Hindi NewsBihar NewsBiharsharif NewsPawapuri Water Temple A Historic and Spiritual Hub of Lord Mahavir s Nirvana
पावापुरी जल मंदिर ऐतिहासिक सौंदर्यता और धार्मिक महत्व का अनूठा संगम

पावापुरी जल मंदिर ऐतिहासिक सौंदर्यता और धार्मिक महत्व का अनूठा संगम

संक्षेप: पावापुरी जल मंदिर भगवान महावीर की निर्वाण स्थली है, जहां 527 ईसा पूर्व उन्होंने निर्वाण प्राप्त किया। यह जैन धर्म का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है और इसकी ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक महत्ता अद्वितीय है। हर वर्ष...

Sat, 18 Oct 2025 10:04 PMNewswrap हिन्दुस्तान, बिहारशरीफ
share Share
Follow Us on

पावापुरी जल मंदिर ऐतिहासिक सौंदर्यता और धार्मिक महत्व का अनूठा संगम भगवान महावीर की निर्वाण स्थली है पावापुरी 527 ईसा पूर्व भगवान महावीर ने निर्वाण किया था प्राप्त दुनिया को दिया था जीयो और जीने दो का संदेश फोटो : पावापुरी जलमंदिर : निर्वाण महोत्सव के लिए सज धज कर तैयार पावापुरी जलमंदिर। पावापुरी, निज संवाददाता। नालंदा जिले में स्थित पावापुरी जैन धर्म के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। यहां स्थित भगवान महावीर की निर्वाण स्थली है। यहीं 527 ईसा पूर्व उन्होंने निर्वाण प्राप्त किया था। भगवान महावीर का अग्नि संस्कार यहीं हुआ था। उसे जलमंदिर के नाम से जाना जाता है।

LiveHindustan को अपना पसंदीदा Google न्यूज़ सोर्स बनाएं – यहां क्लिक करें।

यह न केवल जैन समुदाय बल्कि हर श्रद्धालु के लिए विशेष महत्व रखता है। इस पवित्र स्थल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता अद्वितीय है। यह इसका अनूठा संगम है। यहां की भव्यता सदियों से श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है। पुजारियों की मानें तो जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी को पावापुरी में निर्वाण प्राप्त हुआ था। यहीं से दुनिया को उन्होंने जीयो और जीने दो का संदेश दिया। ऐसी मान्यता है कि भगवान महावीर ने यहां अंतिम सांस ली और उनकी समाधि स्थल यहां स्थित है। उनके निर्वाण के बाद इस पावन स्थल की स्थापना हुई। तब से यह स्थान जैन धर्म के अनुयायियों के लिए विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है। हर वर्ष उनके निर्वाण महोत्सव पर हजारों श्रद्धालु यहां आते हैं। जैन श्वेतांबर मंदिर के सचिव शांतिलाल बोथरा ने बताया कि भगवान महावीर ने अपनी शिक्षाओं में अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह का महत्व समझाया। उनके सिद्धांत आज भी लोगों को नैतिक और शांतिपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं। पावापुरी का यह निर्वाण स्थल उनके इन महान सिद्धांतों की प्रतीक है। जल मंदिर की ऐतिहासिक सौंदर्यता : पावापुरी जल मंदिर इस स्थल का प्रमुख आकर्षण है और इसकी वास्तुकला अद्भुत है। मंदिर एक सुंदर तालाब के मध्य स्थित है, जिसके चारों ओर हरे-भरे कमल के फूल और शांत जल का दृश्य देखने लायक है। इस तालाब को पद्म सरोवर के नाम से जाना जाता है, जहां कमल के फूल तालाब में खिले रहते हैं। इसके बारे में मान्यता है कि भगवान महावीर के निर्वाण के बाद यहां आए श्रद्धालुओं ने उनकी स्मृति में बड़ी मात्रा में मिट्टी ली थी, जिससे यह तालाब बन गया। तालाब के बीच स्थित जल मंदिर तक पहुंचने के लिए एक पतला सा मार्ग है, जो इसे मुख्य भूमि से जोड़ता है। मंदिर की दीवारों और गुंबदों पर की गई नक्काशी इस स्थान की ऐतिहासिक महत्व और सुंदरता का बखूबी बखान करती है। मंदिर के भीतर भगवान महावीर की चरण पादुका के साथ उनके दो गंधर गौतम स्वामी एवं सुधर्मा स्वामी की चरण पादुका भी स्थापित है। इसके गर्भगृह में विशेष आभा का अनुभव होता है, जिससे श्रद्धालु आत्मिक शांति का अनुभव करते हैं। निर्वाण महोत्सव के दिन हिलता डूलता है जल मंदिर का क्षत्र : पुजारी उमाकांत उपाध्याय ने बताया कि निर्वाण महोत्सव के दिन गर्भ गृह में स्थापित क्षत्र कुछ क्षण के लिए कंपन होता है, जिसे देखने के लिए जैन श्रद्धालु इंतजार करते हैं। जैन धर्म में भगवान महावीर का निर्वाण अत्यंत महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है और जल मंदिर इस घटना की प्रतीक है। जैन अनुयायियों के लिए यहां आकर भगवान महावीर के सिद्धांतों का स्मरण करना आत्मिक शुद्धि का मार्ग माना जाता है। महोत्सव में जल मंदिर की सजावट और इसका शांत वातावरण का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। भगवान महावीर की प्रतिमा के समक्ष दीपक जलाकर और पूजा-अर्चना करके श्रद्धालु अपनी आस्था प्रकट करते हैं। यहां की प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक महत्व और धार्मिक वातावरण एक साथ मिलकर इसे एक अद्वितीय तीर्थस्थल बनाते हैं।