Hindi NewsBihar NewsBiharsharif NewsRising Concerns Over Fake and Adulterated Goods in Rajgir Market Need for Consumer Protection Commission
ब्रांडेड सामान के नाम पर ठगी के शिकार हो रहे उपभोक्ता

ब्रांडेड सामान के नाम पर ठगी के शिकार हो रहे उपभोक्ता

संक्षेप:

राजगीर बाजार में दुकानदार अधिक मुनाफे के चक्कर में नकली और मिलावटी सामान बेच रहे हैं। उपभोक्ता सस्ते दाम देखकर इन सामानों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जिससे उनकी ठगी हो रही है। असली ब्रांड कंपनियों और सरकार को आर्थिक नुकसान हो रहा है। उपभोक्ता आयोग बनाने की आवश्यकता है ताकि सही उत्पादों की बिक्री सुनिश्चित हो सके।

Nov 12, 2025 09:19 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बिहारशरीफ
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ज्यादा मुनाफा के चक्कर में दुकानदार बेच रहे नकली और मिलावटी सामान उपभोक्ता भी सस्ते दाम देखकर नकली सामान की ओर हो रहे आकर्षित उपभोक्ता आयोग बनाकर नकेल कसने की है जरूरत फोटो : राजगीर बाजार : राजगीर बाजार। राजगीर, निज संवाददाता। आज के दौर में जब हर कोई ब्रांडेड उत्पादों की ओर आकर्षित हो रहा है, वहीं बाजारों में नकली अर्थात डुप्लीकेट ब्रांडेड सामानों की बाढ़-सी आ गई है। यह न केवल उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय यया ठगी का मामला है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और ब्रांड छवि पर भी सीधा प्रभाव डाल रही है। बाजारों के अच्छे-अच्छे दुकानों से लेकर फुटपाथों पर नामी कंपनियों के नाम से बिक रहे कपड़े, जूते, परफ्यूम, मोबाइल एक्सेसरीज और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं समेत खाद्य सामग्री तक मिलावटी और नकली बेचे जा रहे हैं।

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फुटपाथों पर कम दाम में मिलने वाले इन उत्पादों को असली समझकर ग्राहक खरीद लेते हैं। लेकिन, जब गुणवत्ता की बात आती है, तो पता चलता है कि वे असल में ठगे गए हैं। वहीं छोटे बड़े दुकानों में भी ब्रांड के नाम पर नकली और मिलावटी सामान ब्रांडेड बाताकर ग्राहकों को ऊंचे दामों पर बेचे जा रहे हैं। ग्राहक जब इन इन सामानों को प्रयोग में लाते हैं तब उन्हें नकली सामान होने का पता चल पाता है, तब वे मन मसोस कर रह जाते हैं। क्योंकि, दुकानदार शिकायत करने के बाद इसे गंभीरता से नहीं लेत है। राजगीर दांगी टोला निवासी बबलू कुमार व अन्य ने बताया कि मैं रूपा और माइक्रो मैन का दो-दो जंघिया राजगीर के दो अलग-अलग दुकानों से खरीदा, परंतु दोनों अंडरवियर एक माह में ही खराब हो गया, सभी के रबर (इलास्टिक) एक माह में ही खराब हो गए। उन्होंने कहा कि जब दुकानदार से इस विषय में बात की, तो उन्होंने कहा ऊपर से ही ऐसा सामान आ रहा है, तो हम क्या कर सकते हैं। इसी तरह नाहुब गांव निवासी लाल बाबू ने कहा कि हमने एक नामी गिरामी ब्रांडेड कंपनी का मिर्ची पावडर लिया। परंतु उससे सब्जी में तीखापन बिल्कुल ही नहीं आया। दांगी टोला निवासी विपीन कुमार ने कहा कि हमने उडलैंड कंपनी का एक महंगा जूता लिया। परंतु तीन दिन में ही जूता का पूरा सोल उखड़ गया। दांगी टोला निवासी रिंकू देवी ने कहा कि राजगीर बाजार के एक किराना दुकान से एक अच्छी नामी कंपनी का सर्फ लिया। उसमें एक तो वजन कम दूसरा सर्फ में कास्टिक की मात्रा अधिक होने की वजह से कपड़े का रंग चला गया। इस तरह से राजगीर बाजार की फुटपाथ से लेकर अन्य दुकानों में नकली सामान खुलेआम बेचा जा रहा है। ग्राहकों ने इन दुकानों की उच्च स्तरीय जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की है। ताकि, ग्राहक ठगी के शिकार न हों। साथ ही पर्यटक नगरी राजगीर के शान में कोई बट्टा न लगे। ब्रांड कंपनियों और सरकार को हो रहा आर्थिक नुकसान : नकली सामान के खुलेआम बिकने से सबसे बड़ा नुकसान असली ब्रांड कंपनियों को होता है। उनकी साख पर असर पड़ता है और बिक्री में गिरावट आती है। इसके अलावा सरकार को भी जीएसटी और अन्य करों के रूप में मिलने वाला राजस्व प्रभावित होता है, क्योंकि अधिकतर नकली सामान बिना बिल और टैक्स के बेचा जाता है। यह विडंबना ही है कि खुलेआम बाजारों में नकली सामान बेचे जाने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। कस्टमर प्रोटेक्शन एक्ट, ट्रेडमार्क एक्ट और कंपनी कानून के अंतर्गत यह अपराध है, लेकिन अमल नाममात्र का होता है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन की अनदेखी से यह धंधा तेजी से फल-फूल रहा है। नकली ब्रांडेड समानों का बाजार में बढ़ता चलन उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। आवश्यकता है जागरूकता और सख्त कार्रवाई की, ताकि आम नागरिकों को गणवत्तायुक्त और असली उत्पाद मिल सके और अर्थव्यवस्था भी सुरक्षित रह सके। उपभोक्ताओं को भी बरतनी चाहिए सतर्कता : असली ब्रांड का सामान लेते समय हमेशा सही बिल लें। नकली उत्पादों की पैकिंग में त्रुटियां या अशुद्धियां दिखे तो न लें। अत्यधिक कम कीमत और ऑफर मिले, तो संदेहास्पद है। बारकोड स्कैन करके उत्पाद की प्रमाणिकता जांची जा सकती है। उपभोक्ता आयोग बनाने की आवश्यकता है। राजगीर के श्याम सुंदर सिंह, मालती देव, मंजीत सिंह व अन्य स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने कहा कि सरकार नीति निर्धारण के लिए कई समिति और आयोग का गठन करती है। इस तरह उपभोक्ता आयोग का गठन कर बाजारों में बिकने वाले नकली और मिलावटी सामानों पर नकेल कसा जा सकता है।