
महिलाओं की बढ़ी वोटिंग से सियासत के समीकरण हुए उलट-पलट
संक्षेप: नालंदा में विधानसभा चुनाव के दौरान महिलाओं ने 60.93% वोटिंग की, जो पुरुषों के 58.80% से अधिक है। 2020 की तुलना में मतदान प्रतिशत 7.42% बढ़कर 59.81% हो गया। यह परिवर्तन राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर रहा है और महिलाओं की भागीदारी ने चुनाव को ऐतिहासिक बना दिया है।
महिलाओं की बढ़ी वोटिंग से सियासत के समीकरण हुए उलट-पलट नालंदा में बढ़ा मतदान, 2020 के मुकाबले 7.42 फीसद हुआ अधिक मतदान महिलाओं की 60.93 फीसद भागीदारी बनी चर्चा का केंद्र बिहारशरीफ, हिन्दुस्तान संवाददाता। नालंदा जिले ने इस बार के विधानसभा चुनाव में नया मतदान रिकॉर्ड बना दिया है। वर्ष 2020 की तुलना में जिले में मतदान प्रतिशत 7.42 बढ़कर 59.81 पहुंच गया। इससे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गयी है। सबसे खास बात यह रही कि महिलाओं ने 60.93 फीसद वोटिंग कर पुरुषों के 58.80 फीसदी को पछाड़ दिया है। बिहारशरीफ को छोड़कर जिले के बाकी छह विधानसभा क्षेत्रों में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर मतदान किया, जिससे सियासी समीकरण पूरी तरह से बदलता नजर आ रहा है।

एनडीए का कहना है कि महिलाओं का बढ़ा वोट शेयर सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं पर विश्वास का प्रतीक है। वहीं, महागठबंधन इसे सत्ता परिवर्तन का संकेत बता रहा है। जन सुराज पार्टी का मानना है कि यह बढ़ी भागीदारी प्रशांत किशोर की रणनीति को मजबूत करने वाला साबित हो सकती है। अस्थावां फिर बना मतदान का सिरमौर : जिले में कुल 11.81 लाख पुरुष और 10.61 लाख महिला मतदाता हैं। इनमें अस्थावां विधानसभा क्षेत्र एक बार फिर सबसे अधिक मतदान प्रतिशत दर्ज करने वाला इलाका बना।यहां महिलाओं की सक्रियता और मतदान लाइन में दिखा उत्साह चुनाव के प्रति उनकी जागरूकता का नया संदेश दे रहा था। सियासी गलियारों में बढ़ी हलचल : बढ़े हुए मतदान प्रतिशत और महिलाओं की अग्रणी भूमिका ने सभी दलों के राजनीतिक अनुमान और रणनीतियों में उथल-पुथल मचा दी है। एनडीए खेमे के जदयू के श्रवण कुमार और भाजपा के डॉ. सुनील कुमार ने दावा किया कि यह वोट सरकार के कामकाज और विकास के भरोसे पर पड़ा है। राजद के नेताओं का कहना है कि यह बढ़ा मतदान जनता की बदलाव की इच्छा का साफ संदेश है। लोकतंत्र में महिलाओं की नई पहचान : यह चुनाव सिर्फ मतदान प्रतिशत के लिहाज से नहीं, बल्कि महिलाओं की सशक्त भागीदारी के कारण भी ऐतिहासिक बन गया है। नालंदा ने यह साबित किया है कि अब महिलाएं मतदान केंद्रों पर सिर्फ हिस्सा नहीं लेतीं, बल्कि सियासत की दिशा तय करती हैं। अब सबकी नजर 14 नवंबर पर : राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का बढ़ा मतदान और महिला मतदाताओं की निर्णायक भूमिका बिहार की राजनीति को नया मोड़ दे सकती है। नालंदा के मतों में अब इतिहास रचने की गूंज सुनाई दे रही है जहां जनता की भागीदारी और जागरूकता, लोकतंत्र की असली ताकत बनकर उभरी है।

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