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बिहारशरीफदो माह में सूबे को मिलेंगे 1605 नये दारोगा

हिन्दुस्तान टीम,बिहारशरीफPublished By: Newswrap
Mon, 24 May 2021 09:30 PM
दो माह में सूबे को मिलेंगे 1605 नये दारोगा

दो माह में सूबे को मिलेंगे 1605 नये दारोगा

बिहार पुलिस के इतिहास में पहली बार एक साथ 600 महिला दारोगा होंगी शामिल

बदलेगा बिहार पुलिस का स्वरूप, महिला अधिकारियों का बढ़ेगा अनुपात

राजगीर की बिहार पुलिस एकेडमी ने बनाये कई रिकॉर्ड

पहली बार एक ही संस्थान में दी गयी पुलिस अधिकारियों को पूरी ट्रेनिंग

दो बैचों में 145 डीएसपी हो चुके हैं पास आउट

आईपीएस प्रोबेशन कोर्स, एक्साइज इंस्पेक्टर व जिला कमांडेंट गार्ड इंडक्शन कोर्स की भी है व्यवस्था

फोटो:

पुलिस01 : राजगीर पुलिस एकेडमी में ट्रेनिंग लेते भावी पुलिस अधिकारी।

पुलिस02: राजगीर पुलिस एकेडमी की ग्रीन बिल्डिंग।

बिहारशरीफ। कार्यालय संवाददाता

दो माह में सूबे को 1,605 नये दारोगा मिलेंगे। इनमें 1,005 पुरुष तो 600 महिलाएं शामिल हैं। बिहार पुलिस के इतिहास में यह पहला मौका है, जब एक साथ इतनी तादाद में महिला पुलिस अधिकारी शामिल होंगी। इससे बिहार पुलिस का स्वरूप ही बदल जाएगा। पुलिस अधिकारियों में महिलाओं का अनुपात पहले की अपेक्षा काफी बढ़ जाएगा। ऐसा संभव हो पाया है बिहार पुलिस एकेडमी, राजगीर के कारण। इस एकेडमी ने अब तक कई इतिहास रचते हुए रिकॉर्ड बनाये हैं।

यह पहली बार होगा कि एक ही संस्थान में पुलिस अधिकारियों के पूरी ट्रेनिंग हुई हो। अब तक बिहार के चयनित पुलिस अधिकारियों को सूबे के कई संस्थानों के अलावा दूसरे राज्यों में भेजकर ट्रेनिंग पूरी करायी जाती थी। इसके पहले यहां से डीएसपी के दो बैचों में 145 तो एसआई के पहले बैच के 173 अधिकारी पास आउट हो चुके हैं।

आरक्षी से आईपीएस तक को ट्रेनिंग:

राजगीर पुलिस एकेडमी का भवन सूबे की पहली ग्रीन बिल्डिंग है। कैम्पस पूरी तरह ईको-‌फ्रेंडली है। बाहरी लुक से लेकर पढ़ाई के मामले में अपने तरह का देश का अनुपम पुलिस ट्रेनिंग संस्थान है। यहां आरक्षी से लेकर प्रोबेशनल आईपीएस तक की ट्रेनिंग की व्यवस्था है। फिलहाल, डीएसपी व एसआई (सब इंस्पेक्टर) के कोर्स चलाये जा रहे हैं। इसके अलावा आईपीएस प्रोबेशन कोर्स, एक्साइज इंस्पेक्टर इंडक्शन कोर्स व जिला कमांडेंट गार्ड इंडक्शन कोर्स चलाने की पूरी तैयारी है। बस, ट्रेनिंग लेने वालों के आने भर देर है। वहीं इक्वेस्ट्रियन स्कूल ‌(घुड़सवारी) व केनाइन स्कूल (श्वान शिक्षा स्कूल) भी चलाये जा रहे हैं।

शोध की भी है व्यवस्था :

ट्रेनिंग इंचार्ज एसपी अजय कुमार पाण्डेय ने बताया कि अपराध का बढ़ता दायरा व बदलते स्वरूप के अनुरूप पुलिस ट्रेनिंग के साथ ही शोध की भी व्यवस्था की गयी है। पासआउट होने वाले पुलिस अधिकारियों को कई ऐसे विषयों की शिक्षा दी गयी है, जिन्हें पहले के दारोगा जानते तक नहीं हैं। इन्हें साइबर अपराध, भीड़तंत्र ने निपटने, एटीएम क्लोनिंग, बैंक फ्रॉड से लेकर ड्राइविंग के साथ ही घुड़सवारी व तैराकी की अव्वल दर्जे की ट्रेनिंग दी गयी है।

श्वान दस्ता का भी कर सकेंगे संचालन:

अब तक का चलन रहा है कि श्वान दस्ता अलग होता है। लेकिन, नये पास आउट होने वाले दारोगा श्वान दस्ता का भी संचालन करने में निपुण होंगे। यहां कुत्तों को भी ट्रेनिंग दी जाती है। फिलहाल यहां छह ट्रेंड कुत्ते मौजूद हैं। घुड़सवारी के लिए 27 घोड़े रखे गये हैं।

डीएसपी व दारोगा की ट्रेनिंग लगभग समान:

डीएसपी व दारोगा दोनों को एक साल की ट्रेनिंग दी जाती है। इस दौरान 2,607 कक्षाएं व 23 सौ अंक की परीक्षाएं होती हैं। दोनों ही पदों के लिए इनडोर व आउटडोर ट्रेनिंग लगभग समान होती है। महज कुछ विषयों की सैद्धांतिक शिक्षा में थोड़ा अंतर होता है।

इनडोर ट्रेनिंग:

इनडोर ट्रेनिंग के तहत पुलिस शिक्षा, कानूनी शिक्षा, सामाजिक विज्ञान, फोरेंसिक साइंस और मेडिसीन, प्रबंधन, साइबर फोरेंसिक्स, आईटी एंड कम्प्यूटर, वीआईपी ड्यूटी, मीडिया हैंडलिंग, क्रिमिनोलॉजी (अपराध विज्ञान), पेनोलॉजी (जेल संबंधित विद्या), विक्टिमोलॉजी (पीड़ित विज्ञान), यातायात प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण की शिक्षा दी जाती है।

आउटडोर ट्रेनिंग :

आउटडोर ट्रेनिंग में पीटी, परेड, योग, ध्यान, ड्रिल, मस्केट्री (फायरिंग), वीपन ट्रेनिंग, हॉर्स राइडिंग, नाइट वर्क ट्रेनिंग, स्वीमिंग करायी जाती है।

आंकड़े की नजर में राजगीर पुलिस एकेडमी :

1. जमीन : 133 एकड़

2. भवन निर्माण की लगात : 177 करोड़

3. उपस्कर की लगात : 29 करोड़

4. शिलान्यास : 13 अगस्त 2010

5. उद्घाटन : 03 दिसंबर 2018

अधिकारी बोले :

अकादमी उन सभी मूल्यों और मापदंडों पर खरा उतरने में लगी है कि यहां ट्रेनिंग लेने वाले अधिकारी ईमानदारी और निष्पक्ष रूप से उत्साह व समर्पण के साथ लोगों की सेवा करें। तेजी से बदलते सामाजिक व आर्थिक परिवेश में लोगों की आकांक्षाओं के प्रति संवेदनशीलता साथ ही उनमें मानसिक सतर्कता विकसित करने का भरसक प्रयास कर रही है।

प्राणतोष कुमार दास, डीआईजी, बिहार पुलिस एकेडमी, राजगीर

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