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समस्त कामनाओं को पूर्ण करती हैं घोसरावां की मां आशापुरी समस्त कामनाओं को पूर्ण करती हैं घोसरावां की मां आशापुरी

हिन्दुस्तान टीम,बिहारशरीफPublished By: Newswrap
Mon, 11 Oct 2021 09:50 PM
समस्त कामनाओं को पूर्ण करती हैं घोसरावां की मां आशापुरी
समस्त कामनाओं को पूर्ण करती हैं घोसरावां की मां आशापुरी

समस्त कामनाओं को पूर्ण करती हैं घोसरावां की मां आशापुरी

घोसरावां में सिद्धीधात्री के रुप में विराजमान हैं मां आशापुरी

सदियों पुराना है मां आशा महारानी का मंदिर

फोटो

पावापुरी - घोसरावां की मां आशापुरी।

पावापुरी निज संवाददाता

पावापुरी से कुछ दूर घोसरावां गांव में स्थित मां आशापुरी का मंदिर सदियों पुराना है। राजा घोष के नाम पर इस गांव का नाम घोसरावां पड़ा। मंदिर में सिंह पर मां आशा विराजमान हैं। ऐसा माना जाता है कि प्रतिमा सिद्धीधात्री के रूप में स्थापित है। अष्टभुजी माता के दर्शन मात्र से भक्तों की मन्नतें पूरी हो जाती हैं।

यह स्थान शक्ति पीठ के रूप विख्यात हैं। मां आशापुरी की प्रतिमा अतिप्राचीन है। सबसे पहले इस मंदिर में राजा जयपाल ने पूजा की थी। पुजारियों के मुताबिक यहां माता का दर्शन करने के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों से श्रद्धालु तो आते ही हैं। साथ ही अन्य राज्यों से भी भक्तजन पहुंचते हैं। पं. उमाशंकर उपाध्याय तथा मां आशापुरी मन्दिर के पुजारी पुरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि शारदीय नवरात्र के अवसर पर मां आशापुरी मंदिर में तीन पंडितों द्वारा तांत्रिक विधि से मां आशापुरी की पूजा की जाती है। इसका भी अभिप्राय है। तीनों शक्तियां महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की पूजा विधि विधान से पूरा किए जाने की परंपरा बहुत पहले से चली आ रही है। माता के गर्भ गृह को मनमोहक ढंग से सजाया एवं संवारा गया है।

भक्तों की झोली भरती हैं मां:

उन्होंने बताया कि मां आशापुरी के दरबार में पूजा और दर्शन से सभी भक्तों की मन्नतें पूरी होती हैं। उन्होंने कहा कि नवरात्र में मां शक्ति की आराधना ,उपासना और उपवास से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। पं पीयूष उपाध्याय ने बताया कि मां की पूजा और उपासना दो प्रकार से होती है। एक सामान्य पूजा और दूसरा तंत्र पूजा। सामान्य पूजा कोई भी कर सकता है। लेकिन, तंत्र पूजा बिना गुरू के संरक्षण एवं निर्देश के बिना नहीं की जाती है। मां आशापुरी संपूर्ण शक्ति व सिद्धि प्रदान करती हैं।

पावापुरी गांव में 66 वर्षों से स्थापित हो रहीं मां दुर्गा की प्रतिमा

पारंपरिक रूप में होती है दुर्गा की पूजा

अन्य राज्यों में रह रहे ग्रामीण भी दुर्गा पूजा में होते हैं शामिल

पावापुरी। निज संवाददाता

पिछले 66 वर्षों से पावापुरी गांव में मां दुर्गा का दरबार सजा कर पारंपरिक तरीके से पूजा की जा रही है। इस बार माता की प्रतिमा महिषासुर का वध करती दिखेंगी। आकर्षक पंडाल बनाया गया है । खास यह कि दशहरा पूजा में अन्य राज्यों में रह रहे ग्रामीण भी दुर्गा पूजा में उत्साह के साथ भाग लेते हैं।

यहां के दुर्गा मंदिर से लोगों की अटूट आस्था जुड़ी है। मान्यता हैं कि यहां भक्तों की मां दुर्गा हर मनोकामना पूरी करती हैं। गिरियक प्रखंड क्षेत्र के पावापुरी में जब दुर्गा पूजा शुरू की गई थी। उस समय इक्का-दुक्का जगहों पर ही दुर्गा के प्रतिमाएं बैठती थीं। देवी दुर्गा पूजा समिति के कोषाध्यक्ष रामलखन प्रसाद यादव ने बताया कि गांव में 66 वर्षो से मां की पूजा हो रही है। सर्व प्रथम 1955 में ग्रामीणों के सहयोग से पहली बार दुर्गा पूजा शुरू की गई थी। उस समय शुरुआत करने में जाटों सिंह, इंद्रदेव सिंह, त्रिशूलधारी सिंह, राजेंद्र साव आदि ने बढ़ चढ़कर सहयोग दिया था। अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह व सचिव अनुग्रह प्रसाद सिंह ने बताया कि जिनकी मन्नतें मां दुर्गा पूरा करती हैं वे प्रतिमा बनवाने के लिए वर्षों लाइन में लगे हुए रहते हैं, तब उनका नंबर आता है। पंडित विष्णु दत्त उपाध्याय की तीसरी पीढ़ी द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से पूजा कराते आ रहे हैं। अभी उनके पौत्र पं उमाशंकर उपाध्याय द्वारा प्राण प्रतिष्ठा के दिन सर्वतोभद्र मंडल देवता, षोडश मातृका, 64 योगिनी, 10 दिगपाल, नवग्रह आदि की पूजा की जाती है उसके बाद मां दुर्गा के प्राण प्रतिष्ठा किया जाता है । यहां प्राण प्रतिष्ठा के बाद पट खुलने की बोली लगाई जाती है जो सबसे अधिक बढ़कर बोली लेता है, वहीं, पट खोल कर मां दुर्गा का दर्शन करता है। खास यह कि पहली पूजा में ही मंदिर का पट खुल जाता है। दुर्गा पूजा पर भव्य मेला भी लगता है।

पारंपरिक तरीके से होती है पूजा

पारंपरिक दुर्गापूजा की परंपरा आज भी यहां देखने को मिलती है। ग्रामीण इंद्रदेव सिंह की माने तो प्रतिदिन शाम में यहां मनोरंजन के लिए महाभारत दिखाया जा रहा है। समय के साथ अब यहां दुर्गा पूजा के अवसर पर खेल प्रतियोगिता भी होती है। आयोजन सोमवार से शुरू हो गया है। प्रतियोगिता में ग्रामीणों के साथ इलाके के प्रतिभागी भी भाग लेते हैं। विजेताओं को पुरस्कृत किया जाता है। समिति के लोगों ने बताया कि एकादशी की सुबह में मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा ।

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