
ठंड की ठिठुरन : ग्लास ब्रिज व जू सफरी को छोड़ अन्य ऐतिहासिक स्थलों पर कम आ रहे सैलानी
राजगीर शहर में ठंड के कारण सैलानियों की संख्या में 40 फीसदी की कमी आई है। ग्लास ब्रिज और जू सफारी को छोड़कर अन्य ऐतिहासिक स्थलों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। इससे स्थानीय कारोबार पर भी नकारात्मक असर पड़ा है, जिससे होटल और दुकानों की बिक्री में 70 फीसदी तक की गिरावट आई है।
ठंड की ठिठुरन : ग्लास ब्रिज व जू सफरी को छोड़ अन्य ऐतिहासिक स्थलों पर कम आ रहे सैलानी ब्रह्मकुंड व गर्म कुंड में भी नहीं दिख रही भीड़ कड़ाके की ठंड से पर्यटन के साथ ही रोजगार पर भी पड़ रहा असर फोटो : ग्लास ब्रिज : राजगीर ग्लास ब्रिज। राजगीर, निज संवाददाता। स्काई वॉक (ग्लास ब्रिज) व जू सफारी को छोड़ राजगीर शहर के अन्य ऐतिहासिक व धार्मिक स्थलों पर इन दिनों सैलानियों की आवक काफी कम हो गयी है। पर्यटकों की संख्या में 40 फीसदी तक की कमी आयी है। ब्रह्मकुंड व गर्म कुंड में भी लोगों की भीड़ नहीं दिख रही है।
कड़ाके की ठंड से पर्यटन के साथ ही रोजगार पर भी इसका असर पड़ रहा है। नालंदा खंडहर, पावापुरी जलमंदिर, कुंडलपुर समेत अन्य जगहों पर भी पर्यटक व सैलानी नहीं जा रहे हैं। राजगीर ब्रह्मकुंड परिसर के कारोबारी दीपक कुमार गुप्ता ने कहा कि कड़ाके की ठंड ने इन दिनों अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थल राजगीर सहित पूरे नालंदा जिला के पर्यटन क्षेत्र की चमक-दमक को फीका कर दिया है। ठंड के प्रकोप का सीधा असर कारोबार पर भी पड़ने लगा है। होटल से लेकर स्थानीय बाजार में भी 60 फीसदी तक कारोबार प्रभावित हुआ है। पर्यटक स्थलों पर फैला हुआ है सन्नाटा : प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेष, पावापुरी जल मंदिर, वेणुवन, गृद्धकूट पर्वत, विश्व शांति स्तूप, रथ चक्र, बिंबिसार का कारागार, मनियार मठ, जरासंध का अखाड़ा, जरासंध स्मृति पार्क, घोड़ा कटोरा झील, वेणुवन विहार समेत अन्य दर्शनीय स्थल, जो आम दिनों में पर्यटकों की चहल-पहल से गुलजार रहते हैं, इन दिनों वहां सन्नाटा पसरा हुआ है। ठंड के कारण हालात ऐसे हैं कि सुबह से लेकर शाम तक अधिकतर पर्यटन स्थलों पर इक्का-दुक्का पर्यटक ही दिखाई दे रहे हैं। केवल जू सफारी, नेचर सफारी और विश्व शांति स्तूप के आसपास ही कुछ चहल-पहल है। हालांकि, यहां भी पहले की तुलना में भीड़-भाड़ नहीं दिख रहा है। पर्यटन कारोबार में आयी भारी गिरावट : पर्यटकों की आमद में आई भारी गिरावट का सीधा असर स्थानीय पर्यटन व इससे जुड़े कारोबार पर पड़ा है। होटल, लॉज, धर्मशाला, रेस्टोरेंट, टूर गाइड, ई-रिक्शा चालक, घोड़ा-तांगा संचालक, डोली चालक, गोदी वाली महिलाएं, मनिहारी, खिलौने और प्रसादी की दुकानें तथा स्मृति-चिह्न बेचने वाले दुकानदारों की बिकवाली काफी कम हो गयी है। इन दुकानों पर 70 फीसदी तक की गिरावट आयी है। कई होटल और धर्मशालाएं, जो इस मौसम में आमतौर पर हाउसफुल रहती थीं, अब लगभग खाली हैं। राजेश कुमार गुप्ता, श्याम सिंह समेत अन्य कारोबारियों ने कहा कि इस बार सर्दी के मौसम में उम्मीद से काफी कम पर्यटक पहुंचे हैं, जिससे रोजमर्रा का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। 30, 31 दिसंबर व 1 जनवरी को काफी अच्छी कमाई हुई। लेकिन, चार जनवरी के बाद से ठंड ने कारोबार पर ग्रहण लगा दिया है। जनवरी में भी सन्नाटा रहने से स्थानीय कारोबारी चिंतित : कारोबारी राहुल वर्मा, दीपक सिंह व अन्य ने कहा कि राजगीर और नालंदा जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों के लिए जनवरी का माह काफी मुफिद है। लेकिन, इस बार कड़ाके की ठंड वव शीतलहर ने पर्यटन गतिविधियों को लगभग ठप कर दिया है। इससे स्थानीय कारोबारी काफी चिंतित हैं। गर्म पानी के कुंड में भी नहीं आ रहे लोग : पहाड़ों से निकलने वाले गर्म पानी के झरना (कुंड) और ब्रह्मकुंड में स्नान करने के लिए काफी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक राजगीर पहुंचते थे। इस बार कड़ाके की ठंड का असर यहां भी दिखा है। काफी कम लोग यहां पहुंच रहे हैं। इस मौसम में आमतौर पर भूटान से आने वाले पर्यटकों की काफी संख्या होती है। इस बार उनकी संख्या न के बराबर नजर आती है। भूटानी पर्यटक भी ठंड के कारण राजगीर तक नहीं पहुंच रहे हैं।

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