तंबाकू-शराब सेवन, प्रदूषण और अनुवांशिक कारणों से कैंसर का जोखिम अधिक
जेनेटिक कारणों से युवा लोगों में हर्ट अटैक होने की संभावना बढ़ रही है। विशेषज्ञों ने बताया कि जीवनशैली में सुधार और नियमित जांच से इन बीमारियों से बचाव संभव है। आज के युग में शारीरिक श्रम की कमी और खराब आहार स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं। डॉक्टरों ने युवा पीढ़ी को स्वास्थ्य देखभाल में आगे आने की सलाह दी।

जेनेटिक कारणों से कम उम्र में भी हो सकता है हर्ट अटैक, रहें सतर्क जीवनशैली में सुधार और समय पर जांच से ही इन बीमारियों से बचाव संभव आईएमए में वैज्ञानिक सत्र में चिकित्सकों ने कैंसर और हर्ट अटैक बीमारी पर की चर्चा होली मिलन समारोह में चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे बदलावों पर एक्सपर्ट डॉक्टरों ने अनुभव किए साझा फोटो: आईएमए: आईएमए हॉल में वैज्ञानिक सत्र के बाद होली मिलन समारोह में शामिल ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ.बीबी भारती, आईएमए के अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार व अन्य। बिहारशरीफ, निज प्रतिनिधि। जवान लोगों की हर्ट अटैक से मौत होने का मुख्य कारण जेनेटिक होता है।
साइंटिफिक भाषा में इसे कार्डियो मायोपैथी कहते हैं। तंबाकू-शराब सेवन, प्रदूषण और अनुवांशिक कारणों से कैंसर होने का भी जोखिम अधिक बढ़ जाता है। जेनेटिक कारणों से कम उम्र में भी ये सब बीमारी हो सकते हैं। ऐसे में हमें सतर्क रहना होगा। जीवनशैली में सुधार और समय पर जांच से ही इन बीमारियों से बचाव संभव है। आईएमए में वैज्ञानिक सत्र में पटना से आए एक्सपर्ट डॉक्टरों ने अपने अनुभवों को साझा किया। मुख्य अतिथि हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. बीबी भारती ने कहा कि आज के समय में शारीरिक श्रम बहुत ही कम या न के बराबर करना और बदलती भोजन शैली सबसे अधिक हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। युवाओं में मांसपेशियां सख्त व कमजोर होने से बढ़ रही हर्ट अटैक की बीमारी: संरक्षक डॉ. श्याम नारायण प्रसाद ने कहा कि दो तरह के हर्ट अटैक के मामले अभी अधिक आ रहे हैं। इसमें एक 45 साल से अधिक उम्र के लोगों की व दूसरा नौजवानों की है। 45 साल से अधिक वालों में हर्ट अटैक आने के सैकड़ों कारण हो सकते हैं। लेकिन, नौजवानों के मामले में मांसपेशियां सख्त या कमजोर होना सबसे प्रमुख कारण है। इसके चलते शरीर में खून का संचार पूरी गति के साथ सही से नहीं हो पाता है। इससे नशों (रक्त वाहिकाओं) पर अतिरिक्त दबाव बढ़ता है। यह जेनेटिक भी हो सकता है। लेकिन, हम अपनी जीवनशैली में सुधार कर इससे आसानी से मुकाबला कर सकते हैं। युवा चिकित्सकों को हेल्थ केयर में आना चाहिए आगे: संरक्षक डॉ. जवाहर लाल ने युवा चिकित्सकों को हेल्थ केयर (स्वास्थ्य की देखभाल) के लिए आगे आना चाहिए। चिकित्सा जगत में नित्य नए खोज हो रहे हैं। ऐसे में उन्हें अपनी चिकित्सीय ज्ञान को भी हमेशा अपडेट रखना होगा। इसके लिए युवा पीढ़ियों को जागरूक करने की भी जिम्मेदारी हम चिकित्सकों पर है। मोबाइल, कम्प्यूटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक गजटों पर अधिक समय पर काम करना भी लोगों को बीमार कर रहा है। लेकिन, यह मजबूरी भी बन चुकी है। ऐसे में काम की प्रकृति के अनुसार कार्यस्थल पर कुछ गतिविधियों से जुड़कर हम स्वस्थ रह सकते हैं। स्मारिका का हुआ विमोचन: इस समारोह में संपादक डॉ. अजय कुमार सिन्हा, सह संपादक डॉ. प्रशांत कुमार, डॉ. सुजीत कुमार व डॉ. दयानन्द प्रसाद द्वारा संपादित स्मारिका का मुख्य अतिथि ने विमोचन किया। बिहारशरीफ आईएमए के अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार, डॉ. चन्द्रेश्वर प्रसाद, डॉ. अरविन्द कुमार सिन्हा, डॉ. ममता कौशांबी, डॉ. रश्मि नारायण व अन्य ने इलाज की नई पद्धतियों के बारे में बताया। सचिव डॉ. अभिषेक ने 2025-26 का लेखा-जोखा पेश किया। इसमें 500 से अधिक चिकित्सक शामिल हुए। आयोजक सचिव शिशु विशेषज्ञ डॉ. धनंजय कुमार, डॉ. स्वाति सिन्हा, डॉ. रिचा, डॉ. नीतू, संतोष कुमार, शंकर कुमार, मनोज चौधरी, ओझा व अन्य ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के बाद होली मिलन समारोह में चिकित्सकों ने एक दूसरे को अबीर गुलाल लगा होली की बधाई दी। बच्चों में बढ़ रही चिड़चिड़ापन की समस्या: मनोचिकित्सा पर डॉ. अमरदीप कुमार ने अपने विचार रखा। कहा कि आज के बच्चों में चिड़चिड़ापन की समस्या बढ़ती जा रही है। इसका मुख्य कारण स्क्रीन टाइम का बढ़ना है। परिजनों को बच्चों के साथ अधिक से अधिक समय बिताना चाहिए। संभव हो, तो उनके साथ खेलें। इससे उनका आपसे भावनात्मक लगाव भी बढ़ेगा। जौंडिस पर डॉ. वैभव राज, कैंसर पर डॉ. नवीन कुमार, चिकित्सीय कानून पर डॉ. ललित कुमार सिंह, डॉ. पुलक राज, डॉ. नीरु जनेश्वर सिंह, डॉ. प्रशांत कुमार, डॉ. सुमन प्रकाश, डॉ. वैभव राज, डॉ. अजय कुमार सिंह, डॉ. कीर्ति पराशर, डॉ. ब्रजेश कुमार, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. अनंत कुमार वर्मा ने अनुभव साझा किया।
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