नये आरक्षण रोस्टर से होगा त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव
बिहार में 2026 के पंचायत चुनावों की तैयारी शुरू हो गई है। नए आरक्षण रोस्टर के अनुसार अनुसूचित जाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग और महिला सीटों में बदलाव होगा। इससे कई प्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र बदलने की आवश्यकता हो सकती है। पंचायत विभाग ने बीडीओ को नए रोस्टर का निर्धारण करने का आदेश दिया है।

कई प्रतिनिधियों को बदलना पड़ सकता है क्षेत्र, 10 साल बाद नया रोस्टर फोटो: जिला परिषद: जिला परिषद प्रशासनिक भवन। बिहारशरीफ, निज प्रतिनिधि। 2026 के अंत में होने वाले पंचायत चुनाव को लेकर अभी से सरगर्मी बढ़ गयी है। अभी चुनाव के पांच से छह माह शेष है। पंचायत चुनाव की सरगर्मी की खास बजह अनुसूचित जाति, अत्यंत पिछड़ा व महिला सीटों का आरक्षण है। इसमें इस बार बदलाव होना है। नये आरक्षण के लागू होने पर जिला परिषद अध्यक्ष, प्रमुख, मुखिया, पंचायत समिति व सरपंच पद की सीटों में भी बदलाव हो सकता है। इससे कई जनप्रतिनिधियों को अपना क्षेत्र बदलना पड़ सकता है।
10 साल बाद नया रोस्टर बन रहा है। आरक्षण रोस्टर निर्धारण को लेकर पंचायत विभाग द्वारा आदेश जारी किया गया है। आदेश के अनुसार संबंधित प्रखंडों के बीडीओ को नियमों के अनुसार नये सिरे आरक्षण रोस्टर का निर्धारण करने का कहा गया है। नये नियम के लागू होने से आरक्षित सीट, गैर आरक्षित तो गैर आरक्षित सीट, आरक्षित हो सकती है। डीपीआरओ साकेत कुमार ने बताया कि विभागीय आदेश के अनुसार कार्य करने का आदेश बीडीओ व बीपीआरओ को दिया गया है। नालंदा में 231 पंचायत है। जिला परिषद क्षेत्रों की संख्या 34 है। 231 मुखिया, सरपंच का पद है। वार्डो की संख्या 3105 है। वार्डो में पंच व वार्ड सदस्यों का चुनाव होता है। इसी प्रकार पंचायत समिति के लिए 322 पद है। आबादी के अनुसार आरक्षण रोस्टर: नये सिरे से आरक्षण रोस्टर के निर्धारण का अर्थ यह होता है कि जो पूर्व से आरक्षित सीट है उसमें बदलाव करना। हालांकि, इस प्रक्रिया में भी आबादी का ख्याल रखना होता है। सबसे पहलेअनुसूचित जाति, अत्यंत पिछड़ी जाति उसके बाद महिला आबादी। इसका डाटा वार्ड व पंचायत स्तर पर तैयार किया जाता है। अगर किसी प्रखंड में एससी वर्ग के लिए चार सीटों का निर्धारण करना है तो एससी आबादी वाले सर्वाधिक पंचायतों के घटते क्रम के अनुसार निर्धारित की जाती है। इसी प्रक्रिया का पालन अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए सीटों का निर्धारण किया जाना है। यानी जिस वर्ग की आबादी जितनी अधिक होगी, उसे उतना ही प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि समाजिक बसावट का ख्याल रखना है। पहले एससी, इसके बाद अत्यंत पिछड़ी और अंत में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित की जाती हैं। 73वें संविधान संशोधन के बाद पंचायत स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में बड़ा बदलाव आया है। इसी के तहत नया पंचायतीराज अधिनियम लागू किया गया है। 1995 में हुए पंचायत चुनावों में पहली बार आरक्षण रोस्टर लागू किया गया था। (बिहारशरीफ से रमेश कुमार)
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