
अंचलकर्मियों को हंसापुर के ग्रामीणों ने बनाया बंधक
अंचलकर्मियों को हंसापुर के ग्रामीणों ने बनाया बंधक अंचलकर्मियों को हंसापुर के ग्रामीणों ने बनाया बंधक
अंचलकर्मियों को हंसापुर के ग्रामीणों ने बनाया बंधक चयनित औद्योगिक भूमि का निरीक्षण करने आये थे सीओ के समझाने पर शांत हुए लोग तो कर्मी हुए मुक्त भूमि अधिग्रहण के विरोध में सड़क जाम कर जताया विरोध फोटो चेवाड़ा01- हंसापुर में ग्रामीणों की भीड़ के बीच बंधक बने अंचल कर्मी। चेवाड़ा02- हंसापुर में जमीन अधिग्रहण के विरोध में प्रदर्शन करते ग्रामीण। चेवाड़ा, निज संवाददाता । औद्योगिक क्षेत्र के लिए चयनित भूमि का निरीक्षण करने गये अंचल कर्मियों को हंसापुर गांव के लोगों ने बंधक बना लिया। बाद में सीओ मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाकर शांत किया तो बंधक बने कर्मियों को मुक्त किया गया।

प्रखंड के हंसापुर गांव के पास औद्योगिक क्षेत्र के लिए जमीन का चयन किया गया है। गुरुवार को अंचल कार्यालय से अंचल अमीन धर्मेंद्र कुमार, राजस्व कर्मचारी उपेन्द्र कुमार, नाजीर राजकुमार सहित चार सदस्यीय टीम हंसापुर में चयनित भूमि का निरीक्षण करने आयी थी। इसी दौरान गांव के कुछ लोग विरोध करने लगे। कर्मियों ने कहा कि प्रशासन द्वारा उन्हें जमीन का जायजा लेने के लिए भेजा गया है। इससे लोग भड़क गये और देखते ही देखते पूरा गांव इकट्ठा हो गया। समझाने का प्रयास किया गया तो लोगों ने कर्मियों को ही बंधक बना लिया। इतना ही नहीं सड़क जाम कर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। कई घंटे तक गाड़ियों की आवाजाही ठप रही। घटना की जानकारी पाकर सीओ राजेन्द्र कुमार राजीव पहुंचे तो लोगों को समझाकर शांत किया। जान दे देंगे पर जमीन नहीं देंगे : गांव के योगेन्द्र यादव, श्यामसुंदर यादव , राजाराम , रामानन्द यादव ,राजेन्द्र प्रसाद, भीम साव, शारदा देवी, सुनैना देवी, पिंकी देवी व अन्य कहा कि सरकार उद्योग लगाने के नाम पर हम सबका जीवकोपार्जन के साधन को ही छीनना चाह रही है। उनकी जमीन उपजाऊ है और यही एकमात्र सहारा है। किसी भी सूरत में जमीन नहीं देंगे। किसानों ने डीएम को सौंपा ज्ञापन: उद्योग के नाम पर हंसापुर की उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण करने का विरोध कर रहे किसानों ने मुखिया भरत यादव के नेतृत्व में डीएम को आवेदन देकर न्याय की गुहार लगायी है । मुखिया ने कहा कि गांव में उद्योग लगाना काफी सराहनीय कदम है। लेकिन, उपजाऊ जमीन के चले जाने से किसानों के समक्ष संकट उत्पन्न हो जाएगा। अगर न्याय नहीं मिला तो गांव के लोग कोर्ट की शरण लेंगे।

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