बाजार में निकली 1111 कलश के साथ शोभा यात्रा

बाजार में निकली 1111 कलश के साथ शोभा यात्रा

संक्षेप:

हरनौत में 1111 कलश के साथ 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ की शोभा यात्रा शुरू हुई। इस चार दिवसीय महायज्ञ का आयोजन सनातन संस्कृति की रक्षा और मानवता के कल्याण के लिए किया जा रहा है। भक्तों ने विभिन्न गांवों से आए कलश के साथ नगर भ्रमण किया। यज्ञ का समापन 13 दिसंबर को होगा।

Dec 10, 2025 07:19 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बिहारशरीफ
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बाजार में निकली 1111 कलश के साथ शोभा यात्रा कलश स्थापना के साथ शुरू हुआ 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ हरनौत में धर्म और संस्कृति का लगा महाकुंभ, हरनौत समेत कई प्रखंड के भक्त हुए शामिल फोटो : हरनौत गायत्री : हरनौत बाजार में बुधवार को कलश शोभा यात्रा में शामिल भक्त। हरनौत, हिन्दुस्तान संवाददाता। बाजार में बुधवार को अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज की अगुआई में चार दिवसीय 108 कुंडीय राष्ट्र शौर्य समृद्धि गायत्री महायज्ञ शुरू हुआ। एक हजार 111 कलश के साथ हजारों भक्तों ने शोभा यात्रा निकाली। इस यात्रा में हरिद्वार से लाया गया एक शक्ति कलश और विभिन्न 24 गांवों किचनी, लोहरा, बोधनगर, सरथा, चैनपुर, चेरो, नेहुसा, तेलमर आदि से 24 प्रधान कलश के साथ लोगों ने नगर भ्रमण किया।

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महायज्ञ के आयोजक प्रज्ञा युवा मंडल प्रकोष्ठ के सौरभ कुमार उर्फ सोनू सर ने बताया कि सनातन संस्कृति की रक्षा और मानवता के कल्याण के लिए यह महायज्ञ किया जा रहा है। भक्तों ने कलश के साथ बाजार, रांची रोड, पुरानी पेट्रोल पंप, थाना मोड़, डाकबंगला रोड, वीर कुंवर सिंह चौक, रेलवे स्टेशन समेत नगर भ्रमण किया। इसमें मराठी अवतार में 24 कन्याओं ने झांकी प्रस्तुत की। लोगों ने भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के दर्शाए किए। चार दिवसीय आयोजन में शांतिकुंज हरिद्वार के नायक टोली प्रमुख पं. श्रीराज कुमार भृगु, सहायक नायक टोली बिजेंद्र त्रिपाठी और गायक श्रीरामबीर नेगी समेत अन्य प्रतिनिधि पधारे हैं। बाजार के रोड फोर लेन चंडी मोड़ के पूर्व में यज्ञ परिसर में 108 छोटे-छोटे पवित्र अग्नि कुंड के पास लोगों ने पूजा अर्चना की। यज्ञाचार्य डॉ. एतवारी पंडित ने कुंडों के महत्व को बताया। कहा 108 संख्या आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और ब्रह्मांडीय दृष्टि से पूर्णता, पवित्रता और मोक्ष से जुड़ा है। यह 27 नक्षत्रों और 4 दिशाओं का खगोलीय अनुपात दर्शाती है। इससे इन कुंडों में यज्ञ करने से आध्यात्मिक उन्नति होती है। इस दौरान सामूहिक जप, दीप महायज्ञ, प्रज्ञा योग व्यायाम, मां गायत्री संगीत, प्रवचन और अन्य वैदिक संस्कार कराए जाएंगे। 13 दिसंबर को इसकी पूर्णाहुति होगी।