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डॉक्ट्रेट की मानद उपाधि से नवाजे गए संजीव

हिन्दुस्तान टीम,बिहारशरीफPublished By: Newswrap
Wed, 26 May 2021 09:10 PM
डॉक्ट्रेट की मानद उपाधि से नवाजे गए संजीव

डॉक्ट्रेट की मानद उपाधि से नवाजे गए संजीव

इंजीनियरिंग करने के बाद भी वर्ष 2000 से समाजसेवा में लगे रहे हैं संजीव

इससे पहले भी कई बार उन्हें किया जा चुका है सम्मानित

एशिया का पहला जनहित शौचालय संजीव ने ही बिन्द में बनवाया था

मानव मूत्र का उर्वरक के रूप में करवा चुके हैं उपयोग

मशरूम मैन ऑफ द बिहार के नाम से भी जाने जाते हैं संजीव

फोटो-

संजीव : संजीव कुमार।

बिहारशरीफ। हिन्दुस्तान संवाददाता

वर्षों से समाजसेवा से जुड़े संजीव कुमार को डॉक्ट्रेट की मानद उपाधि से नवाजा गया है। इंजीनियरिंग करने के बाद वे वर्ष 2000 से ही समाजसेवा में लगे रहे हैं। उनकी समाजसेवा को देखकर इससे पहले भी कई बार उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। उनका काम हमेशा एक से बढ़कर एक रहा है। उन्होंने वर्ष 2013 में बिन्द में एशिया का पहला जनहित शौचालय बनवाया था। मानव मूत्र को उर्वरक के रूप में भी उपयोग करवा चुके हैं। इस दौरान इंग्लैड व जर्मनी के दो छात्र भी साथ थे। उनके कारनामों की खबर केवल देश ही नहीं, बल्कि विदेशी मीडिया भी अपने अखबारों में प्रकाशित कर चुकी है। उनका सबसे अधिक जोर मशरूम के उत्पादन पर रहा है। इस कारण उन्हें ‘मशरूम मैन ऑफ द बिहार के नाम से भी जाना जाता है।

बिन्द थाना क्षेत्र के ई. संजीव कुमार ने बताया कि वे वर्ष 2006-07 में किसान श्री अवार्ड उसके बाद नीलकंठ सम्मान, मानवता की शांति, सरदार पटेल सम्मान, द श्याम नारायण सिंह समाजिक सद्भावना सम्मान, प्रतिभा सम्मान, डेक्युमेटरी फिल्म व अन्य अवार्ड से सम्मानित हो चुके हैं। जबकि, अभी वे एग्रो बेस्ड रिसर्च इंस्टीच्यूट के प्रबंध निदेशक, एटीएमए के चेयरमैन, आरएसी दूरदर्शन के सदस्य, द श्याम नारायण सिंह फाउंडेशन के सचिव, पेस्ट निगरानी और सलाहकार समिति के सदस्य, राइट टू एजुकेशन फार्म के संयोजक व अन्य पदों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके प्रयास से अभी 25 हजार लोग मशरूम से जुड़े हैं। अन्य कामों के अलावा इस क्षेत्र में उनका समय गुजरता है। क्योंकि, इस काम से बहुत सारे लोगों को रोजगार भी मुहैया हो जाता है।

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