
फाइनल : राजगीर की धरोहर पर संकट, पहली बार जनवरी में ही बंद हो गईं गंगा-यमुना कुंड की धाराएं
राजगीर के गंगा-यमुना कुंड की धाराएं पहली बार जनवरी में ठंड के बीच बंद हो गई हैं। अधिक बोरिंग के कारण कुंड क्षेत्र की जल स्थिति बिगड़ी है। पंडा कमेटी ने संरक्षण के लिए त्वरित कदम उठाने की अपील की है। इससे मलमास मेले पर भी असर पड़ने की संभावना है।
राजगीर की धरोहर पर संकट, पहली बार जनवरी में ही बंद हो गईं गंगा-यमुना कुंड की धाराएं कुंड क्षेत्र के आस-पास अधिक बोरिंग होने के कारण बने ऐसे हालात पंडा कमेटी ने कहा-सख्त व त्वरित कदम उठाने की जरूरत फोटो : राजगीर कुंड : राजगीर के गंगा-जमुना कुंड, जिनकी धााराएं हुईं बंद। राजगीर, निज प्रतिनिधि। आदि काल से 22 कुंड व 52 धाराएं राजगीर की पहचान हैं। लेकिन, कड़ाके की ठंड के बीच गंगा-जमुना कुंड की दो धाराएं बंद हो गयी हैं। हालांकि, कुछ साल पहले गर्मी में इन कुंडों की धाराएं कुंद पड़ी थीं। यह पहला मौका है जब सर्द मौसम में ऐसा हुआ है।
जानकारों की मानें तो कुंड क्षेत्र में बोरिंगों की संख्या अधिक होने से ये हालात बने हैं। लोगों ने कहा कि इसके संरक्षण के लिए सख्त व त्वरित कदम उठाने की जरूरत है। वरना, 18 मई से एक माह का लगने वाला मलमास मेला भी प्रभावित होगा। सिंचाई विभाग के पूर्व कार्यपालक अभियंता जयदेव प्रसाद ने बताया कि वर्ष 2010 में केन्द्रीय टीम ने कुंड के जलस्रोतों व धाराएं कुंद होने का अध्ययन किया था। टीम ने कई संरचनाओं के निर्माण व जलस्रोतों की सफाई की अनुशंसा की थी। लेकिन, इसपर विशेष काम नहीं किया जा सका। आस-पास में उच्चप्रवाही बोरिंग लगाने से कुंडों के जलस्रोतों का पानी भू-गर्भ में चला जाता है। ऐसे में बरसात के बाद कुंडधाराओं के लिए पानी पहाड़ में नहीं रह पाता है। राजगीर ब्रह्मकुंड पंडा कमेटी के सचिव विकास उपाध्याय, प्रवक्ता सुधीर उपाध्याय व अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के उपाध्यक्ष धीरेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि कुंड क्षेत्र के आसपास ज्यादा बोरिंग होने का प्रभाव इन धाराओं पर पड़ रहा है। समाजसेवी डॉ. प्रवीण कुमार, पप्पू यादव, गोलू यादव, विक्रम कुमार, अनुपम कुमार, कुणाल कुमार व अन्य ने बताया कि राजगीर के स्थानीय युवा और वृद्ध लोग गंगा-जमुना कुंड में ही नहाते थे। क्योंकि, यह कुंड ऐसा है, जहां दो धाराएं निकलती थीं। और, यहां साबुन-शैंपू लगाना वर्जित नहीं है। अन्य कुंड भी खतरे में : मारकंडेय कुंड की धारा भी बिल्कुल धीमी हो चुकी है। व्यास कुंड की धारा भी समाप्ति की कगार पर है। सप्तधारा की दो-तीन धाराओं से भी पानी धीरे-धीरे निकल रहा है। इसका असर पर्यटकों की आमद पर भी पड़ेगा। क्योंकि, राजगरी नगरी की पहचान गर्म कुंड ही है। इनमें हर साल करोड़ों लोग डुबकी लगाकर पूजा-अर्चना करते हैं। क्या है मान्यता व महत्व : पौराणिक मान्यता के अनुसार ब्रह्मा ने यहीं यज्ञ किया था। उसी वक्त उनके मानस पुत्र राजा वसु ने 22 कुंडों व 52 धाराओं का निर्माण करवाया था। ब्रह्मकुंड के पानी का तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस होता है। स्नान करने से त्वचा रोग, जोड़ों में दर्द और अन्य शारीरिक व्याधियां दूर होती हैं, क्योंकि पानी गंधक से परिपूर्ण और औषधीय गुणों से युक्त होता है। मकर संक्रांति व मलमास मेले में इसमें स्नान की विशेष मान्यता है। पांडू पोखर में करायी गयी सात बोरिंग : पंडा कमेटी के सचिव विकास उपाध्याय ने बताया कि सौंदर्यीकरण के नाम पर पांडू पोखर में सात बोरिंग करायी गयी हैं। इस कारण कुंड की धाराओं का अस्तित्व धीरे-धीरे समाप्ति की कगार पर है। कुंड के आसयपास कई निजी संस्थान व होटल हैं, जहां इस तरह की बोरिंग अभी भी चलायी जा रही हैं। अधिकारी बोले : सिंचाई विभाग की उच्चस्तरीय टीम ने गंगा-जमुना कुंड का अध्ययन किया है। रिपोर्ट आने के बाद विशेषज्ञों की अनुशंसा के अनुरूप कार्य कराये जाएंगे। हालांकि, कुंड क्षेत्र के आस-पास उच्चप्रवाही बोरिंग कराने की मनाही है। बोरिंग कराने वालों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी। आशीष नारायण, एसडीओ, राजगीर

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