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30 दिन में 6 ईंच नीचे खिसका भू-जलस्तर, औसत जलस्तर 42.3 फीट पहुंचा

30 दिन में 6 ईंच नीचे खिसका भू-जलस्तर, औसत जलस्तर 42.3 फीट पहुंचा30 दिन में 6 ईंच नीचे खिसका भू-जलस्तर, औसत जलस्तर 42.3 फीट पहुंचा30 दिन में 6 ईंच नीचे खिसका भू-जलस्तर, औसत जलस्तर 42.3 फीट पहुंचा30...

30 दिन में 6 ईंच नीचे खिसका भू-जलस्तर, औसत जलस्तर 42.3 फीट पहुंचा
हिन्दुस्तान टीम,बिहारशरीफTue, 28 May 2024 09:45 PM
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30 दिन में 6 ईंच नीचे खिसका भू-जलस्तर, जिले का औसत जलस्तर 42.3 फीट पहुंचा
35 पंचायतें डेंजर, 3 प्रखंड क्रिटिकल तो एक प्रखंड ओवर एक्सप्लॉइट जोन में

गिरते जलस्तर के साथ हैंडपम्प और बोरिंग फेल होने की शिकायतें अनगिनत

बिहारशरीफ के 15 मोहल्ले के लोगों की टैंकर के पानी से बुझ रही प्यास

फोटो

टैंकर : बिहारशरीफ के मथुरिया मोहल्ले में टैंकर से पानी भरते लोग।

बिहारशरीफ, कार्यालय प्रतिनिधि।

आग उगलती गर्मी के बीच जिले का भू-जलस्तर पाताल की ओर जा रहा है। 30 दिन में करीब छह ईंच तक पानी नीचे गया है। 15 अप्रैल तक जिले का औसत जलस्तर 41.9 फीट था। 15 मई को यह आंकड़ा बढ़कर 42.3 फीट हो गया है। जबकि, पिछले साल 15 मई तक करीब 39 फीट औसत जलस्तर जिले का था। गिरते जलस्तर के बीच हैंडपम्प और बोरिंग फेल हो रहे हैं। जलसंकट का सामना लोगों को करना पड़ रहा है। जिला मुख्यालय बिहारशरीफ की स्थिति और भयावह है। नल-जल फेल होने के कारण निगर क्षेत्र के 15 मोहल्लों में टैंकर से पानी की आपूर्ति हो रही है। पिछले साल जरूरत से कम बारिश होना जलस्तर में लगातार गिरावट की मुख्य वजह बतायी जा रही है।

नौबत ऐसी कि जिले के 20 में से तीन प्रखंडों के सभी गांव डेंजर जोन में हैं। परवलपुर (59.3 फीट), एकंगरसराय (56.10 फीट) और बेन में (50.10 फीट) यानी औसत जलस्तर 50 फीट से नीचे है। इस श्रेणी में विभिन्न प्रखंडों की 35 पंचायतें शामिल हो गयी हैं। जबकि, पहले से ही भू-जलस्तर के मामले में करायपरसुराय, गिरियक व एकंगरसराय क्रिटिकल जोन तो नगरनौसा ओवर एक्सप्लॉइट जोन में शामिल है। यहां सरकारी स्तर पर नये नलकूप लगाने पर पाबंदी लगा दी गयी है। घटते जलस्तर के साथ खेतों में सिंचाई के लिए लगी पुरानी बोरिंग(जिसकी गहरायी कम है) पानी उगलने में फेल हो रही हैं। सब्मर्सेबल मोटर से भी कम पानी दे रहा है। नूरसराय के किसान धनंजय कुमार, चंडी के वीरेन्द्र कुमार, इस्लामपुर के मनोज कुमार व अन्य कहते हैं कि 30 दिन पहले तक एक घंटे में तीन कट्ठा खेत की सिंचाई हो जाती थी। अब एक घंटा मोटर चलाने पर महज एक से डेढ़ कट्ठा खेत की ही पटवन हो पाती है। जलस्तर में गिरावट का असर नल-जल योजना पर पड़ रही है। खराब चापाकल को बनाने में पीएचईडी के मरम्मत दल हांफ रहे हैं। मरम्मत दलों के सामने बड़ी चुनौती यह कि एक तरफ हैंडपम्प बना रहे हैं तो दूसरी तरफ धड़ाधड़ खराब होने की शिकायतें अनगिनत हैं। भले ही विभाग सभी प्रखंडों में एक से दो दल तैनात करने का दावा कर रहा है। सच्चाई यह भी कि शिकायत के बाद भी कई गांवों में दल समय से नहीं पहुंचता है।

सबसे नीचे मई पंचायत में पानी:

परवलपुर की मई पंचायत में सबसे नीचे 60.11 फीट पर पानी का लेयर है। जबकि, पास के बेन प्रखंड की अरावां पंचायत की स्थिति भी ठीक नहीं है। यहां का भू-जलस्तर 60.5 फीट पर है। इस्लामपुर की सूढ़ी में 59.10, परवलपुर की पिलीछ में 59.3 तो शंकरडीह में 59.9 फीट पर पानी है। चिंता यह भी कि जिस रफ्तार से पानी नीचे जा रहा है, आने वाले दिनों में कई पंचायतें भी डेंजर जोन की श्रेणी में आ जाएंगी।

जून में जलसंकट और होगा गंभीर

घटते जलस्तर के बीच मई में ही पानी के लिए हाय-तौबा होने लगी है। जबकि, जून अभी बाकी है। खासकर 15 जून के बाद जब किसान खरीफ की खेती में जुटेंगे और सब्मर्सेबल मोटर से खेतों की सिंचाई होने लगेगी तो भू-जलस्तर में और तेजी से गिरावट होने का अनुमान है। ऐसे में पानी का संकट और भी गंभीर होगा। पीएचईडी के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर बालमुकुंद कुमार कहते हैं कि बीते बरसात में जिले में बारिश जरूरत से कम हुई तो नदियां सूखी रह गयीं। वाटर रिचार्ज नहीं हो पाया तो इस गर्मी भू-जलस्तर की समस्या बनी हुई है।

करें उपाय, बचाएं पानी:

1. स्नान करते समय अनावश्यक पानी न बहाएं।

2. बर्तन धोने और खाना बनाते समय नल खुला छोड़कर कुछ न करें।

3. कहीं भी पानी का लीकेज न होने दें। बेकार में पानी न बर्बाद करें।

4. नदी, तालाब व अन्य जल स्रोतों का अतिक्रमण न करें।

चापाकल है खराब तो यहां करें फोन:

बिहारशरीफ डिविजन : 06112-230071

हिलसा डिविजन : 06111-253803

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