Inauguration of Royal Bhutan Monastery in Rajgir Symbolizes India-Bhutan Spiritual Bond राजगीर बना भारत-भूटान संबंधों का नया आध्यात्मिक केंद्र, Biharsharif Hindi News - Hindustan
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राजगीर बना भारत-भूटान संबंधों का नया आध्यात्मिक केंद्र

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Newswrap हिन्दुस्तान, बिहारशरीफThu, 4 Sep 2025 08:36 PM
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राजगीर बना भारत-भूटान संबंधों का नया आध्यात्मिक केंद्र

राजगीर बना भारत-भूटान संबंधों का नया आध्यात्मिक केंद्र राजगीर में रॉयल भूटान मॉनेस्ट्री का भव्य लोकार्पण भूटान के प्रधानमंत्री और सर्वोच्च धर्मगुरु जे-खेम्पो ने किया उद्घाटन केंद्रीय मंत्री रिजिजू बोले-यह हमारी साझा विरासत का प्रतीक पारंपरिक नृत्य और बौद्ध मंत्रोच्चार से गूंजा परिसर फोटो: भूटान 01: रॉयल भूटान मॉनेस्ट्री के लोकार्पण के अवसर पर मंदिर परिसर में परिक्रमा करते भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू एवं सर्वोच्च बौद्ध धर्मगुरु जे खेम्पो। भूटान 02: रॉयल भूटान मॉनेस्ट्री के गर्भगृह में विशेष पूजा-अर्चना में शामिल भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू। भूटान 03: मॉनेस्ट्री पहुंचने पर पारंपरिक भूटानी तरीके से सफेद खादा (सम्मान का प्रतीक) भेंट कर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का स्वागत करते बौद्ध भिक्षु व प्रतिनिधि।

भूटान 04: लोकार्पण समारोह के दौरान मंदिर के भीतर बौद्ध धर्मगुरुओं के साथ प्रार्थना में शामिल केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, बिहार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार एवं अन्य भारतीय अतिथि। राजगीर, निज संवाददाता। भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली राजगीर गुरुवार को भारत और भूटान की सदियों पुरानी दोस्ती के एक नए और स्वर्णिम अध्याय का साक्षी बना। बौद्ध मंत्रों के पवित्र उच्चारण, पारंपरिक भूटानी संगीत और दो देशों के शीर्ष नेताओं की गरिमामयी मौजूदगी के बीच यहां नवनिर्मित रॉयल भूटान मॉनेस्ट्री के द्वार विश्व के लिए खोल दिए गए। यह सिर्फ एक इमारत का लोकार्पण नहीं, बल्कि दो राष्ट्रों की साझा आध्यात्मिक विरासत और अटूट मैत्री का जीवंत उत्सव था। भूटान के प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग तोबगे, भूटान के सर्वोच्च धर्मगुरु जे खेम्पो और भारत के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने संयुक्त रूप से नवनिर्मित रॉयल भूटान मॉनेस्ट्री का लोकार्पण किया। यह मंदिर भारत और भूटान के बीच सदियों पुराने आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और राजनयिक संबंधों के एक नए और शक्तिशाली प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। यह भारत में भूटान का दूसरा बौद्ध मंदिर है, जो दोनों देशों के सदियों पुराने संबंधों का प्रतीक बनकर खड़ा है। हालांकि, इस कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार किसी कारणवश शामिल नहीं हो सके। लेकिन, उनकी ओर से शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने भूटान के प्रधानमंत्री और सभी अतिथियों का स्वागत किया। बौद्ध मंत्रोच्चार से गूंजा राजगीर: लोकार्पण समारोह की शुरुआत पारंपरिक बौद्ध धार्मिक विधि-विधान के साथ हुई। परम पावन जे-खेम्पो के नेतृत्व में हुई विशेष पूजा-अर्चना और मंदिर परिक्रमा में प्रधानमंत्री तोबगे, केंद्रीय मंत्री रिजिजू और बिहार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने भाग लिया। इस दौरान बौद्ध भिक्षुओं द्वारा किए गए मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण आध्यात्मिक आभा से सराबोर हो गया। यह मैत्री और बौद्धिक धरोहर का सेतु: भूटानी पीएम : भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे ने कहा कि यह मॉनेस्ट्री भारत और भूटान के बीच गहरे आध्यात्मिक व सांस्कृतिक रिश्तों का प्रतीक है। यह दोनों देशों के बीच मैत्री और बौद्धिक धरोहर का एक सेतु है। यह न केवल बौद्ध धर्मावलंबियों, बल्कि दुनिया भर के पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा। राजगीर की यह पवित्र धरती शांति का केंद्र है और यहां आकर लोग धन्य हो जाते हैं। भारत युद्ध नहीं, बुद्ध की धरती : रिजिजू : केंद्रीय संसदीय कार्य व अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि आज भारत और भूटान, दोनों के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। राजगीर दुनिया का एक बहुत बड़ा बौद्ध केंद्र है और इस पवित्र धरती पर मंदिर का लोकार्पण दोनों देशों के आध्यात्मिक, धार्मिक और राजनीतिक संबंधों को और मजबूत करने का प्रतीक है। राजगीर दुनिया का एक बहुत बड़ा बौद्ध केंद्र है। इस पवित्र धरती पर भूटान के प्रधानमंत्री और उनके सर्वोच्च धर्मगुरु का आना हमारे लिए सौभाग्य है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश दोहराते हुए कहा कि भारत ने दुनिया को युद्ध नहीं, बुद्ध दिया है। राजगीर तो शांति के संदेश का मुख्य केंद्र है। सीएम नीतीश ने भेजा अपना संदेश: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की गैर मौजूदगी में उनका संदेश लेकर पहुंचे बिहार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के लिए अपनी शुभकामनाएं भेजी हैं। जब इस मंदिर का शिलान्यास हो रहा था, तो वे स्वयं यहां मौजूद थे। आज किन्हीं कारणों से वे नहीं आ पाए। यह मंदिर निश्चित रूप से भारत और भूटान की मैत्री को और गहरा करेगा। भूटानी कला और बिहारी संस्कृति का संगम: उद्घाटन समारोह में भूटानी कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने न केवल अपने देश के पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए। बल्कि, बिहार गान और भोजपुरी गीतों पर भी आकर्षक प्रस्तुति देकर दोनों देशों की सांस्कृतिक निकटता का अद्भुत उदाहरण पेश किया। क्या है इस मंदिर की खासियत: 18.71 करोड़ रुपये की लागत से बना यह मंदिर पारंपरिक भूटानी वास्तुकला का एक उत्कृष्ट नमूना है। इसके गर्भगृह में भगवान बुद्ध, गुरु पद्मसंभव और झाबद्रुंग नवांग नामग्याल की भव्य प्रतिमाएं स्थापित हैं। मंदिर परिसर में एक बहुउद्देशीय हॉल भी है। इसमें 1000 लोग एक साथ प्रार्थना कर सकते हैं। यह भारत में बोधगया के बाद भूटान का दूसरा मंदिर है। इसका निर्माण भारत-भूटान के राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में किया गया है। लोकार्पण से पहले सभी अतिथि नालंदा विश्वविद्यालय भी गए। जहां कुलपति सचिन चतुर्वेदी ने उनका स्वागत किया। इस कार्यक्रम में विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मनु महावर, भूटान में भारत के राजदूत सुधाकर दलेला, नालंदा डीएम कुंदन कुमार, एसपी भारत सोनी समेत बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु और गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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