पीएम की अपील के बाद सोना कारोबार में 10 फीसदी का इजाफा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद सोने के कारोबार में 10 फीसदी की वृद्धि हुई है। हालांकि, छोटे कारोबारियों को मंदी का सामना करना पड़ सकता है। जिले में हर माह 125 करोड़ रुपये का सोना-चांदी कारोबार होता है। बड़े शोरूम में भीड़ बढ़ी है, लेकिन छोटे ज्वेलर्स को संकट का सामना करना पड़ सकता है।

पीएम की अपील के बाद सोना कारोबार में 10 फीसदी का इजाफा सोना और चांदी के भाव में भी दिख रही तेजी जिले में हर माह होता है 125 करोड़ का कारोबार बड़े शोरूम में कोई असर नहीं, छोटे कारोबारी झेल रहे मंदी फोटो: सोना मंडी: बिहारशरीफ रांची रोड स्थित शोरूम में स्वर्ण आभूषण देखते ग्राहक। बिहारशरीफ, निज संवाददाता।
सोने की खरीदारी पर असर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सोने की खरीदारी सीमित रखने की अपील के बाद जिले के सर्राफा बाजार में बेचैनी बढ़ गयी है। कारोबारियों का कहना है कि फिलहाल बाजार में 10 फीसद का इजाफा है। लेकिन, आने वाले समय में अनिश्चितता का माहौल दिख सकता है। क्योंकि, इसका पूरा असर 10 से 12 दिनों बाद ही बाजार में दिखेगा। हालांकि, बड़े ब्रांडेड शोरूमों में अचानक से खरीदारों की भीड़ बढ़ी है। वहां लोग खरीदारी को लेकर बुकिंग करवा रहे हैं। ऐसे ब्रांडेड शोरूमों में इससे चहल पहल बनी हुई है। लेकिन, छोटे ज्वेलर्स और कारीगरों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। जिले में हर माह करीब 125 करोड़ रुपये का सोना-चांदी कारोबार होता है। कारोबारियों के अनुसार सोने और चांदी की कीमतों में लगातार तेजी के बीच खरीदारी पहले ही प्रभावित थी, अब सरकारी अपील के बाद ग्राहकों में और सतर्कता बढ़ गयी है। ऐसे में लोग छोटे दुकानों से निकलकर ब्रांडेड शोरूम के प्रति अधिक भरोसा दिखा रहे हैं।
छोटे व्यापारियों की स्थिति
बड़े कारोबारी तनिष्क स्टोर संचालक उमाकांत गुप्ता, मुन्नालाल महेशलाल के संचालक अतुल रस्तोगी, स्वर्ण आभूषण कारोबारी अनिल शर्मा ने बताया कि इस अपील के बाद सोना की मांग अचानक से बाजार में बढ़ गयी है। शादी विवाह का सीजन लगभग खत्म हो चुका है। कल्याण ज्वेलर्स के शशिकांत गुप्ता, स्वर्णिका ज्वेलर्स के रजत रस्तोगी ने बताया कि एक माह तक मलमास है। बावजूद लोग अगले सीजन के लिए बुकिंग करवा रहे हैं। ताकि, उन्हें आज की दर पर सोना उपलब्ध हो सके। शादी सीजन के लिए भारी स्टॉक तैयार किया गया है, लेकिन किसी कारण से यदि ग्राहक खरीदारी टालते हैं, तो कारोबारियों के सामने पूंजी फंसने का संकट खड़ा हो जाएगा। छोटे प्रतिष्ठान खर्च कटौती की कर रहे तैयारी: छोटे स्वर्ण कारोबारी शंकर शर्मा ने बताया कि दुकानों की साज सज्जा के साथ ही उसे चलाने के लिए सुरक्षा, बिजली, इंटीरियर्स पर हर माह औसतन आठ से 10 हजार रुपए खर्च करना पड़ता है। उनका कहना है कि ज्वेलरी शोरूम केवल गहनों की बिक्री से नहीं चलता। बड़े शोरूम में तो हर माह लाखों रुपये किराया, एयर कंडीशनिंग, सुरक्षा व्यवस्था, बिजली, इंटीरियर्स, कर्मचारियों का वेतन और कारीगरों की मजदूरी पर खर्च होते हैं। यदि बिक्री घटती है, तो सबसे पहले छोटे प्रतिष्ठानों पर इसका असर पड़ेगा। क्योंकि, लोग इस अपील के बाद ब्रांडेड स्वर्ण आभूषणों को अधिक सुरक्षित व भरोसेमंद मानते हैं। ऐसे में कई छोटे प्रतिष्ठान बिजली, सुरक्षा समेत अन्य खर्च कटौती काटने की तैयारी कर रहे हैं।
रोजगार और भविष्य की चिंता
स्वर्ण कारोबारी चंदन शर्मा, राहुल शर्मा व अन्य ने बताया कि छोटे दुकानदारों की स्थिति पहले से कमजोर है। बड़े ब्रांड ऑनलाइन प्रचार और पुराना सोना बदलकर नया लेने जैसी योजनाओं से ग्राहकों को जोड़ सकते हैं। इससे उनका संतुलन बना रहेगा। लेकिन, पारंपरिक बाजारों के छोटे कारोबारी इतने संसाधन नहीं जुटा पाएंगे। ऐसे में फुटफॉल घटने का सीधा असर उनकी आमदनी पर पड़ेगा। कई अन्य खर्चे के अलावा घर का बजट भी काटना पड़ सकता है। रोजगार को लेकर अनिश्चितता का माहौल: रोजगार को लेकर भी चिंता बढ़ गयी है। जिले में सैकड़ों कारीगर ज्वेलरी निर्माण, पॉलिशिंग, डिजाइनिंग और कास्टिंग कार्य से जुड़े हैं। कारोबार धीमा पड़ने के असर से इन कारीगरों की मजदूरी प्रभावित होगी। कई छोटे कारीगर पहले ही काम की कमी से दूसरे रोजगार तलाश रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि कुशल कारीगरों की पहले से कमी है, यदि यह वर्ग पेशा छोड़ने लगा, तो भविष्य में उद्योग को और बड़ा झटका लग सकता है। ब्रांडेड शोरूम ने पहले से ही इस तरह के ज्वेलरी निर्माताओं को कसमकस में डाल रखा है। कई स्वर्णकार तो अब शोरूम से संपर्क कर ब्रांडेड ज्वेलरी ग्राहकों को उपलब्ध कराने में लग गए हैं।
इतिहास के संदर्भ में
1973-74 के तेल संकट के दौरान भी सोने की कीमतों में आया था भारी उछाल: 88 वर्षीया बुजुर्ग मीरा गुप्ता ने बताया कि आज 1968 और 1973-74 का दौर भी याद आने लगा है। उस समय केंद्र सरकार ने गोल्ड कंट्रोल एक्ट लागू कर सोने पर कई प्रतिबंध लगाए थे। सोने की ईंट और सिक्के रखने पर रोक लगी थी और 14 कैरेट से अधिक शुद्धता वाले गहनों के निर्माण पर पाबंदी लगा दी गयी थी। उस दौर में छोटे सुनार बुरी तरह प्रभावित हुए थे। कच्चे माल की कमी, तस्करी और नकली सोने के कारोबार में बढ़ोतरी से ज्वेलरी उद्योग सिकुड़ गया था। उसे काफी झटका लगा था। 1973-74 के तेल संकट के दौरान भी सोने की कीमतों में भारी उछाल आया था। कानूनी सप्लाई घटने से छोटे ज्वेलर्स के लिए कारोबार चलाना मुश्किल हो गया था। बुजुर्ग कारोबारी घनश्याम प्रसाद बताते हैं कि उस समय कई परिवारों ने पीढ़ियों से चला आ रहा सुनारी का काम छोड़ दिया था। आज की स्थिति को लेकर सराफा बाजार में यही डर फिर दिखाई देने लगा है। हालांकि, कारोबारियों का मानना है कि यदि स्थिति लंबी चली, तो एक्सचेंज स्कीम, हल्के वजन के आभूषण और डिजिटल ऑर्डर जैसे विकल्प अपनाने पड़ सकते हैं। फिलहाल पूरा बाजार आने वाले दिनों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। कारोबारी हर स्थिति से निपटने की तैयारी में लगे हुए हैं। उनका मानना है यह स्थिति लंबे समय तक नहीं चलेगी। विश्व में चल रही युद्धों का असर दिख रहा है। जल्द ही युद्ध खत्म हो जाएंगे। तब स्थिति सामान्य हो जाएगी। (बिहारशरीफ से कुमार कौशलेंद्र)
पेट्रोल और डीजल की स्थिति
पेज चार पैकेज: पेट्रोल पंप पर नहीं दिखा कोई असर सभी चालकों को सामान्य दिनों की तरह मिल रहा पेट्रोल डीजल फोटो: पेट्रोल पंप: बिहारशरीफ रांची रोड स्थित पंप पर मंगलवार को बाइक में पेट्रोल लेते चालक। बिहारशरीफ, निज संवाददाता। जिला के सभी पेट्रोल पंप पर मंगलवार को किसी तरह की आपाधापी या भीड़भाड़ नहीं दिखी। सामान्य दिनों की तरह वाहन चालकों ने गाड़ियों में पेट्रोल व डीजल लिए। पंप संचालक सुनील कुमार ने कहा कि तेल की फिलहाल कोई दिक्कत नहीं है। सभी वाहनों को उनकी मांग के अनुसार तेल दिया जा रहा है। वहीं बाइक चालक संतोष कुमार ने बताया कि उन्होंने 500 रुपए का पेट्रोल लिया। पंप ऑपरेटर ने पेट्रोल देने में किसी तरह की आना कानी नहीं की। इसी तरह रांची रोड में अरौत, 17 नंबर, मामू भगिना मोड़, देवीसराय चौक, करगिल चौक, शंकर बसेरा समेत अन्य पंपों पर भी स्थिति सामान्य दिखी। हालांकि, 17नंबर पेट्रोल पंप के पास शाम में सीएनजी वाहनों की लंबी लाइन दिखी। हालांकि, सभी वाहनों को सीएनजी दी गयी। (बिहारशरीफ से कुमार कौशलेंद्र)


