कमाने गया दिल्ली, अब घर आएगी लाश; मेनहोल में गिरे बिहार के बिरजू की रुला देगी कहानी
दिल्ली के रोहिणी में मेनहोल में गिरकर जिस बिरजू की मौत हुई, वह बिहार के समस्तीपुर से हजार किलोमीटर दूर अपनी बूढ़ी मां, पत्नी और तीन मासूम बच्चों का पेट पालने के लिए रोजगार की तलाश में परदेस आया था। उसकी मौत के बाद परिवार पर रोजी-रोटी का संकट आ गया है।

दिल्ली के रोहिणी स्थित बेगमपुर इलाके में मेनहोल में गिरने से 30 वर्षीय युवक बिरजू कुमार की मौत हो गई। वह बिहार के समस्तीपुर जिले का रहने वाला था। गरीब परिवार से संबंध रखने वाला बिरजू कमाई के कुछ पैसे लेकर 4-5 दिनों में घर लौटने वाला था। घर पर उसकी बूढ़ी मां, जवान पत्नी और तीन मासूम बच्चे बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। मगर मंगलवार को उसकी मौत की खबर जैसे ही आई, परिवार में कोहराम मच गया।
यह घटना दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-32 के महाशक्ति काली मंदिर के पास हुई। समस्तीपुर जिले में वारिसनगर प्रखंड अंतर्गत लखनपट्टी पंचायत के सादीपुर बथनाहा गांव का रहने वाला बिरजू कुमार दिल्ली में मजदूरी करके चंद पैसे कमा रहा था। ताकि हजार किलोमीटर दूर बैठे उसके परिवार के लोग कम से कम दो वक्त की रोटी खा सके।
इसी मेनहोल में गिरकर हुई बिरजू की मौत-
बचपन में ही उठ गया था पिता का साया
बिरजू जब 10 साल का था तभी उसके पिता का निधन हो गया था। उसके बाद मां ने ही बिरजू और उसकी बहन को मजदूरी कर पाल-पोस कर जैसे-तैसे बड़ा किया। बिरजू का पूरा बचपन मुफलिसी में गुजरा। बड़ा हुआ तो किशोर उम्र में ही घर की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली।
घर के आसपास उसे ढंग का रोजगार नहीं मिला तो वह चंद पैसे कमाने परदेस चला गया। वह बीते 8 महीने से दिल्ली में सेंटरिंग का काम कर रहा था। हाल ही में उसे कंपनी से कुछ पैसा मिला था। इसके बाद वह अपने साथियों के साथ बाजार गया और घर वालों के लिए नए कपड़े खरीदकर लाया।
घर लौटने की तैयारी कर रहा था बिरजू, बाजार से खरीदे थे नए कपड़े
इसी सप्ताह वह साइट पर काम खत्म कर अपने घर समस्तीपुर लौटने की तैयारी कर रहा था। बताया जा रहा है कि सड़क पर चलते समय वह मेनहोल में गिर गया। मंगलवार को देर शाम दिल्ली के फायर बिग्रेड को जानकारी मिली। इसके बाद फायर ब्रिगेड सर्च ऑपरेशन चलाया और कई घंटों की मशक्कत के बाद बिरजू की लाश मिली। शव को अंबेडकर अस्पताल पहुंचाया गया जहां पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के बाद गुरुवार को गांव में शव पहुंचने की संभावना है।
बिरजू के आने का था इंतजार, अब आएगी लाश
मंगलवार शाम को जैसे ही बिरजू के साथ हुए हादसे की सूचना उसके गांव में मिली, उसके घर में चूल्हा नहीं जला। मां गीता देवी, पत्नी सुचिता देवी, पुत्र आयुष कुमार (8), आर्यन कुमार (5), पुत्री रीया कुमारी (3), बहन पूनम देवी सहित सभी परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है।
परिजन ने बताया कि गुरुवार को उसका शव घर पर लाया जाएगा, जहां दाह संस्कार किया जाएगा। वहीं, परिजन ने सरकार से तत्काल विशेष सहायता देने की गुहार भी लगई है। ताकि परिवार का भरण पोषण और बच्चों की पढ़ाई लिखाई शुरू कराई जा सके।
लेखक के बारे में
Jayesh Jetawatजयेश जेतावत एक अनुभवी, जुझारू एवं निष्पक्ष पत्रकार हैं। बीते 10 सालों से स्थानीय मुद्दों को कवर कर रहे हैं। राजनीतिक, सामाजिक और आपराधिक घटनाओं की रिपोर्टिंग एवं संपादन में महारत हासिल है। बिहार में पर्यटन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी गहरी पकड़ रखते हैं। तकनीकी रूप से निपुण जयेश, तथ्यों की बारीकी से जांच कर समयसीमा के भीतर पाठकों तक सटीक खबरें एवं शोध-परक विश्लेषण पहुंचाते हैं। जनसरोकार के मुद्दे उठाना, पेशेवर नैतिकता का पालन करना, समाज एवं मानव कल्याण के प्रति जिम्मेदारी, इन्हें और भी योग्य बनाती है। भाषा पर इनकी अच्छी पकड़ है। जटिल मुद्दों को पाठकों एवं दर्शकों तक आसान शब्दों में पहुंचाना इनकी खूबी है।
जयेश जेतावत मूलरूप से मेवाड़ क्षेत्र (राजस्थान) के रहने वाले हैं। इन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से जनसंचार में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इसके बाद ईटीवी भारत में बतौर प्रशिक्षु समाचार संपादक के रूप में काम शुरू किया। फिर इंडिया न्यूज के डिजिटल सेक्शन में विभिन्न बीट कवर की। इसके बाद, वे2न्यूज में बतौर टीम लीडर तीन राज्यों की कमान संभाली। साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े, तब से यहां बिहार की खबरों को कवर कर रहे हैं। जयेश ने टाइम्स ऑफ इंडिया, लाइव इंडिया न्यूज चैनल और सी-वोटर रिसर्च एजेंसी में इंटर्नशिप भी की। पटना से प्रकाशित मैगजीन राइजिंग मगध में समसामयिक विषयों पर इनके लेख छपते रहे हैं। समाचार लेखन के अलावा जयेश की साहित्यिक पठन एवं लेखन में रुचि है, सामाजिक मुद्दों पर कई लघु कथाएं लिख चुके हैं।


