
बिहार में BJP किसे देगी टिकट? विधायकों पर भरोसा, महिलाओं को मौका और जाति फैक्टर पर जोर
संक्षेप: भाजपा आलाकमान का मानना है कि पहली बार के विधायकों या सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर नहीं है। इसलिए दूसरे राज्यों वाला फॉर्मूला बिहार में इस बार नहीं अपनाया जाएगा, जहां बीजेपी औसतन 30% विधायकों को टिकट से वंचित करती है।
भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की राजधानी नई दिल्ली में रविवार शाम बैठक हुई, जिसमें पार्टी उम्मीदवारों की पहली लिस्ट को अंतिम रूप दिया गया। इसके अनुसार, बीजेपी बिहार की 243 सीटों में से 101 पर चुनाव लड़ेगी। मीटिंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, संगठन महासचिव बीएल संतोष, केंद्रीय चुनाव समिति के अन्य सदस्य और बिहार के वरिष्ठ पार्टी नेता शामिल हुए।

केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक से पहले शनिवार से कई दौर की बैठकें हुईं, जिनमें बीजेपी नेताओं ने उम्मीदवारों के नामों को अंतिम मंजूरी के लिए समिति के सामने पेश किया। रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी बिहार के नेता पटना के लिए रवाना हो रहे हैं ताकि सीट बंटवारे की घोषणा की जा सके। सूत्रों की मानें तो पार्टी ज्यादातर मौजूदा विधायकों को टिकट से वंचित करने की योजना नहीं बना रही है, क्योंकि 2020 में कई नए चेहरों को मौका दिया गया था।
विधायकों का टिकट कटने की कम आशंका
भाजपा आलाकमान का मानना है कि पहली बार के विधायकों या सरकार के खिलाफ कोई खास सत्ता विरोधी लहर नहीं है। इसलिए दूसरे राज्यों वाला फॉर्मूला बिहार में इस बार नहीं अपनाया जाएगा, जहां बीजेपी औसतन 30% विधायकों को टिकट से वंचित करती है। इस मामले में बिहार एक अपवाद हो सकता है। उम्मीदवार के चयन का मानदंड निश्चित रूप से जीत की प्रबल संभावना है। पार्टी टिकट बांटने में जाति और सामाजिक समीकरणों का संतुलन बनाने पर जोर देगी। इस बार कई महिला उम्मीदवारों को भी चुनाव लड़ने का मौका मिल सकता है।
युवा चेहरों को मिल सकता है मौका
सूत्रों के मुताबिक, विधायकों को टिकट से वंचित करने में उम्र एक बड़ा कारण होगा। पार्टी कुछ वरिष्ठ नेताओं की जगह युवा चेहरों को मौका दे सकती है। अगर किसी निर्वाचन क्षेत्र में कोई अन्य जीतने योग्य चेहरा नहीं है, तो सीनियर नेता पर ही भरोसा जताया जाएगा। बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे की घोषणा के बाद सत्तारूढ़ एनडीए के घटक दलों के बीच फिर से मतभेद उभरकर सामने आए हैं। NDA के दो छोटे सहयोगी दल केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के नेतृत्व वाली हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) और राज्यसभा सदस्य उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) को 6-6 सीट मिली हैं, जिस पर दोनों दलों ने सीट बंटवारे के फॉर्मूले को लेकर असंतोष जताया है। यह देखना होगा कि इसे कैसे शांत कराया जाता है।





