सुहागिन महिलाएं आज करेंगी वट वृक्ष की पूजा

हिन्दुस्तान, बिहारशरीफ
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सुहागिन महिलाएं आज करेंगी वट वृक्ष की पूजा

वट सावित्री व्रत पर पति की दीर्घायु के लिए करेंगी मंगल कामना वट सावित्री व्रत और शनि जयंती का अद्भुत संयोग पावापुरी, निज संवाददाता। ज्येष्ठ अमावस्या के अवसर पर शनिवार को जिले में श्रद्धा और आस्था के साथ वट सावित्री व्रत मनाया जाएगा। सुहागिन महिलाएं निर्जला उपवास रखकर वट (बरगद) वृक्ष की पूजा कर अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना करेंगी। सुबह से ही मंदिरों और वट वृक्षों के पास महिलाओं की भीड़ उमड़ने की संभावना है। महिलाएं पारंपरिक श्रृंगार कर पूजा-अर्चना करेंगी तथा वृक्ष की परिक्रमा कर सूत बांधेंगी।

व्रत और शनि जयंती का संयोग

व्रत के दिन ही शनि जयंती और शनिश्चरी अमावस्या का अद्भुत संयोग भी बन रहा है। शनिवार को अमावस्या पड़ने से शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ऐसे में महिलाएं वट वृक्ष की पूजा के साथ शनि देव की आराधना कर परिवार की सुख-समृद्धि और संकटों से मुक्ति की कामना भी करेंगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार व्रत का संबंध माता सावित्री और सत्यवान की अमर कथा से जुड़ा है। कहा जाता है कि सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प, तप और पतिव्रता धर्म के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत पति की दीर्घायु और वैवाहिक सुख के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

वट वृक्ष की पूजा का महत्व

वट वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व: पंडित सूर्यमणि पांडेय ने बताया कि सनातन परंपरा में वट वृक्ष को अत्यंत पवित्र और जीवनदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसकी जड़ों में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का वास होता है। इस कारण वट वृक्ष को त्रिदेव का प्रतीक माना जाता है। इसकी लंबी आयु और सदाबहार स्वरूप अमरता, स्थिरता और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माने जाते हैं। वट वृक्ष के नीचे पूजा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है तथा दांपत्य जीवन मजबूत होता है। महिलाएं वृक्ष के चारों ओर धागा बांधकर परिक्रमा करती हैं, जो पति-पत्नी के अटूट संबंध और जीवनभर साथ निभाने का प्रतीक माना जाता है।

पूजा-विधि और धार्मिक परंपरा

व्रती महिलाएं सुबह स्नान कर नए वस्त्र और श्रृंगार धारण करती हैं। इसके बाद वट वृक्ष के नीचे जल, दूध, अक्षत, फूल, फल और पूजन सामग्री अर्पित कर कथा सुनती हैं। कई स्थानों पर महिलाएं 7, 11 या 108 बार वृक्ष की परिक्रमा कर सूत लपेटती हैं। पूजा के बाद पति की मंगलकामना करते हुए व्रत का पारण किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह पर्व सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी विशेष महत्व रखता है। पूजा स्थलों पर महिलाओं द्वारा भजन-कीर्तन और मंगल गीत गाए जाएंगे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बन जाएगा। (पावापुरी से अनिल उपाध्याय)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वट सावित्री व्रत किस दिन मनाया जाता है?
वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ अमावस्या के अवसर पर मनाया जाता है।
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