आर्म्स लाइसेंस : सच में खतरा या स्टेटस सिंबल

Feb 16, 2026 10:31 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बिहारशरीफ
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बिहारशरीफ में हथियारों के लाइसेंस के लिए 15 मुखिया आवेदन कर चुके हैं। पंचायत चुनावों के नजदीक आने पर इस होड़ का कारण है। लाइसेंस प्राप्त करने के लिए आवेदन करने वालों की संख्या बढ़ गई है, जबकि आपराधिक रिकार्ड वाले लोगों को लाइसेंस नहीं दिया जाएगा। जिले में 1200 से अधिक लाइसेंसी हथियार हैं।

आर्म्स लाइसेंस : सच में खतरा या स्टेटस सिंबल

हथियारों के लाइसेंस के लिए आवेदन करने की लगी होड़ जिले के 15 मुखिया कर चुके हैं आवेदन, कई लाइन में फोटो : हथियार-हथियार। (फाइल फोटो) बिहारशरीफ, निज प्रतिनिधि। बड़ा बंगला, महंगी गाड़ियों के साथ लाईसेंसी हथियार रखना भी स्टेटस सिंबल बन गया है। ऐसे में एक सवाल उठता है कि लाइसेंस प्राप्त कर चुके या कोशिश कर रहे लोगों को सच में किसी से खतरा है या फिर शौक। कुछ दिन पहले ही सरकार ने पंचायत प्रतिनिधियों को हथियार के लिए लाइसेंस देने की घोषणा है। इसके बाद से लाइसेंस के लिए आवेदन करने वालों की होड़ लग गयी। 15 मुखियों ने लाइसेंस के लिए आवेदन दिया है।

कई लाइन में लगे हैं और प्रक्रिया के बारे में जानकारी ले रहे हैं। जिले में कुल 230 मुखिया हैं। खास बात है कि इसी साल पंचायत का चुनाव भी होना है। जानकारों की मानें तो जनप्रतिनिधि चुनाव के पहले लाइसेंस लेने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, हाल के दिनों में किसी पंचायत प्रतिनिधि को लाइसेंस नहीं दिया गया है। आपराधिक रिकार्ड वाले को लाईसेंस नहीं: लाइसेंस जारी करने की कई शर्तें हैं। जान-माल का खतरा, फसलों की सुरक्षा आदि के लिए लाइसेंस लिया जा सकता है। सबसे बड़ी शर्त है कि आवेदन करने वाले का आपराधिक रिकार्ड नहीं होना चाहिए। इस शर्त के अनुसार आपराधिक रिकार्ड वाले पंचायत प्रतिनिधियों यूं ही छट जायेंगे। आवेदन करने के बाद थाना स्तर से जांच रिपोर्ट की मांग की जाती है। जिले में 1200 से अधिक लाइसेंस : जिले में 1200 से अधिक लोगों के पास लाईसेंसी हथियार है। इसमें सबसे अधिक बंदूक और राइफल है। कुछ पिस्तौल के भी लाइसेंस हैं। निर्गत होने के पांच साल बाद लाइसेंस का नवीकरण कराये जाने का प्रावधान है। साथ ही चुनाव व अन्य अवसरों पर थाना स्तर से इसका सत्यापन भी किया जाता है। हथियारधारी बाउंसर रखने की भी होड़ : इन दिनों हथियारधारी बाउंसर रखने की भी होड़ मची है। यह भी एक तरह का दिखावा ही है। लोगों में भय और शक्ति का एहसास कराने के लिए बाउंसर रखना शुरू किया गया है। ऐसे लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। खासकर, विधानसभा चुनाव से पहले यह काफी देखने को मिला।

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