
कार्तिक पूर्णिमा कल, श्रद्धालु लगाएंगे डुबकी, घाटों पर गूंजेगी आरती
संक्षेप: कार्तिक पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। श्रद्धालु गंगा और अन्य पवित्र सरोवरों में स्नान करेंगे और दीपदान करेंगे। इस दिन को देव दीपावली के रूप में मनाते हैं, जिसमें दान-पुण्य का महत्व है। घाटों पर आरती और भजन-संध्या का आयोजन होगा, जिससे वातावरण भक्तिमय हो जाएगा।
कार्तिक पूर्णिमा कल, श्रद्धालु लगाएंगे डुबकी, घाटों पर गूंजेगी आरती गंगा और सरोवरों में उमड़ेगी आस्था की भीड़ देव दीपावली के अवसर पर दीपदान और दान-पुण्य करने का है विशेष महत्व पावापुरी, निज संवाददाता। कार्तिक पूर्णिमा का पावन पर्व बुधवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर श्रद्धालु गंगा, पंचाने और अन्य पवित्र सरोवरों में स्नान कर विशेष पूजा-अर्चना करेंगे। हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को स्नान, दान और दीपदान का अत्यंत धार्मिक महत्व है। आचार्य पप्पू पांडेय बताते हैं कि कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली और त्रिपुरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।

मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों या सरोवरों में स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने इसी दिन त्रिपुरासुर का संहार कर देवताओं को मुक्ति दिलायी थी। इसलिए यह दिन देवताओं की दीपावली के रूप में मनाया जाता है। पंडित पुरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान के साथ दीपदान का विशेष महत्व है। इस दिन श्रद्धालु दीप जलाकर जल में प्रवाहित करते हैं, जिससे घाटों की शोभा मनमोहक हो उठती है। वाराणसी, हरिद्वार, प्रयागराज और गया जैसे तीर्थस्थलों के साथ पावापुरी सरोवर में भी दीपों की श्रृंखला से पूरा वातावरण आलोकित रहेगा। जिले के विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा बलों की तैनाती की है, ताकि स्नान व पूजा-अर्चना शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो सके। पंडित सूर्यमणि पांडेय कहते हैं कि इस दिन केवल स्नान ही नहीं, बल्कि दान-पुण्य का भी अत्यंत फलदायी महत्व होता है। श्रद्धालु अन्न, वस्त्र और धन का दान कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। ब्राह्मण भोजन और गरीबों की सेवा करने की परंपरा भी इस दिन निभाई जाती है। आस्था और उत्सव का संगम है यह पर्व : कार्तिक पूर्णिमा का पर्व धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक उत्सव का प्रतीक भी है। इस दिन घाटों पर आरती, भजन-संध्या और दीपदान के कार्यक्रमों से वातावरण भक्तिमय बन जाता है। पवित्र स्नान, दीपदान और दान के माध्यम से श्रद्धालु अपने जीवन में पुण्य और शांति की अनुभूति करते हैं। बुधवार को कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर पावापुरी, गिरियक, कोसुक व अन्य जगहों पर पंचाने नदी घाट और आसपास के सरोवरों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। आस्था, भक्ति और प्रकाश से सराबोर यह दिन धर्म और पवित्रता का अद्भुत संगम बनेगा।

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