
मशरूम बनेगा किसानों की आमदनी का नया जरिया
कृषि विज्ञान केंद्र हरनौत में किसानों को बटन मशरूम की खेती सिखाई गई। यह कम लागत में अधिक मुनाफा देती है और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। मशरूम में कैंसर रोधी गुण होते हैं और इसकी बाजार में मांग बढ़ रही है। प्रशिक्षण में बैंकिंग सुविधा की जानकारी भी दी गई।
मशरूम बनेगा किसानों की आमदनी का नया जरिया कृषि विज्ञान केंद्र हरनौत में सिखाई गई बटन मशरूम की खेती मशरूम में पाए जाते हैं कैंसर रोधी गुण, बाजार में बढ़ रही है मांग हरनौत, निज संवाददाता। कृषि विज्ञान केंद्र हरनौत में चल रहे पांच दिवसीय प्रशिक्षण के तीसरे दिन बुधवार को किसानों को बटन मशरूम की खेती की पूरी प्रक्रिया सिखाई गई। प्रशिक्षण में वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ सीमा कुमारी ने बताया कि कम लागत में यह खेती ज्यादा मुनाफा देती है और यह मिट्टी को भी उपजाऊ बनाए रखती है। कैसे तैयार होती है मशरूम की फसल: बटन मशरूम के लिए गेहूं का भूसा, चोकर, यूरिया और जिप्सम मिलाकर कम्पोस्ट तैयार किया जाता है।
इसमें मशरूम का बीज डालकर कुछ दिनों तक नियंत्रित तापमान और नमी वाले कमरे में रखा जाता है। करीब तीन हफ्तों में छोटे-छोटे पिनहेड निकलने लगते हैं, जो धीरे-धीरे सफेद मशरूम का रूप ले लेते हैं। कम लागत में ज्यादा फायदा: गृह विज्ञान विभाग की वैज्ञानिक डॉ. ज्योति सिन्हा ने बताया कि एक किलो मशरूम तैयार करने की लागत करीब 25-30 रुपये आती है। जबकि, बाजार में यह 70-80 रुपये तक बिकता है। उन्होंने कहा कि यह खेती छोटे किसानों और सीमित जमीन वाले लोगों के लिए भी लाभदायक है क्योंकि इसे घर के किसी कोने में भी किया जा सकता है। स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद: वैज्ञानिकों ने बताया कि बटन मशरूम विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं। इनमें कैंसर रोधी गुण पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं। यह हृदय के लिए भी अच्छा है और इसमें सोडियम की मात्रा बहुत कम होती है। किसानों को मिली बैंकिंग सुविधा की जानकारी: प्रशिक्षण के दौरान एसबीआई हरनौत शाखा के अधिकारी रवि कुमार ने कहा कि कृषि क्षेत्र में बैंकिंग सहयोग जरूरी है। बैंक किसानों को मत्स्य पालन, डेयरी, केसीसी और मुर्गी पालन जैसे क्षेत्रों में ऋण सुविधा उपलब्ध कराता है। उन्होंने बताया कि समय पर ऋण मिलने से किसान आधुनिक खेती में निवेश कर सकते हैं। कार्यक्रम में डॉ. सीमा कुमारी, कुमारी विभा रानी और अन्य वैज्ञानिकों ने भी विषय पर जानकारी दी। प्रशिक्षण में बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए।

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