
नालंदा विश्वविद्यालय ने दो समझौतों पर किया हस्ताक्षर
संक्षेप: नालंदा विश्वविद्यालय ने भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा देने और वैश्विक संबंधों को मजबूत करने के लिए दो समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें ज्योत और गीतार्थ गंगा के साथ अमूल्य साहित्य के संरक्षण और रूस...
नालंदा विश्वविद्यालय ने दो समझौतों पर किया हस्ताक्षर अमूल्य साहित्य के संरक्षण के लिए ज्योत और गीतार्थ गंगा का मिलेगा साथ रूस की काल्मिक यूनिवर्सिटी के साथ बौद्ध अध्ययन के लिए करेगा सहयोग फोटो : नालंदा यूनिवर्सिटी-मुंबई में ज्योत व गीतार्थ गंगा के साथ समझौते के बाद आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत, नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी व अन्य। राजगीर, निज प्रतिनिधि। नालंदा विश्वविद्यालय ने भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा देने और वैश्विक संबंधों को मजबूत बनाने के लिए पिछले सप्ताह दो समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं। रविवार को मुंबई में ज्योत और गीतार्थ गंगा आध्यात्मिक अनुसंधान संस्थानों के साथ अमूल्य साहित्य के संरक्षण के लिए साथ देने का वादा किया गया।
वहीं, शुक्रवार को रूस की काल्मिक स्टेट यूनवर्सिटी के साथ बौद्ध अध्ययन में सहयोग करने का समझौता किया गया। मुंबई में इन संस्थानों के साथ समझौते का उद्देश्य प्राचीन जैन पांडुलिपियों और दूसरी अमूल्य भारतीय साहित्य के संकलन, संरक्षण और प्रोत्साहन देना है। पंडित महाराज साहेब युगभूषणसूरी व आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत की मौजूदगी में समझौते पर हस्ताक्षर किये गये। विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी, गीतार्थ गंगा की ओर से निशित जावेरी और ज्योत की ओर से डॉ. भास्कर शाह ने हस्ताक्षर किया। विश्वविद्यालय कुछ समय बाद आयोजित होने वाले ‘वसुधैव कुटुंबकम् कॉन्क्लेव में एक ‘नॉलेज पार्टनर के रूप में भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेगा। शुक्रवार को विश्वविद्यालय ने रूस की काल्मिक स्टेट यूनिवर्सिटी के साथ भी एक महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य बौद्ध अध्ययन, ओरिएण्टल भाषाओं और सांस्कृतिक अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग को और बढ़ाना है। हाइब्रिड मोड में हुए इस कार्यक्रम में नालंदा विश्विद्यालय का प्रतिनिधित्व कुलपति ने किया। काल्मिक स्टेट यूनिवर्सिटी के रेक्टर प्रो. बद्मा कातिनोविच सालाएव, भारतीय दूतावास से निखिलेश चंद्र गिरी और विनय कुमार सहित दोनों संस्थानों के विशेषज्ञों की उपस्थिति रही।

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