पहली बार लोक अदालत में निपटाए गए ट्रैफिक चालान के 400 मामले
नालंदा कॉलेज में पहली बार राष्ट्रीय लोक अदालत में ट्रैफिक चालान के 400 मामलों का निपटारा किया गया। वाहन मालिकों को 50 फीसद छूट का लाभ मिला। शिविर में यूपीआई और नकद से जुर्माना जमा करने की व्यवस्था थी। 90 दिन से अधिक समय से लंबित चालानों का समाधान भी किया गया।

पहली बार लोक अदालत में निपटाए गए ट्रैफिक चालान के 400 मामले वाहन मालिकों को दी गयी 50 फीसद छूट नालंदा कॉलेज में लगायी गयी थी 2 बेंच यूपीआई और नकद दोनों माध्यमों से लोगों ने जमा किया जुर्माना फोटो: अदालत 01: नालंदा कॉलेज में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत में ट्रैफिक चालान का निपटारा करने केलिए जुटी वाहन चालकों की भीड़। बिहारशरीफ, निज संवाददाता। नालंदा कॉलेज में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत में पहली बार ट्रैफिक चालान निपटारा के लिए दो बेंच लगाए गए। वहां दो हजार मामलों के निपटारे का लक्ष्य रखा गया था। इसमें लगभग 400 मामलों का निपटारा हुआ। सभी मामलों में एकमुश्त करने केलिए वाहन चालकों की भीड़ जुटी। इसमें वाहन मालिकों को एक साथ 50 फीसद छूट का लाभ दिया गया। शिविर में यूपीआई और नकद दोनों माध्यमों से लोगों ने जुर्माना जमा किया। लोगों की सहूलियत के लिए परिसर में हेल्प डेस्क भी बनाए गए थे। वहां लोगों को जानकारी देने के साथ ही जुर्माना राशि जमा करने की व्यवस्था थी। दोपहर दो बजे तक वाहन चालकों की वहां काफी भीड़ रही।
90 दिनों से अधिक समय से लंबित चालान का हुआ समाधान
जिला परिवहन पदाधिकारी रंजीत कुमार ने बताया कि जिन वाहनों का चालान 90 दिन से अधिक समय से लंबित है, उन्हें इस लोक अदालत के जरिए ऑनलाइन माफी दी गयी। शिविर में लगभग 2000 चालानों के निष्पादन का लक्ष्य रखा गया है। अभियान के शुरुआती दौर में ही परिवहन विभाग के पास 10 मामलों का निपटारा कर लिया गया था। आधी राशि माफ होने से नालंदावासियों को जुर्माने के बोझ से काफी राहत मिली।
न्यायाधीशों की मौजूदगी में हुआ मामलों का निपटारा
यातायात डीएसपी खुर्शीद आलम ने बताया कि 31 जनवरी 2024 से पहले के जितने भी लंबित चालान थे, उन्हें समन भेजा गया था। विभाग ने उनका डेटाबेस तैयार कर प्रचार-प्रसार के माध्यम से लोगों को सूचना दी थी। नालंदा कॉलेज में न्यायालय के न्यायाधीशों की मौजूदगी में एकमुश्त 50 प्रतिशत राशि माफ कर मामलों का निपटारा किया गया। यहां आए लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई भी। परिवहन और यातायात पुलिस के अधिकारी एक साथ टेबल पर बैठकर आपसी समन्वय से लोगों की समस्याएं सुलझाए।
केस नंबर 01: 8 हजार कटा था चालान, 4 मिनट में आधा में हुआ समाधान
बिहारशरीफ शहर के रंजीत कुमार ने बताया कि अलग-अलग मदों में तीन मामलों में आठ हजार रुपए का चालान छह माह से लंबित था। कई बार कार्यालय का चक्कर लगाकर इसे कम करवाने का प्रयास किया। लेकिन, कहीं भी किस तरह का आश्वासन नहीं मिला। इसके बाद अखबार के माध्यम से ट्रैफिक चालान में अधिकतम 50 फीसद छूट दिए जाने की जानकारी मिली। इसके बाद नालंदा कॉलेज में लगी राष्ट्रीय लोक अदालत में आया। वहां बिना कुछ कहे सुने ही 50 फीसद माफी मिल गयी। महज चार मिनट में आधा में ही समाधान हो गया। यह बहुत ही अच्छी पहल है। यहां आने पर सीधे चार हजार रुपए की बचत हुई।
केस नंबर 02: हेलमेट और बीमा नहीं रहने पर 3 हजार का कटा था चालान
तकिया कलां मोहल्ला के प्रशांत कुमार ने बताया कि एक साथी ने मांगकर बाइक ली थी। जून 2025 में वह बिना हेलमेट के ही बाइक चला रहा था। ऑनलाइन चालाना कट गया। इसके साथ ही उस समय वाहन का बीमा का नवीनीकरण नहीं हो पाया था। इस कारण दोनों का एक साथ चालान कट गया। तीन हजार जुर्माना का मेरे मोबाइल में संदेश आया। इसमें रियायत देने के लिए कई बार अधिकारियों से गुहार लगायी। उन्होंने कहा कि सबकुछ ऑनलाइन है। हम कुछ नहीं कर सकते। शुक्रवार को ट्रैफिक चालान के निपटारे को लेकर शिविर लगने की जानकारी हुई। इसमें रियायत देने की भी बात कही गयी थी। चालान दिखाने पर अधिकारियों ने तुरंत आधा जुर्माना माफ कर दिया। मात्र डेढ़ हजार रुपए भरकर मामला का निपटारा किया गया।
केस नंबर 03: चार माह से लगा रहे थे चक्कर, मात्र 8 मिनट में हुआ निपटारा
बिहारशरीफ के मो. यूसुफद्दीन ने कहा कि एक दिन बहुत ही आवश्यक काम से बाहर निकलना था। दोस्त बाइक चला रहा था। इसी दौरान हेलमेट नहीं पहनने पर चालान कट गया। बाइक के कागजात भी पूरे नहीं थे। तीन हजार का चालान कटा। दोस्त ने शिविर में छूट मिलने की जानकारी दी। विभाग द्वारा भी समन (सूचना) भेजा गया था। आनन फानन में सुबह ही शिविर में पहुंच गए। वहां काफी भीड़ थी। लंबा इंतजार करना पड़ा। लगभग दो घंटा बाद मेरी बारी आयी। तब काउंटर पर जाते ही मात्र आठ मिनट में तनी हजार चालान का डेढ़ हजार में सेटेलमेंट किया गया। पहली पर वाहन चालकों को इस तरह की छूट का लाभ मिला है। इसे आगे भी इसी तरह चलना चाहिए। क्योंकि, कई बार न चाहते हुए भी गलतियां हो जाती हैं।
(बिहारशरीफ से कुमार कौशलेंद्र)


