राहत: अब अपनी गाड़ी से मंडी तक मछली पहुंचाएंगे किसान

Feb 04, 2026 11:00 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बिहारशरीफ
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नालंदा के मछलीपालकों को अब तालाब से मंडी तक मछलियों को ले जाने के लिए किराये की गाड़ी का मुंह नहीं जोहना पड़ेगा। हर प्रखंड के एक मछलीपालक को 3 लाख रुपये की लागत वाले ई-रिक्शा पर 1.5 लाख रुपये का अनुदान मिलेगा। चयनित लाभुकों को अपना हिस्सा जमा करने के बाद अनुदान राशि भेजी जाएगी।

राहत: अब अपनी गाड़ी से मंडी तक मछली पहुंचाएंगे किसान

हिन्दुस्तान एक्सक्लूसिव : राहत: अब अपनी गाड़ी से मंडी तक मछली पहुंचाएंगे किसान हर प्रखंड में एक मछलीपालक को अनुदान पर मिलेगी ई-रिक्शा एक ई-रिक्शा की 3 लाख आएगी लागत, सरकार देगी डेढ़ लाख अनुदान आवेदकों के चयन पर जिला चयन समिति ने लगायी अंतिम मुहर फोटो मछली : तालाब से मछली निकालते मछुआरे। बिहारशरीफ, कार्यालय प्रतिनिधि। नालंदा के मछलीपालकों का इंतजार खत्म हो गया है। अब उन्हें मछलियों को तालाब से मंडी तक ले जाने के लिए किराये की गाड़ी का मुंह नहीं जोहना पड़ेगा। मछुआ कल्याण योजना से जिले के प्रत्येक प्रखंड के एक यानी 20 मछलीपालकों को मालवाहक ई-रिक्शा दी जाएगी।

मत्स्य निदेशक की अध्यक्षता में गठित जिला चयन समिति ने आवेदकों की स्क्रूटनी के बाद अंतिम सूची पर मुहर लगा दी है। आधा पैसा देगी सरकार: ई-रिक्शा की कुल कीमत तीन लाख रुपये निर्धारित है। इस पर सरकार सभी वर्गों के मछुआरों को 50 फीसदी यानी डेढ़ लाख रुपये का अनुदान देगी। चयनित लाभुकों को अपना हिस्सा (मार्जिन मनी) जमा करने को कहा गया है, जिसके बाद एजेंसी को अनुदान राशि भेज दी जाएगी। चयन में मत्स्यजीवी सहयोग समिति के सदस्यों और खुद की दुकान वाले मछुआरों को प्राथमिकता दी गई है। लकड़ी की नाव में दिलचस्पी नहीं: हैरानी की बात यह है कि सरकार नाव और जाल पर 90 फीसद सब्सिडी दे रही है। फिर भी खरीदार नहीं मिल रहे। लकड़ी की नाव की कीमत एक लाख 24 हजार तय की गयी है। इसपर एक लाख 11 हजार अनुदान का प्रावधान किया गया है। पांच मछलीपालकों को नाव देने का लक्ष्य रखा गया है। अबतक आवेदन सिर्फ तीन आये हैं। राहत यह कि प्लास्टिक वोट (नाव) में मछुआरों ने जरूर रुचि दिखायी है। दो विरुद्ध 12 आवेदन आ चुके हैं। एक लाख 54 हजार एक वोट की कीमत है। फेंका जाल लेने वाले नहीं मिल रहे: अनुदान पर फेंका जाल लेने वाले मछलीपालक विभाग को नहीं रहा है। एक जाल की कीमत 16 हजार निर्धारित है। इसपर 90 फीसद अनुदान है। 35 लक्ष्य के विरुद्ध अबतक सिर्फ 14 आवेदन ही आये हैं। अब भी है मौका: जाल और नाव के लिए मत्स्यजीवी सहयोग समिति के सदस्य, एससी/एसटी वर्ग, महिलाएं और निजी तालाब वाले किसान अब भी आवेदन कर सकते हैं। https://fisheries.bihar.gov.in पर जरूरी कागजात के साथ ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। क्या कहते हैं अधिकारी : ई-रिक्शा देने के लिए लाभुकों का चयन कर लिया गया है। चयनित आवेदकों से 50 फीसद अनुदान काट मार्जिन मनी जमा करने को कहा गया। नयी पहल से मछुआरों तालाब से मंडी तक मछलियों को ले जाने और लाने में काफी सहूलियत होगी। शंभु प्रसाद, जिला मत्स्य पदाधिकारी, नालंदा

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