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उपेक्षा : 32 साल बाद भी अनुमंडल अस्पताल राजगीर को नहीं मिला पूर्णकालिक डीएस

उपेक्षा : 32 साल बाद भी अनुमंडल अस्पताल राजगीर को नहीं मिला पूर्णकालिक डीएस

संक्षेप:

उपेक्षा : 32 साल बाद भी अनुमंडल अस्पताल राजगीर को नहीं मिला पूर्णकालिक डीएसउपेक्षा : 32 साल बाद भी अनुमंडल अस्पताल राजगीर को नहीं मिला पूर्णकालिक डीएसउपेक्षा : 32 साल बाद भी अनुमंडल अस्पताल राजगीर को...

Oct 14, 2025 09:37 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बिहारशरीफ
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उपेक्षा : 32 साल बाद भी अनुमंडल अस्पताल राजगीर को नहीं मिला पूर्णकालिक डीएस प्रभारी उपाधीक्षक के भरोसे चल रहा अस्पताल पर्यटक नगरी को देखते हुए रेफरल अस्पताल को 32 साल किया गया था अपग्रेड फोटो : राजगीर हॉस्पिटल : राजगीर अनुमंडलीय अस्पताल का भवन। राजगीर, निज संवाददाता। 32 साल पहले पर्यटक शहर राजगीर रेफरल अस्पताल को अनुमंडलीय अस्पताल का दर्जा दिया गया था। दर्जा मिलने के कुछ साल बाद अनुमंडलीय अस्पताल का नया भवन भी बन गया। लेकिन, इस अस्पताल को 32 साल बाद भी पूर्णकालिक उपाधीक्षक नहीं मिल सका है। इसकी वजह से अबतक यह अस्पताल प्रभारी उपाधीक्षक (डीएस) के भरोसे ही चल रहा है।

विभागीय उदासीनता के कारण तीन दशक बाद भी इस अस्पताल को नियमित उपाधीक्षक नहीं दिया गया है। यानि स्थापना के समय से ही यह अस्पताल प्रभारी उपाधीक्षक के भरोसे चल रहा है। पूर्णकालिक उपाधीक्षक नहीं होने का असर अस्पताल की व्यवस्थाओं, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और कर्मचारियों के समन्वय पर पड़ता है। इस कारण कई बार नीतिगत निर्णयों में भी विलंब होता है। इससे मरीजों को समय पर इलाज और सुविधाएं नहीं मिल पाती है। स्वास्थ्यकर्मियों की समस्याएं और संसाधनों की मांग भी प्रभावी रूप से उच्च स्तर तक नहीं पहुंच पाती हैं। राजगीर राज्य का प्रमुख ऐतिहासिक पर्यटन स्थल है। यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग आते हैं। इसलिये भी यहां का अस्पताल सुव्यवस्थित और सशक्त होना बहुत आवश्यक है। यहां नियमित उपाधीक्षक की नियुक्ति होने से अस्पताल का प्रबंधन चुस्त दुरुस्त और मजबूत होगा। आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। राजगीरवासियों और यहां आने वाले पर्यटकों को सुलभ, समुचित और समयबद्ध चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकेगा। जानकार बताते हैं कि प्रभारी उपाधीक्षक के पास सीमित अधिकार होते हैं। निकासी और व्ययन (डीडीओ) का दायित्व भी उनके पास नहीं होता है। इससे कई बार आवश्यक प्रशासनिक निर्णय समय पर नहीं लिया जाता है। अस्पताल में दवाओं की आपूर्ति, संसाधनों का समुचित प्रबंधन, चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी की उपस्थिति, व्यवहार, साफ-सफाई, आपातकालीन सेवाएं और मरीजों की देखभाल जैसे निर्णय लेने में अड़चनें आती हैं। इसके कारण मरीजों को अक्सर असुविधा का सामना करना पड़ता है। मरीजों और पर्यटकों को उठाना पड़ रहा खामियाजा : पर्यटन स्थल के अलावे राजगीर में बड़ी संख्या में केन्द्रीय और राज्य स्तरीय संस्थान हैं। ऐसे में यहां की स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर और मजबूत होना आवश्यक है। लेकिन, पूर्णकालिक उपाधीक्षक के अभाव में अस्पताल प्रबंधन अव्यवस्थित है। इसका खामियाजा मरीजों और पर्यटकों दोनों को उठाना पड़ रहा है। श्याम सुंदर सिंह, मिथिलेश कुमार समेत अन्य शहरवासियों को कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए। राजगीर के अनुमंडलीय अस्पताल में नियमित उपाधीक्षक की शीघ्र नियुक्ति होनी चाहिए। इससे न केवल अस्पताल की प्रशासनिक व्यवस्था बेहतर होगी, बल्कि मरीजों को समय पर गुणवत्तापूर्ण इलाज भी संभव हो सकेगा। किसी तरह की लापरवाही होने पर वे सख्त कदम उठाने में भी सक्षम होंगे। इससे अस्पताल की व्यवस्था में सुधार होगा। अनुमंडलीय अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की काफी कमी : राजगीर अनुमंडलीय अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की काफी कमी है। खासकर इमरजेंसी मामलों और गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों को काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। हृदय, श्वसन, न्यूरोलॉजी, हड्डी रोग, प्रसूति एवं स्त्री रोग जैसे विभागों में विशेषज्ञ नहीं हैं। ऐसे में इन रोगियों को अक्सर प्राथमिक इलाज के बाद पटना या पावापुरी वीमिम्स रेफर कर दिया जाता है। इससे न केवल मरीजों की जान जोखिम में पड़ती है, बल्कि गरीब और दूरदराज से आने वाले लोगों के लिए यह आर्थिक और मानसिक बोझ भी बन जाता है। कई बार रास्ते में रोगियों की मौत तक हो जाती है। प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. गौरव कुमार ने बताया कि यहां उपलब्ध संसाधनों से रोगियों का बेहतर इलाज किया जा रहा है। हम रोगियों की सेवा के लिए हर स्तर पर तैयार हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की मांग की गयी है।

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