
बिजली संकट की मार से कराह रहा पावापुरी मेडिकल कॉलेज अस्पताल
पावापुरी मेडिकल कॉलेज अस्पताल वर्तमान में भीषण बिजली संकट का सामना कर रहा है। अनियमित बिजली आपूर्ति के कारण मरीजों की जान खतरे में है। प्रशासन ने बिजली विभाग को कई बार पत्र लिखा है, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। जेनरेटर पर निर्भरता बढ़ने से अस्पताल पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।
बिजली संकट की मार से कराह रहा पावापुरी मेडिकल कॉलेज अस्पताल जान पर बन आई मरीजों की, बिजली विभाग बना मूकदर्शक फोरलेन निर्माण के दौरान कटी बिजली की मेन लाइन, अबतक नहीं जुड़ी जेनरेटर सहारे चल रहा अस्पताल, हर माह लाखों का हो रहा डीजल खर्च फोटो : पावापुरी अस्पताल : बिजली कटने के बाद जेनरेटर की रोशनी में चल रहा आईसीयू वार्ड पावापुरी, निज संवाददाता। इन दिनों पावापुरी मेडिकल कॉलेज अस्पताल भीषण बिजली संकट की मार झेल रहा है। अस्पताल प्रशासन से लेकर मरीज और उनके परिजन तक अनियमित बिजली आपूर्ति से काफी परेशान हैं। कभी अचानक बिजली चली जाती है, तो कभी वोल्टेज इतना कम होता है कि महंगे मेडिकल उपकरण ठप पड़ जाते हैं।

हालत यह है कि कभी-कभी गंभीर मरीजों की जान पर बन आती है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन खुद को लाचार महसूस कर रहा है। आईसीयू में खतरे की घंटी: मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. सर्विल कुमारी ने बताया कि आईसीयू, ओटी और क्रिटिकल यूनिटों में भर्ती मरीज वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सपोर्ट और मॉनिटरिंग सिस्टम पर निर्भर रहते हैं। बिजली का अचानक कट जाना उनके लिए जीवन-मरण का सवाल बन जाता है। उन्होंने कहा कि कई बार ऑपरेशन के दौरान बिजली जाने से जेनरेटर पर निर्भर रहना पड़ता है। यह न केवल जोखिम भरा है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। एक साल से ज्यादा बीत गया पर समाधान नहीं: कॉलेज प्रशासन ने इस समस्या के समाधान के लिए बिजली विभाग के एमडी सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को बार-बार पत्र लिखा है। लेकिन, एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। अस्पताल प्रशासन ने विभाग की उदासीनता पर नाराजगी जतायी है। जेनरेटर से बढ़ रहा आर्थिक बोझ: लगातार बिजली कटौती के कारण अस्पताल को जेनरेटर पर निर्भर रहना पड़ता है। डीजल की बढ़ रही खपत और रखरखाव खर्च से संस्थान पर भारी आर्थिक बोझ बढ़ गया है। प्राचार्य के अनुसार, हर दिन औसतन कई घंटे जेनरेटर चलाना पड़ता है, जिससे अस्पताल का बजट चरमरा गया है। फोरलेन निर्माण में कटी थी, सीधी बिजली लाइन: प्राचार्य ने बताया कि जब एनएच-20 का फोरलेन निर्माण चल रहा था, उसी दौरान पावापुरी मेडिकल कॉलेज को बिहारशरीफ से मिलने वाली सीधी बिजली लाइन काट दी गई थी। उसके बाद से कॉलेज को नालंदा ग्रिड से बिजली मिल रही है, जो न तो स्थिर है और न पर्याप्त। कई बार चार से छह घंटे तक बिजली नहीं रहती, जिससे इमरजेंसी सेवाएं प्रभावित हो जाती हैं। वोल्टेज की मार से उपकरण खराब: अस्पताल अधीक्षक डॉ जकी अनवर जमां ने बताया कि अस्पताल में वोल्टेज का उतार-चढ़ाव आम हो गया है। इससे महंगे मेडिकल उपकरण जैसे एमआरआई, सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड, ईसीजी और लैब मशीनें बार-बार बंद हो जाती हैं। लगातार होने वाले इस नुकसान से अस्पताल को आर्थिक झटका लग रहा है और मरीजों को जांच के लिए निजी लैब का रुख करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी बिजली संकट: एक ओर अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं बहाल करने की बात कही जाती है। वहीं, दूसरी ओर पावापुरी जैसे प्रमुख मेडिकल संस्थान को स्थिर बिजली आपूर्ति तक विभाग नहीं मिल पा रही है। बिजली संकट न केवल अस्पताल की कार्यक्षमता को प्रभावित कर रहा है, बल्कि मरीजों की जान से खिलवाड़ जैसा बन गया है।

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