दिल्ली में नव नालंदा महाविहार ने दुर्लभ पांडुलिपियों का संग्रह का किया प्रदर्शन
दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में नव नालंदा महाविहार द्वारा दुर्लभ पांडुलिपियों का संग्रह प्रदर्शित किया गया। इस प्रदर्शनी में डॉ. राजेंद्र प्रसाद का भाषण, चीनी त्रिपिटक, अट्ठकथाएं और अन्य पुस्तकें...

दिल्ली में नव नालंदा महाविहार ने दुर्लभ पांडुलिपियों का संग्रह का किया प्रदर्शन आईसीसी में डॉ. राजेंद्र प्रसाद का भाषण समेत कई पुस्तकों की भी लगी प्रदर्शनी चीनी त्रिपिटक, त्रिपिटक के खंड, अट्ठकथाएं देखने के लिए उमड़ रही लोगों की भीड़ फोटो : नव नालंदा : दिल्ली इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित प्रदर्शनी में नव नालंदा महाविहार के कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह व अन्य। बिहारशरीफ, निज संवाददाता। नव नालंदा महाविहार ने दिल्ली इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित प्रदर्शनी में दुर्लभ पांडुलिपियों का संग्रह का प्रदर्शन किया है। वहां डॉ. राजेंद्र प्रसाद का भाषण समेत कई पुस्तकों की भी प्रदर्शनी लगी है।
चीनी त्रिपिटक, त्रिपिटक के खंड, अट्ठकथाएं देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है। नव नालंदा महाविहार के कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह ने रविवार को बताया कि इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (आईआईसी) के प्रतिष्ठित वार्षिक उत्सव सा-वनिता में प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। इसका उद्घाटन 10 अक्टूबर को सम्मेलन कक्ष में आईआईसी के अध्यक्ष श्याम शरण, प्रसिद्ध कला विशेषज्ञ एवं आईआईसी की आजीवन न्यासी डॉ. मीनाक्षी गोपीनाथ, निदेशक डॉ. केएन श्रीवास्तव और नव नालंदा महाविहार के कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह ने किया। प्रो. सिंह ने बताया कि नव नालंदा महाविहार (एनएनएम) ने अपनी दुर्लभ पांडुलिपियों का संग्रह प्रदर्शित किया है। इसमें सिंहली लिपि में पालि ग्रंथ विशुद्धिमग्ग, तिब्बती लिपि में संस्कृत ग्रंथ अष्टसह्त्रिरका प्रज्ञा पारमिता सूत्र, खमेर लिपि में पालि व्याकरण, चीनी त्रिपिटक, त्रिपिटक के खंड, एनएनएम द्वारा प्रकाशित पालि हिंदी शब्दकोश, स्थापना दिवस के अवसर पर भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद का भाषण और कई अन्य पुस्तकें, दुर्लभ दस्तावेज और प्रकाशन का भी प्रदर्शन किया गया है। इसके अलावा पवित्र भारतीय बौद्ध स्थलों को दर्शाने वाले पैनल प्रदर्शनी में लगाया गया है। प्रदर्शनी में एनएनएम द्वारा तैयार वृत्तचित्र फिल्में भी दिखाई जा रही हैं। अध्यक्ष श्याम शरण ने प्राचीन नालंदा परंपरा की विरासत को पुनर्जीवित करने के एनएनएम के प्रयासों की सराहना की। मौके पर पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. केके पांडेय, सुबोध कुमार व अन्य मौजूद थे।

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