतिपिछड़ा वर्ग के 40 और 12 दलित को चुनाव मैदान में उतारा है। भाजपा उम्मीदवारों में एक भी मुस्लिम नहीं हैं। भाजपा उम्मीदवारों में 21 राजपूत, 16 भूमिहार, 11 ब्राह्मण, एक कायस्थ, 13 वैश्य, 12 अति पिछड़ा, 7 कुशवाहा, 2 कुर्मी, 12 दलित और 6 यादव हैं। भाजपा ने 2020 के विधानसभा चुनाव में 15 यादवों को टिकट दिया था, लेकिन इस बार आंकड़ा आधे से भी कम हो गया है।
(हिन्दुस्तान ब्यूरो की रिपोर्ट)





