
नालंदा में अब ‘चीनिया’ और ‘मालभोग’ केला की भी होगी खेती
नालंदा के किसान अब चीनिया और मालभोग केला की खेती कर सकेंगे। सरकार प्रति हेक्टेयर 70 हजार रुपये का अनुदान देगी। इस बार 50 हेक्टेयर में तीन वेरायटी की खेती का लक्ष्य रखा गया है। किसान ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। केला की खेती से अच्छी कमाई होने की संभावना है।
हिन्दुस्तान एक्सक्लूसिव : नालंदा में अब ‘चीनिया’ और ‘मालभोग’ केला की भी होगी खेती अनुदान पर मिलेंगे पौधे, खेती करने के लिए आर्थिक मदद भी 50 हेक्टेयर में तीन वेरायटी के केला की खेती कर सकेंगे किसान फोटो अंजीर : कुछ इसी तरह होगी केला की खेती (फाइल फोटो) बिहारशरीफ, कार्यालय प्रतिनिधि। नालंदा के किसान अबतक केला की जी-9 टीशू कल्चर वेरायटी की खेती कर रहे थे। पहला मौका है कि यहां के किसान चीनिया और मालभोग केला की भी खेती करेंगे। खास यह कि इस बार जिले में 50 हेक्टेयर में चीनिया, मालभोग और जी-9 वेरायटी की खेती करने का लक्ष्य तय किया गया है।

किसानों के लिए बड़ी राहत यह कि प्रति हेक्टेयर खेती करने के लिए 70 हजार रुपया अनुदान सरकार देगी। अच्छी बात यह भी कि उद्यान विभाग किसानों को अनुदान पर जिले की मिट्टी व मौसम के अनुकूल पौधे उपलब्ध करायेगा। साथ ही पौधों की देखभाल करने के लिए आर्थिक मदद भी देगा। एक हेक्टेयर में केला की खेती करने की लागत एक लाख 75 हजार आएगी। इसपर दो वर्षों में 70 हजार का अनुदान दिया जाएगा। मसलन, अगर कोई किसान एक हेक्टेयर में खेती करता है तो पहले साल उसे 42 हजार रुपए का पौधा उपलब्ध कराया जाएगा। जबकि, 80 फीसद पौधे सुरक्षित रहते हैं तो दूसरे साल 28 हजार रुपए की आर्थिक मदद भी दी जाएगी। एक किसान कम से कम आठ कट्ठा तो अधिकतम दो हेक्टेयर में खेती कर अनुदान ले सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। पहले आओ पहले पाओ के आधार पर लाभुकों का चयन किया जाएगा। एक बार लगाएं पौधे, 5 साल तक लें उपज: केला की खेती कम लागत में अधिक मुनाफा देनी वाली है। खास यह कि एक बार पौधे लगा देने पर पांच साल तक उपज ली जा सकती हैं। दरअसल, केला के पौधे के जड़ से ही हर साल नये-नये पौधे (सकर) निकलते हैं। पुराने पौधे को काट दिया जाता है तथा नये पौधे जब तैयार होते हैं तो उससे फल मिलते हैं। खास यह भी कि अच्छी तरह देखभाल करने पर पांच साल से अधिक भी उपज किसान ले सकते हैं। ् होगी अच्छी कमाई : केला की खेती में लागत कम आती तथा कमाई अच्छी होती है। केले की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली, उपजाऊ और नमी वाली मिट्टी का चयन करना चाहिए। औसतन एक हेक्टेयर में खेती करने पर आठ से दस लाख तक की कमाई की जा सकती है। जी-9 टिशू कल्चर किस्म को आमतौर पर बेहतर माना जाता है। क्योंकि, समय में फसल तैयार होता है और उत्पादन अधिक मिलता है। जबकि, चीनिया और मालभोग केला में मिठास और टिकाऊपन अधिक होता है। बाजार में इसकी कीमत अधिक मिलती है। कैंसे करें आवेदन : योजना का लाभ पाने वाले किसानों को उद्यान विभाग के पोर्टल horticulture.bihar.gov.in पर आवेदन करना होगा। आवेदन के साथ एलपीसी या जमीन का कैरेंट रसीद, पहचान पत्र, आधार कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो व बैंक खाते की जानकारी देनी होगी। क्या कहते हैं अधिकारी केला की खेती से अच्छी कमाई की जा सकती है। अच्छी बात यह कि इसबार किसानों को जी-9 के अलावा चीनिया व मालभोग वेरायटी की खेती करने का मौका दिया जा रहा है। आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इच्छुक किसान आवेदन कर सकते हैं। राकेश कुमार, जिला उद्यान पदाधिकारी, नालंदा

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