शीतलाष्टमी मेला आज से, कल मां शीतला के दरबार में उमड़ेगा श्रद्धा का सैलाब

Mar 09, 2026 10:40 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बिहारशरीफ
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शीतलाष्टमी मेला आज से शुरू हो रहा है, जिसमें बिहार, झारखंड और अन्य राज्यों से हजारों श्रद्धालु मां शीतला के दरबार में पूजा अर्चना करने पहुंचेंगे। मेले की तैयारी पूरी हो चुकी है, जिसमें खाने-पीने की दुकानों और बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले लगाए गए हैं। इस बार सप्तमी मंगलवार को और अष्टमी बुधवार को है।

शीतलाष्टमी मेला आज से, कल मां शीतला के दरबार में उमड़ेगा श्रद्धा का सैलाब

आस्था का महाकुंभ: शीतलाष्टमी मेला आज से, कल मां शीतला के दरबार में उमड़ेगा श्रद्धा का सैलाब बिहार, झारखंड समेत अन्य प्रदेशों से पूजा अर्चना करने पहुंचेंगे हजारों श्रद्धालु सज गयीं खेल-तमाशे व खाने की दुकानें, बच्चों के मनोरंजन के लिए लगाये गये हैं झूले इसबार सप्तमी को बन रहा मंगलवार का संयोग, भक्तों में दिख रहा गजब का उत्साह फोटो: मां शीतला01 - विश्व प्रसिद्ध सिद्धपीठ मघड़ा का मां शीतला मंदिर । मां शीतला02 - शीतलाष्टमी मेले में बच्चों के मनोरंजन के लिए लगाये गये झूले। बिहारशरीफ, कार्यालय प्रतिनिधि। मघड़ा गांव में स्थापित है विश्व प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां शीतला मंदिर।

माता रानी के दरबार में चैत्र कृष्ण पक्ष अष्टमी बुधवार को भक्तों का जनसैलाब उमड़ेगा। वैसे, सप्तमी यानी मंगलवार से ही दो दिवसीय शीतलाष्टमी मेला का आगाज हो जाएगा। बिहार, झारखंड समेत अन्य प्रदेशों से हजारों श्रद्धालु पहुंचेंगे। शीतलाष्टमी पर्व को लेकर मघड़ा और उसके आसपास के गांवों में खासा उत्साह है। बुधवार को इन गांवों में चूल्हे नहीं जलेंगे और सदियों पुरानी बसिऔड़ा की परंपरा निभाई जाएगी। मेले की तैयारी में मंदिर कमेटी के लोग जुटे हैं। नगर निगम द्वारा साफ-सफाई करायी जा रही है। मंदिर के आसपास पूजन सामग्री, खिलौने, श्रृंगार, चाट, पकौड़े, गुपचुप, जलेवी, तरह-तरह की मिठाइयां आदि की दुकानें सज चुकी हैं। मिट्टी के बने बर्तन, हाथी-घोड़े, देवी-देवताओं की मूर्तियां की दुकानें भी लगायी गयी हैं। बच्चों के मनोरंजन के लिए भी ढेर सारे इंतजाम किये गये हैं। फूलों से सज रहा मां का दरबार : इसबार माता शीतला के दरबार को फूलों से सजाया जा रहा है। मंदिर कमेटी के लोगों का कहना है कि पहले के सालों में फूलों के साथ रंगीन लड़ियों से दरबार को आकर्षक रंग दिया जाता था। इसबार मां के मंदिर को सिर्फ प्राकृतिक फूलों से सजाने का निर्णय लिया है। इस्लामपुर से करीब तीन हजार गेंदा फूल की लड़ियां मंगाई गई हैं। सजावट को आकर्षक रूप देने के लिए बंगाली कलाकारों को बुलाया गया है। सरोवर की बैरिकेडिंग, गोताखोर तैनात: पौराणिक मान्यता है कि पूजा अर्चना से पहले श्रद्धालु शीतला सरोवर में स्नान जरूर करते हैं। सुरक्षा के दृष्टिकोण से नगर निगम द्वारा सरोवर में बैरिकेडिंग की गयी है। इतना ही नहीं एसडीआरफ और गोताखोरों की तैनाती की गयी है। आग से सुरक्षा के लिए अग्निशमन दल तो एम्बुलेंस के साथ मेडिकल टीम भी रहेगी। तीसरी आंख से भीड़ पर नजर : भीड़ पर नजर रखने के लिए नगर निगम द्वारा मंदिर के आसपास और मेला क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगाये जा रहे हैं। मॉनिटरिंग के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है। चकाचक रौशनी के लिए लाइटें लगायी गयी हैं। श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए जगह-जगह पर शुद्ध जल का इंतजाम किया गया है। बसिऔड़ा मनाने की परंपरा : मंदिर के पुजारी मुन्ना पांडेय, प्रभात कुमार पांडेय, रवि रंजन, पैक्स अध्यक्ष व समाजसेवी विश्वास कुमार कहते हैं कि अतिप्राचीन काल से मघड़ा तथा इसके आसपास के दर्जनों गांवों में बसिऔड़ा मनाने की परंपरा रही है। सप्तमी यानी मंगलवार की शाम में खाना बनाने के बाद घरों की सफाई होगी। अष्टमी के दिन किसी घर में चूल्हे नहीं जलेंगे। रात में बनाये गये खाने को लोग बसिऔड़ा के रूप में ग्रहण करेंगे। मिट्ठी कुआं की पूजा : मां शीतला की पूजा करने के बाद मंदिर से थोड़ी दूर पर स्थित मिट्ठी कुआं की पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि इसी कुएं की खुदाई कर मां शीतला की प्रतिमा को निकाला गया था तथा तालाब के पास चैत्र अष्टमी के दिन स्थापित किया गया था। यही कारण है कि श्रद्धालु माता रानी की चौख पर मत्था टेकने के बाद मिट्टी कुआं की जरूर पूजा करते हैं। शीतलाष्टमी पर बन रहे कई महासंयोग: ज्योतिषाचार्य पं. मोहन कुमार दत्त मिश्र ने बताया कि इस बार शीतलाष्टमी पर सिद्ध योग, हर्षण योग, रवि योग और अमृत योग का अद्भुत संगम बन रहा है। सप्तमी मंगलवार को है। जबकि, अष्टमी बुधवार को पड़ने से बुधाष्टमी योग का भी निर्माण हो रहा है, जो श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत शुभ फलदायी है। कैसे पड़ा मघड़ा नाम : मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के खंड किए थे, तब भगवान शिव ने सती के अवशेषों को एक मघ (घड़े) में रखकर इसी स्थान पर धरती के नीचे छिपा दिया था। इसी मघ के कारण इस गांव का नाम मघड़ा पड़ा।

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