रिवाइज : नालंदा खंडहर हमारी गौरवशाली इतिहास की बेमिसाल धरोहर

हिन्दुस्तान, बिहारशरीफ
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नालंदा खंडहर हमारी गौरवशाली इतिहास की बेमिसाल धरोहर है। राजयोगिनी ब्रह्मकुमारी आशा दीदी ने कहा कि विकसित भारत के लिए शिक्षा में मेडिटेशन और डिजिटल बैलेंस का समावेश जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों को तपस्वी की तरह रहने और आध्यात्मिकता को शिक्षा में शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

रिवाइज : नालंदा खंडहर हमारी गौरवशाली इतिहास की बेमिसाल धरोहर

नालंदा खंडहर हमारी गौरवशाली इतिहास की बेमिसाल धरोहर है। यह विश्व धरोहर खंडहर हमें कई संदेश दे रही है। विकसित भारत निर्माण के लिए शिक्षा में मेडिटेशन और डिजिटल बैलेंस का समावेश जरूरी है। राजयोगिनी ब्रह्मकुमारी आशा दीदी ने बुधवार को नालंदा खंडहर के परिभ्रमण के दौरान प्रतिनिधियों से कहा कि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेषों को देखना विद्यार्थी काल से ही मेरी अभिलाषा थी। आज अपनी संस्कृति की इस अनमोल विश्व धरोहर की धरा पर कदम रखकर मैं गौरवान्वित हूं। यह खंडहर हमारी गौरवशाली संस्कृति और उस समृद्ध शिक्षा व्यवस्था के प्रतीक हैं, जहां ज्ञान के साथ-साथ आध्यात्मिकता का पाठ भी पढ़ाया जाता था।

तनाव को खत्म करने के लिए रोज लगाएं ध्यान

दिल्ली-गुरुग्राम स्थित ओम शांति रिट्रीट सेंटर की निदेशिका सह वरिष्ठ राजयोगिनी ब्रह्मकुमारी आशा दीदी ने कहा यहां की आर्किटेक्चर और गुरुकुल पद्धति यह दर्शाती है कि भारत प्राचीन काल से ही विश्व गुरु रहा है। तनाव को खत्म करने के लिए रोज लगाएं ध्यान: विद्यार्थियों में बढ़ते डिप्रेशन और तनाव पर चिंता व्यक्त करते हुए आशा दीदी ने कहा आज की शिक्षा प्रणाली में मेडिटेशन (ध्यान) को शामिल करना अत्यंत आवश्यक है। प्राचीन काल में यहां के विद्यार्थी सुबह-शाम परमात्मा के ध्यान से जुड़ते थे, जिससे वे मानसिक रूप से सशक्त रहते थे। यदि वर्तमान युवा पीढ़ी को सशक्त बनाना है, तो शिक्षा में आध्यात्मिकता और डिजिटल बैलेंस को जोड़ना ही होगा। विद्यार्थियों को तपस्वी की तरह रहना चाहिए: प्राचीन नियमों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को तपस्वी की तरह रहना चाहिए। जो सुख की खोज में रहते हैं, उन्हें विद्या प्राप्त नहीं होती। यहां शिक्षक और शिष्य के बीच जो गहरा आत्मीय संबंध था, उसी ने देश को महान नागरिक और प्रतापी राजा दिए। आज जो 'दैविक संस्कृति' लुप्त हो रही है, उसे पुन: जागृत करने की जरूरत है।

सशक्त भारत अभियान का शुभारंभ

आशा दीदी बिहार में प्रशासनिक पदाधिकारियों के लिए आयोजित ‘कर्मयोग द्वारा विकसित भारत, सशक्त भारत’ अभियान के शुभारंभ के सिलसिले में नालंदा पहुंची थीं। इस दौरान खंडहर परिसर पहुंचने पर रामस्वरूप रामश्री व स्थानीय ग्रामीणों ने पुष्प गुच्छ देकर उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान पटना जोन की संगीता दीदी, बिहारशरीफ की अनुपमा दीदी, राजगीर की पूनम दीदी, माउंट आबू से आए राजयोगी हरीश भाई, राजयोगिनी रुक्मिणी देवी व अन्य मौजूद थीं। सभी बहनों ने दीदी का भव्य अभिनंदन किया और नालंदा के गौरव को अक्षुण्ण रखने का संकल्प लिया। (नालंदा से प्रमोद चंद्र झा)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नालंदा खंडहर का अवलोकन किसने किया?
राजयोगिनी ब्रह्मकुमारी आशा दीदी ने प्रतिनिधियों के साथ नालंदा खंडहर का अवलोकन किया।
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