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बिहारशरीफउदेरा स्थान बराज में रहता है पानी, बेकाबू होने पर ही खोला जाता है फाटक

हिन्दुस्तान टीम,बिहारशरीफPublished By: Newswrap
Mon, 24 May 2021 09:30 PM
उदेरा स्थान बराज में रहता है पानी, बेकाबू होने पर ही खोला जाता है फाटक

उदेरा स्थान बराज में रहता है पानी, बेकाबू होने पर ही खोला जाता है फाटक

हिलसा के किसानों को दीजिए पटवन की राह, बेवजह झेलनी पड़ रही तबाही

बाढ़-सुखाड़ के वर्चुअल संवाद में विधायक ने उठाये कई गंभीर मुद्दे

नियत माप पर खोला जाये फाटक तो हर मौसम में किसान कर सकते हैं खेती

हिलसा। निज संवाददाता

विधायक बनने के बाद पहली बार कृष्ण मुरारी शरण ऊर्फ प्रेम मुखिया ने किसानों की समस्या को जबरदस्त ढंग से रखा। साथ ही, उनके निदान के सुझाव भी दिए। जल संसाधन मंत्री संजय झा के साथ हुए वर्चुअल संवाद में विधायक ने बताया कि हिलसा के किसानों को बाढ़ और सुखाड़ का दंश झेलना मजबूरी हो गया है। बरसात में लोकायन नदी की तबाही और गर्मी में सूर्य की तपिश से किसान परेशान रहते हैं। हर साल बाढ़-सुखाड़ का दंश झेलते-झेलते आर्थिक रूप से कमजोर हो चुके किसानों को तभी राहत मिल सकती जब लोकायन नदी के ऊफान पर लगाम लगेगी।

विधायक ने बताया कि लोकायन में पानी की आवाजाही का नियंत्रण जहनाबाद के उदेरा स्थान में फल्गु नदी पर बनाए गए बराज से किया जाता है। इस बराज में हमेशा पानी रहता है। लेकिन, इस पानी को बारिश के मौसम में तभी छोड़ा जाता है, जब बराज पर पानी का दबाव बढ़ जाता है। बराज से अचानक पानी छोड़ने से लोकायन नदी में तेज ऊफान आता है, जिससे जगह-जगह तटबंध टूट जाते हैं।

खेतों के साथ-साथ गांव जलमग्न हो जाते हैं। ऐसे में स्थिति को नियंत्रित करना बड़ी चुनौती बन जाती है। बतौर सुझाव बताया कि अगर यही पानी एक नियत माप पर हरवक्त लोकायन में छोड़ा जाए तो हिलसा में तबाही मचाने वाली लोकायन नदी के पानी से न केवल खेत आबाद होंगे, बल्कि किसान भी खुशहाल होंगे। दूरदराज के खेतों तक पटवन पहुंचाने के लिए बंद हो चुके भूतही नदी के जलस्त्रोत को बेहतर बनाने के लिए खुदाई की मांग की गयी।

लंबे अर्से बाद फिर उठा उदेरा स्थान बराज का मामला

हिलसा। निज संवाददाता

हिलसा में बाढ़-सुखाड़ की स्थिति के लिए टर्निंग प्वाइंट के रूप चर्चित उदेरा स्थान सिंचाई परियोजना लंबे अर्से बाद एक बार फिर चर्चा में आया है। इससे पहले लालू-राबड़ी की सरकार में मुहाने-नोनाई संघर्ष समिति के बैनर तले समाजसेवी साधुशरण सिंह ने उदेरा स्थान सिंचाई परिजोजना से हिलसा के किसानों को पानी देने को लेकर लंबे समय तक सत्याग्रह आंदोलन चलाया था।

उस वक्त सत्याग्रह आंदोलन में शरीक हुए प्रतिपक्ष के नेता रहे सुशील कुमार मोदी ने भी किसानों की मांग को जायज ठहराया था। इसके बाद नीतीश कुमार के सत्ता में आने पर समाजसेवी साधुशरण सिंह का आंदोलन रंग लाया और उदेरा स्थान पर बराज बना दिया गया। बराज बनने से आसपास के कुछ इलाके की किसानों की समस्या का निदान तो हुआ लेकिन हिलसा के किसानों की स्थिति और बद से बदतर होती चली गयी।

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