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नालंदा: पहली सोमवारी आज, शिवालयों में उमड़ेगा भक्तों का सैलाब

सावन मास की पहली सोमवारी 30 जुलाई को है। इस दिन शिवालयों में भक्तों का सैलाब उमड़ेगा। धरती से आसमान तक हर हर महादेव के जयकारे गूंजेंगे। घंटे की टंकार से चारों दिशाएं शिवमय हो जायेगा। भोले शंकर की कृपा की बारिश में गरीब हो या अमीर सब सराबोर हो जाएंगे। पहली सोमवार को लेकर शहर और गांव के शिव मंदिरों को सजाया-संवारा जा रहा है।

ज्योतिष के जानकार पं. मोहन कुमार दत्त मिश्र बताते हैं कि ऐसे तो सावन में हर दिन पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों पर भगवान शिव की कृपा बनी रहती है। लेकिन सोमवारी का विशेष महत्व है। श्रद्धालुओं को सावन की सभी सोमवारी करनी चाहिए। इस दिन मंदिर में जाकर शिवलिंग का दूध व गंगा जल से अभिषेक करने व श्रद्धा के साथ ऊं नम: शिवाय का जाप करने से भगवान भोले प्रसन्नत होते हैं।

पहली सोमवारी को महामायाधारी की पूजा: -

पं. मिश्र बताते हैं कि सावन मास में प्रत्येक सोमवारी का विशेष महत्व है। सभी सोमवारी की पूजा के लिए मंत्र अलग-अलग हैं। सावन की पहली सोमवार को महामायाधारी भगवान शिव की आराधना की जाती है। पूजा ्त्रिरया के बाद शिव भक्तों को ‘ऊं लक्ष्मी प्रदाय ह्री ऋण मोचने श्री देहि-देहि शिवाय नम: का मंत्र 11 माला जाप करना चाहिए। इस मंत्र के जाप से लक्ष्मी की प्राप्ति, व्यापार में वृद्धि और ऋण से मुक्ति मिलती है।

कैंसे करें औघड़दानी की पूजा

दही, धृत, शहद, शर्करा, गाय का दूध, गुलाब जल से शिवलिंग को स्नान स्नान करायें। इसके बाद इत्र, केसर, कपूर, रक्त चंदन, श्वेत चंदन, बेलपत्र, धतूरे के बीच, श्वेत मदार के पुष्प चढ़ायें। ध्यान रखें पूजा करते कुश के आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। अगर दीप जलायें तो दीप का मुंख भी उत्तर या पूरब की ही ओर रखें।

इन फूलों से करें शिव की पूजा

अकवन, कनैल, गुमा , चिड़चिड़ी , कुश , गुलाब , भटकइयां , धतुरा, शंखपुष्पी , मंदार, नागकेसर के फूल

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  • Web Title:nalanda: First Monday, flood of devotees emerge in shiv temples