केवीके : किसानों को देते हैं उपज की जानकारी, खुद के खेत में लगी फसल कटनी लायक भी नहीं

Nov 21, 2025 10:51 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बिहारशरीफ
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हरनौत में कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को उपज की जानकारी देता है, लेकिन यहाँ फसल की गुणवत्ता और सुरक्षा की गंभीर समस्याएँ हैं। चहारदीवारी के अभाव में जलजमाव और चोरी की घटनाएँ हो रही हैं। हाल ही में एक ग्रामीण की डूबने से मौत हो गई। प्रशासनिक उपेक्षा के कारण स्थानीय लोगों में आक्रोश है।

केवीके : किसानों को देते हैं उपज की जानकारी, खुद के खेत में लगी फसल कटनी लायक भी नहीं

केवीके : किसानों को देते हैं उपज की जानकारी, खुद के खेत में लगी फसल अच्छी नहीं चहारदीवारी का निर्माण नहीं होने से सुरक्षा और जलजमाव की बनी है गंभीर समस्या कुछ माह पहले डूबने से हो गयी थी एक की मौत, नाराज लोगों ने की थी सड़क जाम फोटो : केवीके01 : हरनौत कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में लगी धान की फसल। हरनौत, हिन्दुस्तान संवाददाता। जिले के किसानों को खेती-बाड़ी में हुनरमंद बनाने के लिए हरनौत में कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना की गयी है। लेकिन, यहां की प्रशासनिक उपेक्षा का आलम यह कि पिछले छह माह में केंद्र परिसर में दो हादसे हो चुके हैं।

लेकिन, समस्याओं के समाधान के लिए अबतक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। हद तो यह कि किसानों को प्रशिक्षित करने पर लाखों रुपए खर्च किये जा रहे हैं। सच्चाई यह भी कि इसके परिसर में लगी धान फसल की गुणवत्ता उतनी अच्छी नहीं है, जितनी बेहतर उपज के दावे कृषि वैज्ञानिक करते हैं। कई खेतों में तो कटनी होने लायक भी धान की फसल नहीं है। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि जब खुद के खेत की अच्छी तरह से देखभाल नहीं कर पाते हैं, तो फिर किसानों को अच्छी उपज का प्रशिक्षण देने का दावा कितना सफल हो सकेगा। चहारदीवारी न होने के कारण केंद्र परिसर के जलजमाव वाले क्षेत्र में कुछ माह पहले नियामतपुर निवासी एक ग्रामीण की डूबने से मौत हो गई थी। दुर्घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने कई घंटे तक सड़क जाम की थी। बावजूद, इसके अबतक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इतना ही नहीं, चहारदीवारी न होने से चोरी की घटनाएं होने की आशंका बनी रहती है। यहां सालोंभर किसान प्रशिक्षण लेने आते हैं। ऐसे में सुरक्षा के साथ खिलवाड़ ठीक नहीं है। जलजमाव और अतिक्रमण की दोहरी मार: वैज्ञानिक ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र के आसपास नए मकान बन रहे हैं। लोग अपने घरों का गंदा और बरसात का पानी संस्थान परिसर में ही गिरा रहे हैं, जिससे जलजमाव की स्थिति बनी रहती है। जलनिकासी की व्यवस्था न नहीं है। इस वजह से डूबने जैसी घटना हुई थी। केंद्र के मुख्य गेट के सामने कई लोगों ने दुकानें सजा ली हैं। संस्थान में आने-जाने वाले किसानों और कर्मचारियों को परेशानी होती है। गोदाम समेत अन्य सुविधाओं का अभाव : चहारदीवारी और अतिक्रमण के अलावा इस केंद्र में अन्य आवश्यक सुविधाएं मसलन गोदाम और रखरखाव की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इन समस्याओं के कारण वैज्ञानिक और कृषि संबंधी कार्यों के क्रियान्वयन में बाधा आती है। कृषि विज्ञान केंद्र जैसी महत्वपूर्ण संस्था की इस बदहाली के बाद भी प्रशासन की चुप्पी स्थानीय लोगों के बीच रोष पैदा कर रही है। कई बार किया गया है पत्राचार : संस्थान की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सीमा कुमारी ने बताया कि चहारदीवारी, जलजमाव समेत अन्य समस्याओं के समाधान के लिए कई बार वरीय अधिकारियों से पत्राचार किया गया है। लेकिन, समाधान की दिशा में अबतक पहल नहीं हुई है। सुरक्षा को लेकर चहारदीवारी बनाने के लिए विभाग को तीन से चार बार लिखित रूप में सूचना दी जा चुकी है।

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