Hindi NewsBihar NewsBima Bharti RJD creating records of defeat by losing second consecutive election with Highest margin in Purnia Rupauli
हारने का ही रिकॉर्ड बना रही हैं बीमा भारती, पूरे बिहार में सबसे बड़े अंतर से लगातार दूसरी शिकस्त

हारने का ही रिकॉर्ड बना रही हैं बीमा भारती, पूरे बिहार में सबसे बड़े अंतर से लगातार दूसरी शिकस्त

संक्षेप:

Bihar Highest Margin Defeat: सीमांचल के बाहुबली अवधेश मंडल की पत्नी बीमा भारती का राजनीतिक करियर जेडीयू छोड़ने के बाद से भंवर में फंसा है। बीमा लगातार दूसरे चुनाव में बिहार में सबसे बड़े मार्जिन से हारी हैं।

Nov 19, 2025 05:49 pm ISTRitesh Verma लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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पूर्णिया के दबंग अवधेश मंडल की पत्नी बीमा भारती का अच्छा-भला राजनीतिक करियर 24 साल में 5 बार विधायक बनने के बाद ऐसा भंवर में फंसा है कि लगातार दो चुनाव से वो बिहार में हारने का नया रिकॉर्ड बना रही हैं। नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) छोड़ने के बाद बीमा 2024 में तेजस्वी यादव के राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) में चली गई थीं और तब से अब तक तीन चुनाव हार चुकी हैं। लोकसभा के बाद विधानसभा चुनाव में प्रमुख दलों के कैंडिडेट में सबसे बड़े अंतर से हारने का रिकॉर्ड बीमा ने बनाया है। पूर्णिया लोकसभा से तो उनकी जमानत ही जब्त हो गई थी। विधानसभा में जमानत बचाने के बावजूद वो राज्य में सबसे बड़े मार्जिन से हारने वाली कैंडिडेट बनी हैं। जेडीयू के कलाधर मंडल ने राजद की बीमा भारती को 73572 वोट के बहुत बड़े अंतर से हराया।

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पूर्णिया जिले की रूपौली विधानसभा सीट से साल 2000 में राज्य में कई बाहुबलियों और दबंगों के रिश्तेदारों की तरह बीमा भारती भी रूपौली से पहली बार निर्दलीय जीती थीं। 2005 के फरवरी के चुनाव में लोजपा के शंकर सिंह जीते लेकिन विधानसभा नहीं देख सके। 2005 के अक्टूबर में फिर चुनाव हुआ तो बीमा लालू यादव की आरजेडी के सिंबल पर जीत गईं। बिहार में नीतीश कुमार की सरकार बन गई थी तो 2010 में जदयू के टिकट पर लड़ीं और जीतीं। फिर 2015 और 2020 में भी जेडीयू से एमएलए बनीं। 2024 में पूर्णिया से लोकसभा चुनाव लड़ने के चक्कर में बीमा ने जदयू से नाता तोड़ा और राजद में चली आईं। तब से उनके ग्रह-नक्षत्र गड़बड़ हैं।

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पूर्णिया में कांग्रेस में शामिल होने के बावजूद महागठबंधन में कांग्रेस का टिकट नहीं मिलने से पप्पू यादव निर्दलीय लड़ गए। बीमा भारती राजद का टिकट, महागठबंधन का समर्थन और तेजस्वी के पूर्णिया में कैंप करने के बावजूद 27120 वोट ही ला सकीं। पूर्णिया में लगभग 12 लाख वोट गिरे थे, लेकिन 567556 वोट लाकर पप्पू यादव निर्दलीय ही जीत गए। जदयू के कैंडिडेट संतोष कुशवाहा 543709 वोट ही जुटा पाए और 23847 वोट के अंतर से हार गए। बीमा भारती की हार का अंतर 540436 वोट था। जमानत तो जब्त ही हुई ही, कोई चुनावी प्रतिष्ठा नहीं बची।

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दल-बदल के कारण बीमा की विधायिकी चली गई। 2024 में ही लोकसभा के बाद उपचुनाव हुआ तो उसमें भी वो तीसरे नंबर पर चली गईं। जीते निर्दलीय शंकर सिंह और दूसरे नंबर पर रहे वही कलाधर मंडल जो इस बार जीते हैं। कलाधर ने बीमा को राज्य भर में सबसे बड़े अंतर से हराया। शंकर सिंह इस बार भी निर्दलीय थे और फिर तीसरे नंबर पर चले गए।

Ritesh Verma

लेखक के बारे में

Ritesh Verma
रीतेश वर्मा लगभग ढाई दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। बिहार में दैनिक जागरण से करियर की शुरुआत करने के बाद दिल्ली-एनसीआर में विराट वैभव, दैनिक भास्कर, आज समाज, बीबीसी हिन्दी, स्टार न्यूज, सहारा समय और इंडिया न्यूज के लिए अलग-अलग भूमिका में काम कर चुके हैं। और पढ़ें
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