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दर्जनों विद्यालयों में जान-जोखिम में डाल बच्चे कर रहे हैं पढ़ाई

दर्जनों विद्यालयों में जान-जोखिम में डाल बच्चे कर रहे हैं पढ़ाई

संक्षेप: युवा पेज लीड पैकेजिंग : अनदेखी : जिले के दर्जनों विद्यालयों में जान-जोखिम में डाल बच्चे कर रहे हैं पढ़ाई अनदेखी : जिले के दर्जनों विद्यालयों में जान-जोखिम में डाल बच्चे कर रहे हैं पढ़ाई

Thu, 13 Nov 2025 10:20 PMNewswrap हिन्दुस्तान, बिहारशरीफ
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दर्जनों विद्यालयों में जान-जोखिम में डाल बच्चे कर रहे हैं पढ़ाई अधिकारी विद्यालय में हादसे के बाद ही दूसरे विद्यालय में करते हैं शिफ्ट प्राचार्य के अधिकतर आवेदन पर नहीं होती कार्रवाई, घट चुकी कई घटनाएं रहुई, अस्थावां, बिन्द समेत कई प्रखंड के कई विद्यालय का भवन जर्जर फोटो : नेजामबिगहा स्कूल : रहुई प्रखंड के नेजामबिगहा प्राथमिक विद्यालय का जर्जर भवन। बिन्द स्कूल : बिन्द प्रखंड के मदनचक प्राथमिक विद्यालय का जर्जर भवन। अस्थावां स्कूल : अस्थावां प्रखंड के मौलाना बिगहा प्राथमिक विद्यालय का भवन। राजगीर स्कूल : राजगीर बाजार मध्य विद्यालय का जर्जर छत। बिहारशरीफ, हिन्दुस्तान टीम। शिक्षा विभाग द्वारा दो साल के अंदर सैकड़ों विद्यालयों के जर्जर भवन की मरम्मत करायी गयी है।

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लेकिन, दर्जनों विद्यालयों के भवन अब भी जर्जर हैं। रहुई, अस्थावां, बिन्द, राजगीर, हरनौत समेत जिले में दर्जनों जर्जर विद्यालयों में जान-जोखिम में डालकर बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। शिक्षक भी अपनी नौकरी बचाने के लिए जर्जर भवन में बच्चों को पढ़ाने को विवश हैं। कई विद्यालयों में जर्जर भवन की वजह से हादसे हो चुके हैं। लेकिन, अधिकारी हादसे के बाद ही जर्जर भवन वाले विद्यालयों को दूसरे विद्यालय में शिफ्ट करते हैं। सूचना पर तत्काल कार्रवाई की जाएं तो संभवत हादसे को रोका जा सकता है। इसकी पुष्टि कई विद्यालयों के प्राचार्य कर रहे हैं। रहुई प्रखंड के नेजामबिगहा प्राथमिक विद्यालय का हालत ऐसी है कि आम इंसान किसी भी सूरत में नहीं रह सकता है। फिर भी बच्चों की पढ़ाई करायी जा रही है। इस विद्यालय को दूसरे विद्यालय में शिफ्ट करने की जरुरत है। ताकि, किसी तरह की अनहोनी नहीं हो। छत पर जमा होता है पानी : अस्थावां प्रखंड के मौलाना बिगहा प्राथमिक विद्यालय के प्रधान शिक्षक राजेन्द्र कुमार ने बताया कि 111 बच्चे नामांकित हैं। इन्हें पढ़ाने के लिए पांच शिक्षक हैं। विद्यालय में मुलभूत सुविधा के नाम पर जर्जर तीन कमरें हैं। जान-जोखिम में डाल कर शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे हैं। बारिश के दिनों में छत पर पानी जमा हो जाता है। जबकि, इस विद्यालय में मतदान केन्द्र भी है। जुलाई में अस्थावां बीईओ को जर्जर भवन की सूचना दी गयी थी। लेकिन, किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई है। इसी तरह, कोदैयाबिगहा प्राथमिक विद्यालय के प्रधान शिक्षक विद्यानंद चन्द्रयान ने बताया कि गिनती को विद्यालय में छह कमरे हैं। दो कमरें ध्वस्त तो दो कमरे काफी जर्जर हालात में है। इन दोनों कमरे की छत से बारिश में पानी टपकता है। अन्य दो कमरे में किसी तरह वर्ग कक्ष समेत अन्य जरूरी कार्य निपटाएं जाते हैं। बीआरसी से लेकर जिला शिक्षा कार्यालय में भी जर्जर भवन से हादसा होने की सूचना दी गयी है। ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर भी जर्जर कमरे की इंट्री करायी गयी है। लेकिन, किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गयी है। डर के साये में बच्चें पढ़ाई करने को विवश है। सांसद ने की पहल पर नहीं हुई मरम्मत : बिन्द प्रखंड के मदनचक प्राथमिक विद्यालय का भवन भी जर्जर हालात में है। ग्रामीणों ने अनुरोध पर सांसद कौशलेन्द्र कुमार ने डीईओ को इस विद्यालय की मरम्मत कराने का अनुरोध किया था। लेकिन, प्राचार्य के आवेदन की तरह ही सांसद के अनुरोध पर भी विचार नहीं किया गया। नतीजा यह कि जर्जर भवन में जान-जोखिम में डाल बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। प्रधान शिक्षक अरूण कुमार ने बताया कि स्कूल में 222 बच्चों को पढ़ाने के लिए 9 शिक्षक कार्यरत हैं। तीन कमरे जर्जर हालात में हैं। शिक्षक व बच्चे कभी भी हादसे का शिकार हो सकते हैं। राजगीर मध्य विद्यालय में हो सकता है हादसा राजगीर निज संवाददाता। स्थानीय बाजार का मध्य विद्यालय पुराने प्रखंड कार्यालय के जर्जर भवन में संचालित हो रहा है। बरसात के दिनों में विद्यालय के वर्ग कक्ष से लेकर कार्यालय और शौचालय में पानी टपकता है। छत का प्लास्टर जगह-जगह से टूटकर गिरता रहता है। बच्चे भय के साये में पढ़ाई करने को विवश हैं। विद्यालय के शिक्षकों का कहना है कि किसी भी समय बड़ी दुर्घटना हो सकती है। दरवाजे और खिड़कियों की हालत भी काफी खराब है। पहली से आठवीं कक्षाओं तक 288 बच्चे नामांकित है। इसी जर्जर भवन में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्राएं भी पढ़ाई करती हैं। प्राचार्य ओमकार मिश्रा ने बताया कि विद्यालय का भवन नहीं बना है। कई बार लिखित और मौखिक रूप से वरीय पदाधिकारियों को जर्जर भवन की सूचना दी गयी है। अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। शौचालय भी बदहाल हालत में हैं। अनहोनी के डर से छात्रों को शौचालय में जाने पर रोक लगायी गयी है।