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शिक्षित व नई सोच वाले युवाओं की राजनीति में है दरकार

शिक्षित व नई सोच वाले युवाओं की राजनीति में है दरकार

संक्षेप: सरमेरा के बीच बाजार में नुक्कड़ चर्चा में युवाओं ने कहा कि राजनीति में शिक्षित और नई सोच वाले लोगों की जरूरत है। नेताओं को स्थानीय मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए और जनता की समस्याओं को समझना चाहिए। यदि योग्य और ईमानदार लोग राजनीति में नहीं आएंगे, तो सुधार की उम्मीद अधूरी रहेगी।

Mon, 3 Nov 2025 06:39 PMNewswrap हिन्दुस्तान, बिहारशरीफ
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नुक्कड़ पर चुनाव : सरमेरा बीच बाजार शिक्षित व नई सोच वाले युवाओं की राजनीति में है दरकार जनसेवा की सोच वाले लोगों के आगे आने की जरूरत स्थानीय मुद्दों पर भी माननीयों को देना चाहिए ध्यान बिहारशरीफ, निज संवाददाता। सरमेरा के बीच बाजार में नुक्कड़ पर चुनाव चर्चा में लोगों ने कहा कि अब राजनीति को पुराने ढर्रे से बाहर निकालने का समय आ गया है। जनता ऐसे जनप्रतिनिधि चाहती है, जो न केवल बोलने में, बल्कि सोचने में भी नई दिशा दे सके। चर्चा का केंद्र बिंदु राजनीति में शिक्षित और नई सोच वाले युवाओं की जरूरत रहा। शहरवासियों ने कहा कि राजनीति अब केवल सत्ता की कुर्सी पाने का माध्यम नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे जनसेवा का सबसे बड़ा मंच बनाना होगा।

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नुक्कड़ चर्चा में सुरजित कुमार चंद्रवंशी ने कहा कि आज राजनीति में सबसे ज्यादा जरूरत जनसेवा की भावना रखने वाले लोगों की है। जो नेता जनता की पीड़ा समझ सके, वही सच्चा प्रतिनिधि कहलाएगा। उन्होंने कहा कि सत्ता में पहुंचने के बाद जनता से दूरी बना लेना अब पुरानी राजनीति की पहचान बन गई है। लोगों को चाहिए कि ऐसे उम्मीदवारों को चुनें, जो गांव-गांव जाकर लोगों की समस्या सुनें और उनके समाधान के लिए सक्रिय रहें। लोकतंत्र में जनता सबसे ऊपर है, लेकिन अफसोस यह है कि जनता ही सबसे ज्यादा उपेक्षित है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और जलजमाव जैसी मूलभूत समस्याओं पर कोई जनप्रतिनिधि गंभीर नहीं दिखता। चुनाव आते ही वादों का पिटारा खुलता है, लेकिन पांच साल तक कोई झांकने तक नहीं आता। ऐसे में जरूरी है कि शिक्षित, संवेदनशील और जनहित की सोच रखने वाले युवा राजनीति में आगे आएं। चर्चा में गौरव स्वर्णकार ने कहा कि आज के दौर में राजनीति में नई सोच की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि जिस देश की आबादी का आधा हिस्सा युवा है, वहां नेतृत्व की कमान भी युवाओं के हाथ में होनी चाहिए। लेकिन, हकीकत यह है कि पुराने चेहरे और पारिवारिक राजनीति ने युवाओं की आवाज को दबा दिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यक्ति को जागरूक बनाती है और जागरूक व्यक्ति समाज को दिशा दे सकता है। इसलिए शिक्षित युवाओं का राजनीति में आना न सिर्फ लोकतंत्र को सशक्त करेगा, बल्कि राजनीति की गिरती साख को भी सुधारेगा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब हर क्षेत्र में योग्य और प्रशिक्षित लोगों की जरूरत होती है, तो राजनीति में ऐसा क्यों नहीं? यहां अनुभव के नाम पर सिर्फ उम्र और संबंध देखे जाते हैं, योग्यता नहीं। इस पर नरेश हलवाई ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि माननीय नेता अपने भाषणों में बड़े वादे छोड़कर स्थानीय मुद्दों पर बात करें। सरमेरा जैसे कस्बाई इलाकों में जलजमाव, सड़क, बाजार की भीड़भाड़, और युवाओं के लिए रोजगार की समस्या वर्षों से जस की तस है। लेकिन, चुनाव आते ही नेता राष्ट्रीय मुद्दों पर भाषण देकर निकल जाते हैं। स्थानीय स्तर पर विकास तभी संभव है, जब नेता जमीनी हकीकत से वाकिफ हों। पंचायत से लेकर विधानसभा तक हर मंच पर स्थानीय समस्याओं की गूंज होनी चाहिए। उन्होंने व्यंग्य में करते हुए कहा सड़कें टूटी हैं, नाली जाम हैं, लेकिन भाषण में सुनाई देता है डिजिटल इंडिया का सपना! जनता अब ऐसे दिखावटी नारों से आगे बढ़ चुकी है और असल काम चाहती है। युवा मतदाता मो. नेहाल अनवर ने कहा कि राजनीति का मकसद सत्ता या प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि सेवा होना चाहिए। लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब नेता मेवा नहीं, सेवा की भावना से काम करेंगे। आज हालात यह हैं कि जनप्रतिनिधि चुनाव के बाद जनता से दूर हो जाते हैं और जनता केवल पोस्टर व होर्डिंग में उन्हें देखती रह जाती है। ऐसे में जनता को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। वोट देते समय जाति, धर्म या दल से ऊपर उठकर ऐसे लोगों को मौका देना चाहिए, जो समाज में बदलाव लाने की सोच रखते हों। उन्होंने कहा अगर जनता विवेक से मतदान करेगी, तो राजनीति में खुद-ब-खुद शुचिता आ जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि आज सोशल मीडिया और शिक्षा ने युवाओं में जागरूकता तो बढ़ाई है, लेकिन राजनीति में भागीदारी अभी भी कम है। जब तक योग्य और ईमानदार लोग राजनीति में नहीं आएंगे, तब तक व्यवस्था में सुधार की उम्मीद अधूरी रहेगी। नुक्कड़ पर मौजूद लोगों ने कहा कि अब जनता के धैर्य की परीक्षा हो चुकी है। लोग अब भाषण और नारे नहीं, बल्कि काम देखना चाहते हैं। सरमेरा बाजार में जाम की समस्या, अस्पताल तक पहुंचने में कठिनाई, और सफाई व्यवस्था की बदहाली जैसे मुद्दे हर चुनाव में उठते हैं, लेकिन समाधान नहीं होता। यदि नेता जनता के बीच लगातार संवाद बनाए रखें, तो समस्याएं समय रहते सुलझ सकती हैं। लेकिन, पांच साल बाद दिखाई देने वाले प्रतिनिधियों से जनता का भरोसा उठता जा रहा है। इन वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में असली ताकत गांवों और कस्बों में बसती है। अगर यहीं से शिक्षित और जागरूक लोग राजनीति में भागीदारी शुरू करें, तो बड़ी तस्वीर अपने आप बदल जाएगी। चर्चा में युवाओं ने यह भी कहा कि राजनीति को करियर नहीं, मिशन के रूप में देखा जाना चाहिए। जब डॉक्टर, शिक्षक और इंजीनियर अपनी विशेषज्ञता से समाज को दिशा दे सकते हैं, तो राजनीति में भी ऐसे लोगों का होना जरूरी है, जो विकास की योजनाओं को समझ सकें और उन्हें लागू करने की क्षमता रखें।