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राजनीति में युवाओं को भागीदारी बनाने में बड़े दल नहीं ले रहे दिलचस्पी

राजनीति में युवाओं को भागीदारी बनाने में बड़े दल नहीं ले रहे दिलचस्पी

संक्षेप:

बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच राजनीति में युवाओं की भागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। बड़े दलों द्वारा युवाओं को टिकट न देने से उनमें आक्रोश है। युवा नेताओं को राजनीति में आगे...

Oct 24, 2025 10:46 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बिहारशरीफ
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वन मिनट : सबनहुआ डीह महादेव स्थान राजनीति में युवाओं को भागीदारी बनाने में बड़े दल नहीं ले रहे दिलचस्पी पुराने नेताओं के सामने दब रही नई पीढ़ी की आवाज खुद के दम पर भी युवा पीढ़ी राजजीति में नहीं बढ़ा पा रही अपना कद कब तक दूसरों के भरोसे युवा करते रहेंगे अपने क्षेत्रों की मेजबानी लंबे समय से पार्टी में काम कर रहे युवाओं को टिकट नहीं देना एक चिंतनीय विषय गठबंधन के कारण नए चेहरों को नहीं मिल रहा मौका फोटो : वन मिनट : हरनौत सबनहुआ डीह महादेव स्थान में वन मिनट संवाद कार्यक्रम में शामिल लोग।

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लोगों की तस्वीरें उनके नाम से। बिहारशरीफ, निज संवाददाता। जैसे-जैसे नालंदा जिले में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी तेज हो रही है, राजनीति में युवाओं की भागीदारी का मुद्दा भी गरमाता जा रहा है। बड़े दलों द्वारा युवाओं को टिकट नहीं दिए जाने से एक वर्ग में काफी आक्रोश है। वे अब राजनीति में युवा पीढ़ी को देखना चाहते हैं। ताकि वे राजनीति में आकर नई ऊर्जा और नूतन विजन से देश और अपने क्षेत्र का विकास कर सकें। हर दल युवाओं को अपना भविष्य बताता है, मंचों से उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रेरित करता है, लेकिन टिकट बंटवारे के समय तस्वीर कुछ और ही दिखती है। हद तो यह कि कई चेहरों को सेवानिवृत्ति उम्र के दशक पार करने के बाद भी टिकट दिया गया है। क्या इस देश में राजनीति में बेहतर युवा काम करने वालों की कमी हो गयी है या फिर बड़े दल युवाओं को मौका ही नहीं देना चाहते हैं। सब कुछ उनके हर जीत के समीकरण में दबकर दम तोड़ रहा है। यही वजह है कि हरनौत प्रखंड के सबनहुआ डीह महादेव स्थान पर हुई वन मिनट संवाद कार्यक्रम में लोगों ने कहा कि बड़े दल युवाओं को राजनीति में भागीदारी देने में कोताही बरत रहे हैं, जबकि वही युवा वर्षों से दल की नीतियों और संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। पार्टी का झंडा पूरे तन मन से ढो रहे हैं। हरनौत निवासी सुभाष कुमार कहते हैं कि हर चुनाव में दलों के पोस्टर और भाषणों में युवाओं की बातें खूब होती हैं, मगर टिकट देने के वक्त वही चेहरे सामने आते हैं, जो पिछले दो या तीन दशक से सत्ता की दौड़ में शामिल हैं। राजनीति में युवाओं की भूमिका अब भी केवल कार्यकर्ता भर रह गई है, जबकि वही युवा बूथ से लेकर प्रचार तक पार्टी को खड़ा करते हैं। ग्रामीण दिनेश सिंह कहते हैं आज की पीढ़ी में ऊर्जा, विचार और जमीनी समझ है। वे अपने क्षेत्र की जरूरतें जानते हैं, लेकिन जब टिकट देने का समय आता है तो जाति, वफादारी और पूंजी ही निर्णायक बन जाती है। सबनहुआ डीह में हुई चर्चा में युवाओं ने खुलकर कहा कि बड़े दलों की कोताही और अंदरूनी राजनीति के कारण युवा धीरे-धीरे राजनीति से दूरी बना रहे हैं। स्नातक छात्र राहुल कुमार ने कहा हम देखते हैं कि वर्षों से पार्टी में काम कर रहे युवाओं को टिकट नहीं दिया जाता। टिकट उसी को मिलता है, जो ऊपरी स्तर पर लॉबी बना सके या जातिगत समीकरण में फिट बैठे। ऐसे में पार्टी में समर्पण का कोई मतलब नहीं रह जाता। गठबंधन राजनीति ने भी नए चेहरों के लिए दरवाजे बंद कर दिए हैं। गठबंधन की मजबूरी में दल पुराने नेताओं को ही उतारते हैं, जिससे नई पीढ़ी का उत्साह ठंडा पड़ जाता है। बावजूद इसके कई जगह ऐसे युवा हैं, जो बिना किसी राजनीतिक रसूख के अपने दम पर आगे बढ़ रहे हैं। अभिषेक आनंद ने कहा राजनीति में अगर हम हमेशा दूसरों के भरोसे रहेंगे, तो अपने क्षेत्र की मेजबानी कभी नहीं कर पाएंगे। हमें खुद के दम पर आगे बढ़ना होगा। राजनीति अब सिर्फ बड़े परिवारों या पूंजी वालों की जागीर नहीं रहनी चाहिए। गांव-गांव में ऐसे हजारों युवा हैं जो शिक्षा, रोजगार, जल-निकासी, सड़क और खेती जैसे असली मुद्दों पर काम कर रहे हैं, लेकिन उनके पास न संसाधन हैं और न पहचान। हर चुनाव में दल कहते हैं कि वे युवाओं को टिकट देंगे, उन्हें मौका देंगे, लेकिन चुनावी समीकरण के आगे यह सब केवल भाषणबाजी बनकर रह जाती है। उन्होंने कहा युवाओं को अब खुद तय करना होगा कि वे दर्शक बने रहेंगे या निर्णायक बनेंगे। युवा पीढ़ी अगर अपने क्षेत्र की समस्याओं को लेकर सक्रिय हो जाए, तो न केवल विकास की गति बढ़ेगी, बल्कि राजनीतिक शुचिता भी लौटेगी। हम कब तक दूसरों के भरोसे अपने गांव और शहर की मेजबानी करते रहेंगे? युवाओं को आगे बढ़कर जिम्मेदारी लेनी होगी। हरनौत के कई लोगों ने कहा पुराने नेता बार-बार जीतते तो हैं, लेकिन क्षेत्र की तस्वीर नहीं बदलते। विकास के वादे हर बार किए जाते हैं, पर जमीनी काम नहीं दिखता। गांव के रमेश साव ने कहा हर बार वही चेहरे सामने आते हैं। जनता को लगता है कि बदलाव जरूरी है, लेकिन जब टिकट ही नए लोगों को नहीं मिलता, तो विकल्प कहां से आएगा? वर्तमान राजनीतिक हालात में गठबंधन व्यवस्था भी युवाओं के लिए बाधा साबित हो रही है। समाजसेवी अरुण कुमार बताते हैं कि आजकल अधिकांश दल गठबंधन में चुनाव लड़ते हैं। सीट बंटवारे के बाद वे उन्हीं चेहरों को चुनते हैं, जो जातिगत या सामाजिक समीकरणों को साध सकें। परिणाम यह होता है कि जिन युवाओं ने 10 या 15 साल संगठन में मेहनत की होती है, वे टिकट से वंचित रह जाते हैं। यानि जीत हार के गणित में मतदाताओं को साधने के लिए युवाओं की अनदेखी की जाती है। अगर यही स्थिति रही, तो भविष्य में युवाओं का राजनीति से मोहभंग और बढ़ेगा। चर्चा में शामिल लोगों का कहना था कि बिहार को आज जिस चीज की सबसे ज्यादा जरूरत है, वह है नूतन विजन और कुछ कर गुजरने की जज्बा की। विकास की डफली बजाने वाले नेताओं को अब यह बताना चाहिए कि उनका असली रोडमैप क्या है। युवाओं को केवल भीड़ जुटाने का माध्यम नहीं, बल्कि नीति निर्माण में हिस्सेदार बनाया जाना चाहिए। युवाओं की राजनीति में बढ़ती भागीदारी तभी सार्थक होगी जब राजनीति का एजेंडा शिक्षा, रोजगार और उद्यमिता पर केंद्रित होगा। राजनीति में युवाओं की भूमिका सिर्फ झंडा उठाने और नारे लगाने तक सीमित रह गई है। बड़े दल युवाओं को टिकट देने से बचते हैं। हर बार वही पुराने चेहरे चुनाव में दिखते हैं जो वर्षों से सत्ता में हैं, लेकिन क्षेत्र में कोई खास बदलाव नहीं ला पाए। युवाओं में ऊर्जा और दृष्टि दोनों हैं, बस उन्हें मौका मिलना चाहिए। अगर दल युवाओं को टिकट नहीं देंगे, तो राजनीति में नई सोच कभी नहीं आ सकेगी। रामदेव यादव हमारे गांव और प्रखंड में ऐसे कई युवा हैं जो समाज की समस्याओं को लेकर सक्रिय हैं, लेकिन बड़े नेताओं के दबाव में उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया जाता। राजनीति में परिवर्तन तभी आएगा जब युवा खुद अपनी राह बनाएंगे। दलों को चाहिए कि वे युवाओं को सिर्फ भीड़ जुटाने वाला नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता बनाएं। पुराने चेहरों से अब जनता ऊब चुकी है, अब नई पीढ़ी को मौका मिलना चाहिए। राजो यादव हर चुनाव में यह कहा जाता है कि युवा देश का भविष्य हैं, मगर टिकट के समय यही भविष्य दरकिनार कर दिया जाता है। जिन लोगों ने वर्षों से दल की सेवा की है, उन्हें मौका नहीं मिलता। बड़े दल युवाओं के साथ अन्याय कर रहे हैं। अगर यही सिलसिला चलता रहा तो राजनीति से युवा धीरे-धीरे दूर होते जाएंगे। अब समय है कि युवाओं को निर्णायक भूमिका में लाया जाए। रवींद्र यादव राजनीति में नई सोच तभी आएगी जब युवा आगे बढ़ेंगे। आज भी बड़े दलों में टिकट बंटवारे में जाति और पूंजी का ही खेल चलता है। जिनके पास न रसूख है, न पैसा, वे भले ही कितनी मेहनत करें, नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। हमें अब दूसरों के भरोसे नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने दम पर राजनीति में पहचान बनानी चाहिए। सुनील यादव हमारे समाज में कई प्रतिभाशाली युवा हैं, जो अपने क्षेत्र के विकास के लिए काम करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें मंच नहीं मिलता। दलों में एक तरह की आंतरिक राजनीति है, जिसमें नए लोग जगह नहीं बना पाते। अगर युवाओं को टिकट दिया जाए, तो राजनीति में नई ऊर्जा और पारदर्शिता आएगी। युवाओं को अब सिर्फ दर्शक नहीं, भागीदार बनना होगा। नवल यादव हमारे बच्चे दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन जब टिकट देने की बारी आती है, तो बड़े-बड़े नेता अपने परिवार या परिचितों को आगे कर देते हैं। युवा अगर राजनीति में आएंगे तो वे विकास और रोजगार की बात करेंगे। अब समय आ गया है कि महिलाओं और युवाओं को एक साथ राजनीति में आगे बढ़ाया जाए ताकि समाज में नई सोच पनपे। राजमति देवी बड़े दल युवाओं को केवल चुनावी रैलियों में मंच सजाने के लिए बुलाते हैं। वास्तविक राजनीति में उन्हें शामिल नहीं किया जाता। अब युवाओं को खुद आगे आकर अपनी आवाज बुलंद करनी होगी। जब तक युवा खुद नेतृत्व की जिम्मेदारी नहीं लेंगे, तब तक राजनीति में बदलाव नहीं आएगा। हमें अब भीड़ नहीं, निर्णय लेने वाले बनना चाहिए। किरण देवी गांव में शिक्षा, सड़क, पानी जैसी बुनियादी जरूरतें आज भी अधूरी हैं। पुराने नेता इन समस्याओं को नजरअंदाज करते हैं। अगर युवाओं को मौका दिया जाए, तो वे इन असली मुद्दों पर काम कर सकते हैं। राजनीति में अब नई पीढ़ी का आना बहुत जरूरी है, ताकि विकास की बातें सिर्फ भाषणों में नहीं, जमीन पर दिखें। तोता देवी युवाओं के पास सोच है, समझ है, लेकिन बड़े दल उन्हें नेतृत्व देने से कतराते हैं। हम सालों से पार्टी के लिए काम करते हैं, पर टिकट उन्हीं को मिलता है जिनके पास पैसे या संबंध हैं। इससे संगठन के प्रति ईमानदारी खत्म होती जा रही है। अब युवाओं को अपने दम पर खड़ा होना होगा और जनता से सीधे जुड़कर बदलाव लाना होगा। जितेंद्र यादव गठबंधन की राजनीति ने युवाओं के लिए रास्ता और कठिन बना दिया है। सीट बंटवारे के कारण हर बार नए चेहरों की उम्मीद खत्म हो जाती है। जो युवा वर्षों से मेहनत कर रहे हैं, उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। राजनीति में स्थायी बदलाव के लिए युवाओं को निर्णायक मोर्चे पर लाना जरूरी है। तभी क्षेत्र और राज्य दोनों आगे बढ़ पाएंगे। विजय कुमार