Biharsharif News: अनदेखी: सीओई चंडी में हाईटेक खेती पर 2 माह से लगा है ताला
Biharsharif News: हिन्दुस्तान एक्सक्लूसिव : चंडी में स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबल की हाइड्रोपोनिक और एरोपोनिक यूनिटें दो महीनों से बंद हैं। देखरेख करने वाली एजेंसी का करार ख़त्म होने से आलू बीज और पत्तेदार सब्जियों की खेती ठप हो गई है। किसानों को प्रशिक्षण देने का उद्देश्य भी अधूरा रह गया है।

Biharsharif News: हिन्दुस्तान एक्सक्लूसिव : अनदेखी: सीओई चंडी में हाईटेक खेती पर 2 माह से लगा है ताला विदेशी सब्जियों और रोगरहित आलू बीज का उत्पादन ठप हाईड्रोपोनिक और एरोपोनिक यूनिटों में खेती पर लगा ग्रहण देखरेख करने वाली एजेंसी का करार खत्म होने से आयी नौबत फोटो हाइड्रोपोनिक : चंडी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबल में बंद हाइड्रोपोनिक यूनिट। बिहारशरीफ, कार्यालय प्रतिनिधि।
हाइड्रोपोनिक और एरोपोनिक तकनीक
सूबे के इकलौते चंडी स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबल (सीओई) में इजरायली तकनीक से हाईटेक नर्सरी में सब्जी फसलों के उन्नत पौधे तैयार किये जाते हैं। साथ ही यहां अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस हाइड्रोपनिक में पत्तेदार सब्जियां तो एरोपोनिक यूनिट में रोगरहित आलू बीज तैयार होता है। विडंबना यह कि दो माह से दोनों यूनिटों में हाईटेक खेती पर ताला लटका हुआ है। देखरेख करने वाली एजेंसी का करार खत्म होने से यह नौबत आयी है। विभाग के अनदेखी ऐसी कि इतने दिन होने के बावजूद अबतक सार्थक पहल नहीं हुई है। कमाल यह भी कि जिस उद्देश्य से इसकी स्थापना हुई है, वह पूरा नहीं हो रहा है। फिलहाल, हाइड्रोपोनिक यूनिट में विदेशी पत्तेदार सब्जियों की खेती ठप है। जबकि, एरोपोनिकट यूनिट में रोगरहित आलू के बीज तैयार करने की प्रक्रिया बंद है। पटना में बिकती थीं पत्तेदार सब्जियां: मार्च तक हाइड्रोपोनिक में बिना मिट्टी के पत्तेदार सब्जियां तैयार की जाती थीं। पटना की एजेंसी से सब्जियों को बेचने के लिए करार हुआ था। पौधे तैयार हो जाते थे तो एजेंसी के कर्मी यहां से सब्जियां ले जाते थे। यहां तैयार लेट्यूस (सलाद पत्ता), पॉकचोयी(पत्तेदार सब्जी) और बेसिल (तुलसी) की खेप पटना के बड़े होटलों का जायका बढ़ाती थी। इससे सीओई को आय होता था। फिलहाल सबकुछ बंद है।
किसानों का प्रशिक्षण
देखेंगे और सीखेंगे का उद्देश्य पूरा नहीं : सीओई में सालोंभर बिहार के विभिन्न जिलों के किसान सब्जी की उन्नत खेती का प्रशिक्षण लेने आते हैं। किसानों को सब्जी की खेती के साथ ही हाइड्रोपोनिक और एरोपोनिक यूनिट में किस तरह खेती की जाती है, उसके बारे में भी बताया जाता था। लेकिन, वर्तमान में देखेंगे और सीखेंगे का उद्देश्य भी पूरा नहीं हो रहा है।
हाइड्रोपोनिक एवं एरोपोनिक तकनीक के बारे में
क्या है हाइड्रोपोनिक तकनीक: इस विधि में मिट्टी की जरूरत नहीं पड़ती। पानी में बालू या कंकड़ डालकर पौधे लगाये जाते हैं। पौधों को पोषक तत्व देने के लिए विशेष तरह का घोल का इस्तेमाल होता है। वह भी काफी कम मात्रा में। घोल में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, मैग्नीशियम, कैल्शियम, सल्फर, जिंक, आयरन को एक खास अनुपात में मिलाया जाता है। ऑक्सीजन को पंपिंग मशीन के जरिए पौधे की जड़ों तक पहुंचाया जाता है। इस तकनीक से उगाई गईं सब्जियां और पौधे अधिक पौष्टिक होते हैं। क्या है एरोपॉनिक तकनीक: हवा में खेती को एरोपॉनिक्स तकनीक कहते हैं। खासकर आलू की। यह मिट्टीरहित विधि है, जहां पौधे उगाए जाते हैं। इस तकनीक में पौधों के लिए पानी में मिश्रित पोषक तत्वों के घोल को समय-समय पर बॉक्स में डाला जाता है। ताकि, पौधे पूरी तरह से विकसित हो सकें। हवा में लटकती जड़ें पोषक तत्वों को अवशोषित करती हैं। पारंपरिक खेती की तुलना में एरोपॉनिक विधि से आलू की खेती करने पर अधिक पैदावार मिलती है।
अधिकारी की राय
क्या कहते हैं अधिकारी : हाइड्रोपोनिक और एरोपॉनिक यूनिट की देखभाल करने वाली एजेंसी का एकरारनामा अप्रैल में खत्म हो गया है। इस वजह से दोनों यूनिटें फिलहाल बंद हैं। जल्द ही नयी एजेंसी को जिम्मेवारी दी जाएगी। इसके लिए मुख्यालय स्तर से प्रक्रिया चल रही है। राकेश कुमार, सहायक उद्यान पदाधिकारी


