
शबे कद्र की पाक रात से रौशन हुआ शहर
शबे कद्र की पाक रात मंगलवार को बिहारशरीफ में श्रद्धा और एहतराम के साथ मनाई गई। मस्जिदें, दरगाहें और कब्रिस्तान रोशनी से जगमगा उठे। रात भर इबादत होती रही, जिसमें नमाज, तस्बीह और कुरान की तिलावत शामिल थी। इस रात को गुनाहों से तौबा कर अल्लाह से माफी मांगने का अवसर माना जाता है।
शबे कद्र की पाक रात से रौशन हुआ शहर मस्जिदों व दरगाहों में रात भर होती रही इबादत फोटो : दरगाह : बिहारशरीफ के दरगाह में इबादत करते लोग। बिहारशरीफ, एक संवाददाता। पवित्र माहे रमजान से पूर्व आने वाली रहमतों और मगफफरित की सबसे अफजल रात शबे-कद्र मंगलवार की रात पूरे अकीदत और एहतराम के माहौल में मनाया गया। लोगों ने मस्जिदों, दरगाहों और कब्रिस्तानों को आकर्षक रौशनी से सजाया। इससे पूरा इलाका रूहानी नूर से जगमगा उठा। शबे कद्र की पाक रात से पूरा शहर रौशन हुआ। मस्जिदों व दरगाहों में रात भर इबादत होती रही। शबे-कद्र को गुनाहों से तौबा कर अल्लाह से माफी मांगने की सबसे मुकद्दस रात माना जाता है।
मान्यता है कि जो बंदा सच्चे दिल से अपने गुनाहों पर पश्चाताप कर अल्लाह के सामने सिर झुकाता है, उसके गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। इस पाक रात में नमाज, इबादत, तस्बीह, जिक्र-ओ-अजकार और कुरान-ए-पाक की तिलावत से मस्जिदें गूंजती रहीं। मो. मुर्शिद आलम ने बताया कि बिहारशरीफ बड़ी दरगाह, अंबेर शेखाना की छोटी दरगाह, गगन दुल्लाह शाह की मजार, शहंशाह बाबा कांटा पर, हजरत मलिक बया पहाड़ पर, छोटी दरगाह पहाड़पुरा, कच्ची दरगाह अखाड़ा के आगे व अन्य प्रमुख मजारों और कब्रिस्तानों में विशेष रौशनी की गई। मस्जिदों में नमाजियों की भारी भीड़ उमड़ी। शबे-कद्र के बाद बुधवार को मुस्लिम धर्मावलंबियों ने रोजा रखा। इस तरह 15 दिनों के बाद पाक माह रमजान-उल-मुबारक का आगाज रोजा के साथ होगा। इसे लेकर मुस्लिम समाज में खासा उत्साह रहा। रोजेदारों से बाजारों में रौनक रही।

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