
ईशापुर स्कूल : एचएम के आवेदन पर हुई होती कार्रवाई तो बच्चे नहीं होते हादसे का शिकार
संक्षेप: गिरियक प्रखंड के ईशापुर प्राथमिक विद्यालय के प्रधान शिक्षक ने तीन माह पहले बीईओ और डीईओ को विद्यालय की जर्जर स्थिति की सूचना दी थी। बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं हुई। सितंबर में छत का मलबा गिरने से बच्चे और शिक्षक बाल-बाल बचे। लोग जिला शिक्षा कार्यालय की लापरवाही पर सवाल उठा रहे हैं।
ईशापुर स्कूल : एचएम के आवेदन पर हुई होती कार्रवाई तो बच्चे नहीं होते हादसे का शिकार एचएम ने तीन माह पहले बीईओ को हादसे की आशंका की दी थी सूचना सितंबर में भी गिरा था छत का मलबा, बाल बाल बच गए थे शिक्षक व बच्चे जिले के कई विद्यालय में हो चुके है हादसे, फिर भी नहीं चेत रहा विभाग फोटो : गिरियक स्कूल 01 : गिरियक प्रखंड के ईशापुर प्राथमिक विद्यालय का जर्जर छत। बिहारशरीफ, हिन्दुस्तान संवाददाता। गिरियक प्रखंड के ईशापुर प्राथमिक विद्यालय के प्रधान शिक्षक ने तीन माह पहले ही स्कूल का जर्जर भवन व क्षतिग्रस्त रहने की सूचना बीईओ व डीईओ को दी थी।

प्रधान शिक्षक के आवेदन पर जिला शिक्षा कार्यालय द्वारा कार्रवाई की गयी होती तो बच्चे हादसे का शिकार नही होते। प्रधान शिक्षक ने बीईओ को तीन माह पहले तो डीईओ को डेढ़ माह पहले ही विद्यालय का जर्जर भवन गिरने से हादसे होने की आशंका की सूचना दी थी। लेकिन, तीन माह में एक भी अधिकारी व तकनीकी टीम अधिकारी स्कूल का जायजा लेने नहीं पहुंचे। जबकि, सितंबर 2024 में भी इस विद्यालय का जर्जर भवन से छत का मलबा गिरा था। गनीमत रही ही इस दौरान बच्चे व शिक्षक बाल बाल बच गए थे। प्रधान शिक्षक जीतेन्द्र कुमार ने बताया कि जुलाई में विद्यालय में योगदान किया था। स्कूल भवन की जर्जरता की सूचना जुलाई 2025 में ही गिरियक प्रखंड के बीईओ को आवेदन के माध्यम से दी थी। आवेदन में कहा था कि इस विद्यालय का भवन पुरी तरह जर्जर है। यह विद्यालय कभी भी ध्वस्त हो सकता है। बच्चों व शिक्षकों का जानमाल का खतरा व्याप्त है। शौचालय व पेयजल की भी समस्या है। प्रधान शिक्षक ने विद्यालय का आधारभूत समस्याओं का तत्काल जांच कर बुनियादी सुविधा बहाल कराने की गुहार लगायी थी। नहीं हुई कार्रवाई को डीईओ को भेजा पत्र : बीईओ द्वारा कार्रवाई नहीं होने पर प्रधान शिक्षक ने सितंबर 2025 में डीईओ आनंद विजय को विद्यालय का भवन जर्जर एवं क्षतिग्रस्त रहने की सूचना दी थी। डीईओ को भेजे आवेदन में प्रधान शिक्षक ने स्पष्ट रुप से कहा था कि विद्यालय का भवन जर्जर व क्षतिग्रस्त रहने की वजह से कभी भी गिर सकता है। बच्चे व शिक्षक हादसे का शिकार हो सकते है। क्षतिग्रस्त भवन सितंबर 2025 में भी छत का मलबा गिरा था। शिक्षक व बच्चे बाल बाल बच गए थे। जर्जर भवन की वजह से बच्चों की पढ़ाई बाधित हो सकती है। लोग उठा रहे सवाल : लोग सवाल कर रहे है जिला शिक्षा कार्यालय में कई सहायक अभियंता व कनीय अभियंता कार्यरत है। हर प्रखंड के लिए एक कनीय अभियंता हैं। लेकिन, कनीय अभियंता अपना प्रखंड मुख्यालय में नहीं रहकर जिला शिक्षा कार्यालय में ही जमे रहते है। इसी का नतीजा है कि जर्जर भवन की जांच समय पर नहीं हो पाती है। या फिर कनीय अभियंता को जर्जर भवन की जानकारी नहीं रहती है।

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