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9 अगस्त, 2020|7:12|IST

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नालंदा : अपनाएं बुद्ध का मार्ग, देश बनेगा शक्तिशाली : रिजिजू

नालंदा में अंतरराष्ट्रीय धर्म-धम्म सम्मेलन में 11 देशों के विद्वानों का जमावड़ा शनिवार को इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में लगा। विद्वानों ने सत्य, चित्त, आनंद व निर्वाण विषयों पर विस्तृत चर्चा की। केन्द्रीय युवा एवं खेल राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि लोगों को अपने मन में सुंदरता लानी होगी। सोच बेहतर रखनी होगी। यह सम्मेलन हिन्दू व बौद्ध धाराओं के बीच बुनियादी समानता लाएगा। हिन्दू एवं बौद्ध दोनों के सिद्धांत व तरीके अलग हैं। लेकिन, दोनों धर्मों के ग्रंथों में काफी समानता है। उन्होंने कहा कि बुद्ध के बताये रास्ते पर चलकर ही देश शक्तिशाली बन सकता है। वैसे देश जो बुद्ध के बताये रास्ते पर हैं वे ज्यादा शक्तिशाली हैं। राजगीर एक बेहतर जगह है। इस सम्मेलन में जो बातें निकलकर आयेंगी उनपर मंथन होगा। आज पूरा विश्व नई चुनौतियों से जूझ रहा है।

भूटान के गृह एवं संस्कृति मंत्री लायपो शेराब ग्याल्त्सेन ने कहा कि भारत व भूटान का संबंध काफी मधुर है। दोनों के प्रयास से बुद्धिस्ट मोनेस्ट्री आगे बढ़ रही है। राजगीर में भी भूटान की मोनेस्ट्री बनायी गयी है। यहां के कण-कण में भगवान बुद्ध का वास है। नालंदा विश्वविद्यालय में बौद्ध एवं भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित पाठ्यक्रम विकसित किये जाने पर जोर दिया।

कई देशों ने अपनाया शांति का मार्ग : श्रीलंकाई मंत्री गामिनी जयविकर्मा परेरा

श्रीलंका के मंत्री गामिनी जयविकर्मा परेरा ने कहा कि हिन्दू व बौद्ध विद्वानों को एक साथ कार्य करना चाहिए। इससे विकास में गति आएगी। अहिंसा के रास्ते पर चलकर महात्मा गांधी ने अंग्रेजों को यहां से भागने पर विवश किया था। अहिंसा का रास्ता सबसे बेहतर है। इसे विश्व के दूसरे देशों के लोगों ने भी अपनाया था। अमेरिका के मार्टिन लूथर, दक्षिण अफ्रिका के नेलसन मंडेला जैसे लोगों ने भी अहिंसा का रास्ता अपनाया। अहिंसा का रास्ता विश्व को शांति के रास्ते पर ले जा सकता है।

लैंड ऑफ विजडम है नालंदा :स्वामी अवधेशानंद गिरि

जूना अखाड़ा के महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि नालंदा व राजगीर ‘लैंड ऑफ विजडम (ज्ञान की भूमि) है। यह भगवान बुद्ध व महावीर की धरती है। सच्चिदानंद का अर्थ परमात्मा होता है। वे हमारे स्वभाव में हैं। यही परम सत्य है। जहां चेतना, समाधि, आनंद समाहित हो वहीं परमात्मा का वास होता है। सत्य एक ही है। प्रारंभ एक है। कहने का तरीका अलग-अलग हो सकता है। नालंदा की धरती पर ऐसा लगता है कि आज भी ढाई हजार साल पुराने समय के भगवान बुद्ध समाधि में लीन हैं। इस धरती की सत्यता से प्रभावित होकर चीनी यात्री ह्वेनसांग गए थे। इसपर धर्म एवं धम्म की चर्चा करना काफी सुकून भरा है। इससे ही दोबारा करुणा को जीत पायेंगे। उ‌नहोंने कहा कि हम सब मिलकर पूरे विश्व को ज्ञान का पाठ पढ़ायेंगे। पूरे विश्व को एक करना है। अपने पुराने स्वरूप में लौटने का नाम ही धर्म है। दूसरों के सम्मान व निजता की रक्षा करना धर्म है। अपने जैसा सबको मानें। मिलकर नया वातावरण बनायें।

स्वामी गिरि ने कहा कि पर्यावरण, ओजोन परत, जल संकट सबों का समाधान धर्म में है। एक साथ बैठकर संवाद करेंगे तो बेहतर सोच बनेगी। समाधान होगा। यहां से जो भी बातें उभरकर आयेंगी वे इसे अपनी आचार्य सभा में प्रस्ताव लाकर समाहित करेंगे। बौद्ध एवं सनातन संसार के लिए गुरु कहे जाते हैं। इसी कारण पूरा विश्व आज वर्ल्ड योग डे पर एक साथ योग कर रहा है। इसे पूरे विश्व में मान्यता मिल गयी है।

सत्य, चित्त, आनंद व निर्वाण विषयों पर होगी चर्चा : कुलपति

नालंदा विवि की कुलपति डॉ. सुनैना सिंह ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य नालंदा विश्विवद्यालय को एक अग्रणी विचारक एवं ज्ञान मूलभूत केन्द्र के रूप में न केवल दक्षिण पूर्व एशियाई क्षेत्र, बल्कि वैश्विक परिदृश्य में स्थापित करना है। सम्मेलन में सत्य-चित्त-आनंद व निर्वाण विषय पर चर्चा होनी है। यह भावना नालंदा में प्राचीन काल से ही है। यह सम्मेलन भारत और विदेश के प्रमुख राजनेताओं, नीति निर्माताओं, धार्मिक प्रमुखों के साथ दुनिया में नूतन ज्ञान-विज्ञान को पता लगाने के लिए एक साथ आने वाले श्रेष्ठ चिंतकों को एकीकृत मंच प्रदान करता है। इस सम्मेलन में मालदीव, श्रीलंका, भूटान, कोरिया, चीन के साथ अन्य देशों के सैकड़ों विद्वान शामिल हुए।

मौके पर भारतीय दर्शन अनुसंधान परिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एसआर भट्ट, इंडिया फाउंडेशनके अधिकारी राम माधव, गणेशन, हरि प्रसाद स्वामी, प्रो. थीक नत्थू, प्रो. मकरंद परांजपे, प्रो. रमेशचन्द्र सिन्हा, विठ्ठल नादकर्णी सहित अन्य मौजूद थे।

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  • Web Title:nalanda Adopt the path of Buddha country will become powerful Rijiju