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पावापुरी के जलमंदिर में विदेशी मेहमानों का डेरा

पावापुरी के जलमंदिर में विदेशी मेहमानों का डेरा

संक्षेप:

पावापुरी के जलमंदिर में विदेशी पक्षियों का डेरा सज गया है। साइबेरिया और चीन जैसे देशों से आए ये पक्षी फरवरी-मार्च तक यहाँ रहेंगे। स्थानीय जैन श्वेतांबर भंडार तीर्थ द्वारा इनके लिए भोजन और पानी की व्यवस्था की जा रही है। यह सरोवर इन दिनों विदेशी पक्षियों की चहचहाहट से गूंज रहा है।

Nov 19, 2025 04:45 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बिहारशरीफ
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पावापुरी के जलमंदिर में विदेशी मेहमानों का डेरा साइबेरिया और चीन से हजारों किलोमीटर उड़कर पहुंचे पक्षी कमल सरोवर में लालसर, साइबेरियन क्रेन और खंजन जैसे पक्षियों की बढ़ी आमद फरवरी-मार्च तक यहीं रहेगा बसेरा, जैन श्वेतांबर भंडार तीर्थ कर रहा दाने-पानी का इंतजाम फोटो: पावापुरी पक्षी: जल मंदिर के तालाब में तैरते प्रवासी पक्षी। पावापुरी, निज संवाददाता। सर्दियों की आहट के साथ ही पावापुरी स्थित जलमंदिर का कमल सरोवर एक बार फिर विदेशी पक्षियों का अस्थायी ठिकाना बन गया है। तापमान में गिरावट आते ही हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर प्रवासी पक्षियों के झुंड यहाँ पहुंचने लगे हैं। 84 बीघे में फैला यह सरोवर इन दिनों विदेशी मेहमानों की आवाजों से गूंज रहा है।

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अक्टूबर से शुरू हुआ इन पक्षियों का आगमन फरवरी-मार्च तक जारी रहेगा। पक्षी जानकारों के मुताबिक, पावापुरी का शांत वातावरण और यहाँ उपलब्ध पर्याप्त भोजन इन पक्षियों को खूब रास आता है। यहाँ पहुँचने वाले पक्षियों में मुख्य रूप से साइबेरियन क्रेन, लालसर, अधंगा, चाहा, खंजन, फुदकी और चील-बाज जैसी प्रजातियां शामिल हैं। ये पक्षी तालाब की लहरों पर तैरते और आकाश में वी-शेप बनाकर उड़ते देखे जा सकते हैं। बर्फबारी से बचने के लिए तय करते हैं लंबी दूरी : इन पक्षियों का मूल निवास साइबेरिया, नेपाल, चीन और कजाकिस्तान जैसे ठंडे देश हैं। सर्दियों में जब वहां का तापमान शून्य से काफी नीचे चला जाता है और जमीन बर्फ से ढक जाती है, तो भोजन और पानी का संकट पैदा हो जाता है। ऐसे में, जीवन बचाने के लिए ये पक्षी भारत के अपेक्षाकृत गर्म इलाकों का रुख करते हैं। साइबेरियन क्रेन लगभग 10 हजार किलोमीटर तक की यात्रा कर यहाँ पहुँचते हैं। जबकि, कई छोटी प्रजातियां भी दो से पाँच हजार किलोमीटर की उड़ान भरती हैं। दिशा ज्ञान और उड़ान की तकनीक अद्भुत: इन प्रवासी पक्षियों का दिशा ज्ञान अचूक होता है। ये हर साल उसी रास्ते से होकर ठीक उसी जगह पहुँचते हैं, जहाँ वे पिछले वर्षों में ठहरे थे। लंबी यात्रा के दौरान हवा के दबाव को कम करने और ऊर्जा बचाने के लिए ये पक्षी अक्सर झुंड में वी-शेप बनाकर उड़ते हैं। यात्रा के दौरान इनके शरीर में जमा वसा ही इन्हें ऊर्जा देता है। स्थानीय स्तर पर सुरक्षा और भोजन की व्यवस्था: प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा और खान-पान का ख्याल स्थानीय स्तर पर भी रखा जा रहा है। जैन श्वेतांबर भंडार तीर्थ, पावापुरी के प्रबंधन द्वारा नियमित रूप से पक्षियों के लिए दाना की व्यवस्था की जाती है। सुरक्षित माहौल और भोजन की उपलब्धता के कारण ही हर साल यहाँ आने वाले पक्षियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। पावापुरी के अलावा आसपास के अन्य जलाशयों, काकोलत और बेगूसराय बर्ड सेंचुरी में भी इन दिनों प्रवासी पक्षियों की रौनक देखी जा सकती है।