
आईने की तरह चमकेगा पावापुरी का ताज जल मंदिर
पावापुरी का जल मंदिर अब नए रूप में श्रद्धालुओं के सामने आने को तैयार है। ओडिशा के कारीगर पिछले 4 महीनों से मंदिर की सफाई और संरक्षण का कार्य कर रहे हैं। इसका उद्देश्य केवल सौंदर्य बढ़ाना नहीं, बल्कि मंदिर की ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखना भी है।
आईने की तरह चमकेगा पावापुरी का ताज जल मंदिर 4 महीने से ओडिशा के कारीगर कर रहे विशेष सफाई और संरक्षण का काम फोटो : पावापुरी जलमंदिर : पावापुरी जल मंदिर की साफ सफाई करते ओडिशा के कारीगर। पावापुरी, निज संवाददाता। जैन धर्म के विश्वविख्यात तीर्थ पावापुरी स्थित जल मंदिर अब नए और दमकते रूप में श्रद्धालुओं के सामने आने को तैयार है। भगवान महावीर की निर्वाण स्थली माने जाने वाले अग्नि संस्कार भूमि इस ऐतिहासिक जल मंदिर को पावापुरी का ताज कहा जाता है। इसे सचमुच ताज की तरह चमकाने के लिए पिछले चार महीनों से ओडिशा के कुशल कारीगर निरंतर सफाई और संरक्षण काम में लगे हुए हैं।
यह अभियान केवल साधारण सफाई नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक और परंपरागत तकनीक पर आधारित संरक्षण कार्य है। मंदिर की संगमरमर की दीवारों, स्तंभों, छत और बाहरी सतहों पर वर्षों से जमी धूल, काई, जल के दाग और प्रदूषण की परत को विशेष रसायनों और हाथों से की जाने वाली पॉलिशिंग के माध्यम से हटाया जा रहा है। इससे मंदिर की मूल चमक और सफेदी धीरे-धीरे वापस लौट रही है। ओडिशा से आए कारीगर तपन मांझी व बासुदेव शाहा ने बताया कि जल मंदिर में मिरर पॉलिश किया जा रहा है। मंदिर की दीवारें आईना की तरह चमकेगी। हमलोग देशभर में प्राचीन मंदिरों और धरोहरों की सफाई और संरक्षण के लिए जाने जाते हैं। ये कारीगर अत्यंत सावधानी से काम कर रहे हैं, ताकि जल मंदिर की ऐतिहासिक बनावट और नक्काशी को कोई नुकसान न पहुंचे। कई स्थानों पर मशीनों का प्रयोग नहीं कर हाथों से ब्रश, कपड़े और विशेष घोल से सफाई की गयी है। कमल सरोवर के बीच चमकेगा जल मंदिर : कमल सरोवर के मध्य स्थित यह जल मंदिर पहले ही एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है। सफाई पूरा होने के बाद इसकी संगमरमर की सतहें सूर्य की रोशनी में आईने की तरह चमकेंगी और पानी में उसकी परछाईं और भी मनोहारी लगेंगी। इससे श्रद्धालुओं को दर्शन के दौरान आध्यात्मिक शांति के साथ सौंदर्य का भी अद्वितीय अनुभव मिलेगा। आस्था के साथ विरासत की सुरक्षा : जैन श्वेतांबर मंदिर के महासचिव शांतिलाल बोथरा ने बताया कि इसका उद्देश्य केवल सौंदर्य बढ़ाना नहीं बल्कि जल मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत को लंबे समय तक सुरक्षित रखना भी है। लगातार जल और मौसम के प्रभाव से पत्थरों पर जो क्षरण हो रहा था, उसे रोकने के लिए संरक्षण परत भी लगाई जा रही है।

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