मिसाल: सरकारी फंड का मोहताज नहीं शेखपुरा का बेलाव महल स्कूल

हिन्दुस्तान, बिहारशरीफ
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आमतौर पर सरकारी विद्यालयों की पहचान सिर्फ पढ़ाई, भवनों और सरकारी फंड पर निर्भरता तक सीमित होती है।

मिसाल: सरकारी फंड का मोहताज नहीं शेखपुरा का बेलाव महल स्कूल

मिसाल: सरकारी फंड का मोहताज नहीं शेखपुरा का बेलाव महल स्कूल अपनी 16 बीघा जमीन की नीलामी से करता है विकास; आज लगेगी बोली खेती से होने वाली आय से संवरता है स्कूल व नौनिहालों का भविष्य फोटो शेखोपुरसराय : शेखोपुरसराय का बेलाव महल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय। शेखोपुरसराय, एक संवाददाता। आमतौर पर सरकारी विद्यालयों की पहचान सिर्फ पढ़ाई, भवनों और सरकारी फंड पर निर्भरता तक सीमित होती है। किसी भी काम के लिए स्कूलों को विभाग का मुंह ताकना पड़ता है। लेकिन, शेखोपुरसराय प्रखंड का पीएम श्री ग्राम पंचायत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बेलाव महल जिले के लिए एक अनूठी मिसाल पेश कर रहा है।

यह शायद जिले का इकलौता ऐसा अनोखा सरकारी विद्यालय है, जो आत्मनिर्भर है। इस स्कूल के पास अपनी 18 बीघा जमीन है। इस जमीन पर बाकायदा खेती होती है और उससे होने वाली आय को स्कूल के विकास में खर्च किया जाता है। इसी कृषि योग्य भूमि में खेती करने के अधिकार के लिए शुक्रवार को सार्वजनिक बोली (नीलामी) लगाई जाएगी। 65 हजार से शुरू होगी बोली, एक साल का मिलेगा अधिकार: विद्यालय के पास कुल 18 बीघा जमीन है, जिसमें से करीब 16 बीघा जमीन पूरी तरह कृषि योग्य है। हर साल की तरह इस साल भी इस जमीन पर खेती करने के लिए किसानों के बीच सार्वजनिक बोली लगाई जाएगी। न्यूनतम राशि 65 हजार रुपये निर्धारित की गई है, जो किसान सबसे अधिक बोली लगाएगा, उसे अगले एक वर्ष तक इस भूमि पर फसल उगाने का अधिकार मिल जाएगा। पारदर्शी तरीके से होगी पूरी प्रक्रिया: शेखोपुरसराय के उप प्रमुख कार्यानंद राम ने बताया कि बोली प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जाती है। नीलामी अंचलाधिकारी , स्थानीय मुखिया, जमीन दान करने वाले दाता के परिवार के प्रतिनिधि और विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों की मौजूदगी में संपन्न कराई जाएगी। स्कूल और किसान दोनों का विकास: स्थानीय लोगों का कहना है कि यह व्यवस्था शिक्षा और कृषि के समन्वय का एक बेहतरीन उदाहरण है। इससे दोहरा फायदा होता है। एक तरफ गांव के किसानों को खेती करने के लिए एकमुश्त अच्छी और उपजाऊ जमीन मिल जाती है, तो दूसरी तरफ नीलामी से मिलने वाली राशि से स्कूल को आर्थिक संसाधन मिल जाता है। पैसे का उपयोग विद्यालय के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने, सुविधाओं के विस्तार और बच्चों की अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में किया जाता है।

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