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नालंदा: हत्या में दो को उम्रकैद, 21 वर्ष बाद आया फैसला

नालंदा में बंटाईदारी वाले खेत में परोर (नेनुआ) तोड़ने के विवाद में गीता देवी की हत्या मामले में दो लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। साथ ही 25 हजार रुपए जुर्माना भी किया गया। जुर्माने की राशि नहीं देने पर 3 वर्ष का अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। इसके अलावा शस्त्र अधिनियम में 3 साल व₹5 हजार का जुर्माना हुआ। जुर्माना नहीं अदा करने पर 3 माह का अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

स्थानीय व्यवहार न्यायालय के त्वरित विचारण न्यायाधीश रामप्रताप अस्थाना ने सोमवार को यह फैसला सुनाया। दोनों आरोपी सिलाव थाना के दाहा घाट गांव के निवासी हैं। मामले में अभियोजन की ओर से पैरवी कर रहे सहायक लोक अभियोजक सुनील कुमार सिन्हा ने बताया कि 19 नवंबर 1998 को सवा 11 बजे दिन में गांव के ही सूचक मिथिलेश प्रसाद पत्नी के साथ खलिहान में काम कर रहा था। इसी दौरान दोनों आरोपित अभियुक्तों के साथ आए और सूचक से स्ब्जी तोड़ने को लेकर आपत्ति जताई। इसपर सूचक ने कहा कि मैं बंटाई पर खेती कर रहा हूं। इसी बात को ले दोनों में बहस होने लगी। गुस्साए अभियुक्त घर गए और हरवे हथियार से लैस होकर वहां आए। आते ही खलिहान में काम कर रही गीता देवी को दो गोलियां मारीं। इसमें घटनास्थल पर ही गीता की मौत हो गयी। उसके पति मिथिलेश प्रसाद पर भी जानलेवा हमला किया। परंतु वह बाल-बाल बच गया। इस मामले में अभियोजन की ओर से सभी 10 लोगों ने गवाही दी थी।

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