हैरानी : नए नगर आयुक्त ने संभाला पदभार, वेबसाइट पर पुराने का नाम दर्ज
नालंदा के नगर निकायों की वेबसाइट्स पर पुराने नगर आयुक्त का नाम दर्ज है, जबकि नए आयुक्त ने पदभार संभाल लिया है। डिजिटल गवर्नेंस की पोल खुल गई है, और अधिकांश वेबसाइट्स पर अधूरी जानकारी है। नागरिकों को अधिकारियों के नंबर नहीं मिल रहे हैं, जिससे उन्हें समस्याओं के समाधान में कठिनाई हो रही है।

हैरानी : नए नगर आयुक्त ने संभाला पदभार, वेबसाइट पर पुराने का नाम दर्ज डिजिटल गवर्नेंस की खुली पोल, वेबसाइट्स बनीं शो-पीस, शहरवासी फरियाद लेकर जाएं कहां, संशय की स्थिति नालंदा के 15 नगर निकायों में से अधिकतर की वेबसाइट्स पर अधूरी जानकारी बिहारशरीफ नगर निगम की साइट पर वार्ड पार्षदों के नंबर भी नदारद हरनौत, नालंदा, सरमेरा समेत कई पंचायतों की साइट पर नंबर खोजने में छूट रहे पसीने अस्थावां, रहुई और सिलाव नगर पंचायत का अब तक नहीं खुला डिजिटल खाता फोटो : नगर निगम : बिहारशरीफ शहर का विहंगम दृश्य। बिहारशरीफ, हमारे संवाददाता। डिजिटल इंडिया के दौर में जब सरकार हर सुविधा एक क्लिक पर देने का दावा कर रही है, तब नालंदा जिले के नगर निकायों की वेबसाइट्स सिर्फ कोरम पूरा रही है।
बिहारशरीफ में नए नगर आयुक्त ने लगभग एक माह पहले ही अपना पदभार संभाल लिया है। लेकिन, वेबसाइट पर पुराने का नाम दर्ज है। डिजिटल गवर्नेंस की पोल खुल गयी है। वहां बने वेबसाइट्स शो-पीस बनकर रह गयी है। ऐसे में शहरवासी फरियाद लेकर जाएं तो कहां जाएं। उनमें संशय की स्थिति बनी हुई है। नालंदा के 15 नगर निकायों में से अधिकतर की वेबसाइट्स पर अधूरी जानकारी दर्ज है। बिहारशरीफ नगर निगम की साइट पर वार्ड पार्षदों के नंबर तक नदारद हैं। हरनौत, नालंदा, सरमेरा समेत कई पंचायतों की साइट पर लोगों को अधिकारियों व पार्षदों के नंबर खोजने में पसीने छूट रहे हैं। हद तो यह कि अस्थावां, रहुई और सिलाव नगर पंचायत का अब तक डिजिटल खाता ही नहीं खुला है। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 और भारत सरकार की गाइडलाइन्स के तहत पारदर्शिता अनिवार्य है। लेकिन, जिले के 15 शहरी निकायों में से अधिकांश की वेबसाइट्स या तो अपडेट नहीं हैं या फिर उन पर जिम्मेदार अधिकारियों के मोबाइल नंबर ही गायब हैं। आम जनता अगर साफ-सफाई, पानी या अतिक्रमण की शिकायत लेकर निचले स्तर से निराश हो जाए, तो वह बड़े साहबों से कैसे संपर्क करे, इसका जवाब इन हाई-टेक वेबसाइट्स के पास नहीं है। नगर आयुक्त बदल गए पर वेबसाइट पर वही पुराना नाम : जिले के सबसे बड़े निकाय बिहारशरीफ नगर निगम की वेबसाइट भगवान भरोसे है। तत्कालीन नगर आयुक्त दीपक मिश्रा का तबादला जनवरी में ही हो गया और नए आयुक्त कुमार निशांत विवेक पदभार संभाल चुके हैं, लेकिन वेबसाइट पर अब भी पुराने आयुक्त का नाम ही दर्ज है। साइट पर स्टाफ डायरेक्टरी तो है, लेकिन मेयर, डिप्टी मेयर या वार्ड पार्षदों के नंबर नहीं हैं। श्री कुमार निशांत विवेक ने बताया कि इसे जल्द से जल्द ठीक करवाया जाएगा। चंडी में सिर्फ मुख्य पार्षद का नंबर : नगर पंचायतों की वेबसाइट्स निजी एजेंसियों से बनवाई गई हैं। लेकिन, इसमें सूचनाओं का घोर अभाव है। हरनौत, नालंदा और सरमेरा की साइट्स पर पार्षदों की सूची पीडीएफ फॉर्मेट में उपलब्ध करायी गयी है। वहां उनके मोबाइल नंबर नहीं हैं। गिरियक की साइट पर संपर्क के लिए पटना प्रमंडल का नंबर दिया गया है। पावापुरी, एकंगरसराय, परवलपुर, राजगीर और हिलसा नगर परिषद की वेबसाइट्स पर मुख्य पार्षद, उप मुख्य पार्षद और कार्यपालक पदाधिकारी के नाम तो बड़े-बड़े अक्षरों में लिखे हैं, लेकिन मोबाइल नंबर का कॉलम ही गायब है। अधिकतर साइट्स इतनी स्लो हैं कि खुलने में ही लंबा वक्त लगता है। चंडी में गनीमत बस इतनी है कि सिर्फ मुख्य पार्षद का नंबर दिया गया है। तीन निकायों का डिजिटल अस्तित्व नहीं: हैरानी की बात यह है कि अस्थावां, रहुई और सिलाव नगर पंचायत की अपनी कोई वेबसाइट ही नहीं है। जबकि बिहार नगरपालिका अधिनियम और राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना का उद्देश्य नागरिकों को घर बैठे सुविधाएं देना है। जलजमाव, गंदगी, होल्डिंग टैक्स और अतिक्रमण जैसे मुद्दों पर जब जमादार या क्लर्क नहीं सुनते, तो वरिष्ठ अधिकारियों को फोन करने की जरूरत पड़ती है। लेकिन, जब वेबसाइट पर नंबर ही नहीं होगा, तो शिकायत फाइल में दबकर रह जाएगी।
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