
अस्थावां में छोटे बूथों ने तोड़ा रिकॉर्ड, विशुनपुर में सर्वाधिक 83.62 फीसदी मतदान
अस्थावां विधानसभा क्षेत्र में मतदान का आंकड़ा 56.81% रहा, जो 2020 के 51.2% से 5.6% अधिक है। विशुनपुर में 83.62% और कमसपुर में 32.62% वोटिंग हुई। ग्रामीण बूथों पर मतदाताओं का उत्साह बढ़ा है, जिससे लोकतांत्रिक चेतना में सुधार दिख रहा है। परिणाम 14 नवंबर को आएंगे।
अस्थावां में छोटे बूथों ने तोड़ा रिकॉर्ड, विशुनपुर में सर्वाधिक 83.62 फीसदी मतदान कमसपुर में सबसे कम 32.62% वोटिंग, ग्रामीण बूथों पर दिखा जबरदस्त उत्साह 2020 की तुलना में 5.6% अधिक पड़े वोट, औसत मतदान 56.81% रहा महिलाओं और युवाओं की भागीदारी से ग्रामीण इलाकों में दिखा जोश फोटो: मतदाता 01: अस्थावां विधानसभा क्षेत्र के एक ग्रामीण मतदान केंद्र पर वोट डालने के लिए कतार में खड़े मतदाता। बिहारशरीफ, हमारे संवाददाता। विधानसभा चुनाव में जीत और हार किसकी, इसका फैसला तो 14 नवंबर को होगा। लेकिन, अस्थावां विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों ने लोकतंत्र के प्रति अपनी बेहतर जिम्मेदारी निभाकर पहले ही दिल जीत लिया है।
ग्रामीण बूथों पर मतदाताओं का ऐसा उत्साह दिखा कि वोटिंग का आंकड़ा 80 प्रतिशत को पार कर गया। इन गांवों ने न केवल जिले, बल्कि पूरे राज्य के लिए एक मिसाल पेश की है। सबसे अधिक 83.62% मतदान उत्क्रमित मध्य विद्यालय विशुनपुर (बूथ संख्या 47) में हुआ। जबकि, सबसे कम 32.62% वोटिंग उर्दू प्राथमिक विद्यालय, कमसपुर (बूथ संख्या 293) में दर्ज की गई। कुल मिलाकर विधानसभा का औसत मतदान 56.81% रहा। जो वर्ष 2020 के 51.2% के मुकाबले लगभग 5.6 प्रतिशत अधिक है। यह बढ़ी हुई भागीदारी चुनाव परिणामों को अप्रत्याशित बना सकती है। छोटे बूथों पर जागरूकता, बड़े केंद्रों पर सन्नाटा: वोटिंग पैटर्न बताता है कि छोटे और ग्रामीण बूथों में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। विशुनपुर, फतेहपुर सरबहदीनगर, बरिठ, मालती और चुलिहारी जैसे बूथों में 70 से 83 प्रतिशत मतदान हुआ। वहीं कमसपुर, रहमानपुर, नोआंवा और मोहनी जैसे क्षेत्रों में मतदान 35 से 45 प्रतिशत के बीच सीमित रहा। वोट देने के लिए प्रेरित करने की परंपरा : आंकड़ों के अनुसार, जिन केंद्रों पर 600 से कम मतदाता थे, वहां औसतन 63.5% मतदान हुआ। जबकि, 800 से अधिक मतदाता वाले बूथों पर यह घटकर 51.3% रह गया। जानकारों के अनुसार, छोटे बूथों पर मतदाताओं का आपसी जुड़ाव, उम्मीदवारों से व्यक्तिगत संपर्क और एक-दूसरे को वोट देने के लिए प्रेरित करने की परंपरा इस बढ़त की मुख्य वजह है। 2020 की तुलना में प्रदर्शन बेहतर: वर्ष 2020 में अस्थावां विधानसभा में 51.2% मतदान हुआ था। इस बार 56.81% तक का आंकड़ा छूना एक महत्वपूर्ण सुधार है। पिछले चुनाव में कोविड महामारी और कुछ जगहों पर खराब मौसम के कारण मतदान प्रभावित हुआ था। इस बार साफ मौसम, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था और चुनाव आयोग के जागरूकता अभियानों ने मतदाताओं, खासकर महिलाओं और युवाओं को बूथ तक लाने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, कुल प्रतिशत अभी भी नालंदा जिले के औसत मतदान (लगभग 59.81%) से थोड़ा कम है। लोकतांत्रिक चेतना : रुझान से स्पष्ट है कि ग्रामीण इलाकों की लोकतांत्रिक चेतना शहरी इलाकों से कहीं अधिक जीवंत है। छोटे बूथों का बढ़ा हुआ प्रतिशत भविष्य की चुनावी रणनीतियों को प्रभावित करेगा। अब देखना यह है कि यह बढ़ी हुई भागीदारी किस उम्मीदवार के पक्ष में जाती है। इसका जवाब 14 नवंबर को मतगणना के बाद सामने आएगा। इन बूथों पर दिखा सबसे ज्यादा उत्साह: उत्क्रमित मध्य विद्यालय, विशुनपुर (बूथ 47): 83.62% प्राथमिक विद्यालय, डेढ़घारा (बूथ 161): 80.72% प्राथमिक विद्यालय, छतरपुर (बूथ 20): 77.59% उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बरिठ (पश्चिमी) (बूथ 336): 77.02% प्राथमिक विद्यालय, बेलदरिया इसुआ (पश्चिमी) (बूथ 157): 74.27% इन बूथों पर मतदाता रहे उदासीन: उर्दू प्राथमिक विद्यालय, कमसपुर (बूथ 293): 32.62% मदरसा फैजुल उलूम, उगावां (दक्षिणी) (बूथ 325): 34.88% सामुदायिक भवन, कमसपुर (बूथ 294) 37.23 % मध्य विद्यालय, नोआवां (उत्तरी) (बूथ 313): 37.48% मध्य विद्यालय, नेरुत (उत्तरी) (बूथ 201): 37.59%

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