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रिवाइज : किसान निबंधन : कहीं जमाबंदी के नाम में अड़ंगा तो कहीं नाम-पता पर अटक रही प्रक्रिया

रिवाइज : किसान निबंधन : कहीं जमाबंदी के नाम में अड़ंगा तो कहीं नाम-पता पर अटक रही प्रक्रिया

संक्षेप:

किसान निबंधन के लिए विशेष शिविरों का आयोजन किया जा रहा है, लेकिन सर्वर की समस्या और दस्तावेजों में त्रुटियों के कारण किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जमाबंदी और आधार कार्ड में असमानता के कारण निबंधन में रुकावट आ रही है। हालात ऐसे हैं कि कई किसान मायूस होकर शिविर से लौट रहे हैं।

Jan 07, 2026 10:56 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बिहारशरीफ
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किसान निबंधन : कहीं जमाबंदी के नाम में अड़ंगा तो कहीं नाम-पता पर अटक रही प्रक्रिया वंशावली के आधार पर लाभ ले रहे किसानों से मांगे जा रहे अपनी जमीन के दस्तावेज शिविरों में उमड़ रही किसानों की भीड़ पर सर्वर डाउन रहने से फॉर्म रजिस्ट्री की रफ्तार सुस्त निबंधन की प्रक्रिया में सबसे बड़ी बाधा बन रहा है जमीन के कागजात फोटो जमाबंदी01 - करायपरसुराय के ई किसान भवन में लगे शिविर में किसानों का निबंधन करते राजस्व कर्मचारी। जमाबंदी02 - बिन्द बाजार के माता महारानी मंदिर के समीप लगे शिविर में सर्वर ठीक होने के इंतजार में बैठे किसान।

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जमाबंदी03 - लोदीपुर में लगाये गये कैंप में बुधवार को किसान की आंख की पुतली की फेश कैमरा से तस्वीर लेते कृषि समन्वयक मुरारी कुमारी। जमाबंदी04 - नूरसराय प्रखंड की रसलपुर पंचायत में लगे कैंप में निबंधन कराने पहुंचे किसान। बिहारशरीफ, हिन्दुस्तान टीम फॉर्म रजिस्ट्री (किसान निबंधन) के लिए जिले की सभी पंचायतों में विशेष शिविर लगाये जा रहे हैं। कहीं सर्वर की सुस्ती रुला रही है तो कहीं कागज की कमी से निबंधन की प्रक्रिया अटक रही है। सिस्टम के ‘डिजिटल चक्रव्यूह’ में फंसकर किसान हलकान हैं। अन्नदाता मायूस होकर शिविरों से लौट रहे हैं। नियमों के अनुसार निबंधन के लिए जमाबंदी आधार कार्ड से जुड़ी होनी चाहिए। उसमें खाता, खसरा और रकबा सही तरीके से दर्ज होना अनिवार्य है। जमाबंदी में दर्ज नाम आधार कार्ड से मिलता-जुलता होना चाहिए। अमूमन जमाबंदी में आधार लिंक न होने, खाता-खसरा-रकबा में त्रुटियों के कारण किसानों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। इतना ही नहीं शुरुआत में कई किसान वंशावली के आधार पर ही पीएम सम्मान योजना का लाभ ले रहे थे। अब अपने नाम से जमाबंदी की शर्त ऐसे किसानों के लिए बड़ी बाधा बन गयी है। समस्या यह भी कि आधार और जमाबंदी के पता में अंतर रहने पर भी फॉर्म रजिस्ट्री प्रक्रिया अटक रही है। मसलन, किसान की जमाबंदी पर नालंदा जिला तथा आधार में दूसरे जिले का पता दर्ज है तो निबंधन नहीं हो पा रहा है। तकनीकी खामियों के कारण शिविरों में दिनभर में 25 से 40 किसानों का ही निबंधन हो पा रहा है। जबकि, निबंधन कराने रोज दो सौ से अधिक किसान पहुंच रहे हैं। किसानों की दुश्वारियों की गवाही आंकड़े भी दे रहे हैं। चलाये जा रहे विशेष अभियान के तहत हर दिन जिले के कुल 20 प्रखंडों को मिलाकर करीब 10 हजार किसानों का निबंधन करना है। परंतु, पहले दिन यानी छह जनवरी को 877 किसानों का ही निबंधन हो पाया था। करायपरसुराय: दस्तावेजी त्रुटियां बढ़ा रहीं दुश्वारियां: करायपरसुराय के ई किसान भवन में लगे शिविर में बुधवार को फार्मर रजिस्ट्री कराने वाले किसानों की भारी भीड़ दिखी। लेकिन, तकनीकी खामियां और जमाबंदी से जुड़ी त्रुटियों के कारण उन्हें परेशानी झेलनी पड़ी। किसान राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि उनका किसान आईडी अब तक नहीं बन पाया है। कराय के किसान शैलेन्द्र कुमार और अविनाश कुमार ने बताया कि उनकी जमाबंदी वर्ष 2020 की है। जबकि, हल्का कर्मचारी कहते हैं कि 2019 के पहले की जमाबंदी फार्म रजिस्ट्री के लिए जरूरी है। समस्या के समाधान के लिए दो दिन से कैंप का चक्कर लगा रहे हैं। किसानों ने प्रक्रिया को सरल करने और तकनीकी समस्याओं के समाधान की मांग उठायी है। सीओ प्रभात कुमार गोंड ने बताया कि जिन किसानों की जमाबंदी में त्रुटि के कारण फार्मर रजिस्ट्रेशन नहीं हो रही है, वे परिमार्जन प्रक्रिया के माध्यम से अपनी जमाबंदी में सुधार करा सकते हैं। रैयतों की जमाबंदी आधार से जुड़ी होनी चाहिए तथा खाता, खसरा और रकबा सही तरीके से दर्ज रहना जरूरी है। राजस्व कर्मचारी बमबम कुमार मंडल ने बताया कि जमाबंदी में आधार लिंक नहीं होने, खाता-खसरा-रकबा अंकित नहीं होने के किसानों को परेशानी हो रही है। बिन्द : सर्वर ठीक होने के इंतजार में बैठे रहे किसान : प्रखंड की बिन्द पंचायत के महारानी स्थान में लगे विशेष शिविर में काफी संख्या में किसान फार्म रजिस्ट्री कराने पहुंचे। लेकिन, दोपहर तक सर्वर के ठीक से काम न करने के कारण किसानों को इंतजार में बैठना पड़ा। दो बजे तक महज 27 किसानों का ही निबंधन हो सका। किसान अरुण चौधरी ने कहा कि ऑनलाइन जमाबंदी नहीं रहने से उनका निबंधन नहीं किया गया। किसान संतोष कुमार, द्वारिका प्रसाद, मुकेश कुमार व धनंजय कुमार ने कहा कि सर्वर डाउन रहने से काफी परेशानी उठानी पड़ी। राजस्व कर्मचारी उमेश चन्द्र सुधाकर ने कहा कि जिनकी जमाबंदी ऑनलाइन और आधार से जुड़ा है, उनका निबंधन हो रहा है। आधार सत्यापन में थक रहीं बूढ़ी आंखें: फार्म रजिस्ट्री के लिए किसानों के नाम से जमीन की जमाबंदी जरूरी है। इतना ही नहीं जमाबंदी और आधार कार्ड में दर्ज नाम एक समान होना चाहिए। परेशानी यह भी कि पिता-माता के नाम में अगर कोई अंतर आता है तो निबंधन की प्रक्रिया में बाधा आती है। इतना ही नहीं ई-केवाईसी करने के दौरान कृषि समन्वयक किसान की आंख की पुतली (रेटिना) की तस्वीर लेते हैं। आधार कार्ड में दर्ज डेटाबेस से मिलान करते हैं। यही प्रक्रिया को पूरा करने के लिए उन्हें हल्का कार्यालय में भी जाना पड़ता है। इस प्रक्रिया पूरी करने में बुजुर्ग किसानों को काफी फजीहत हो रही है। लोदीपुर के बुजुर्ग किसान मोहन कुमार कहते हैं कि फेश कैमरे से चार से पांच बार तस्वीर लेने पर सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होती है। बहुत दिक्कत होती है। नूरसराय: सारे कागजात रहने पर भी निबंधन नहीं: प्रखंड की रसलपुर पंचायत के बासो खंधा में लगे शिविर में एक किसान के पास सारे कागजात रहने के बाद भी निबंधन नहीं हो सका। किशुनपुर के रहने वाले दिनु कुमार बताते हैं कि उनकी मां के नाम से जमीन की जमाबंदी है। ऑनलाइन रसीद कट रहा है। जमाबंदी में खाता, खसरा व रकबा दर्ज है। शिविर में पहले ई-केवाईसी की प्रक्रिया सफलतापूर्वक हुई। उसके बाद राजस्वकर्मी द्वारा जमीन का सत्यापन भी ऑनलाइन कर दिया। बावजूद, फाइनल प्रक्रिया होने के बाद भी मां का निबंधन नहीं हो सका। इस संबंध में राजस्व कर्मी से जब उन्होंने पूछा तो तकनीकी खामियां बताकर बाद में आने को कह दिया। दिनभर शिविर में रहने के बाद मायूस होकर घर आना पड़ा। निबंधन के लिए ये कागजात जरूरी: 1. आधार कार्ड 2. आधार से लिंक मोबाइल नंबर 3. जमीन का रसीद (अपने नाम की जमाबंदी जरूरी) फॉर्म रजिस्ट्री के फायदे : 1. सरकारी योजना का लाभ बिना सत्यापन के प्राप्त करना। 2. न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषि उत्पादों की बिक्री में सहूलियत। 3. फसल नुकसान की स्थिति में वास्तविक क्षति का मुआवजा। 4. पीएम किसान सम्मान निधि योजना का निर्बाध रूप से लाभ। बॉक्स एसडीओ ने किया निरीक्षण, गायब कर्मियों का वेतन बंद अनुमंडल पदाधिकारी काजले वैभव नितीन ने रहुई प्रखंड के सुपासंग पंचायत सरकार भवन का निरीक्षण किया। निरीक्षण के क्रम में पंचायत सरकार भवन की बायोमैट्रिक उपस्थिति की जांच की गई। इसमें मात्र पंचायत सचिव कार्यपालक सहायक व किसान सलाहकार उपस्थित पाए गए। उन्होंने राजस्व कर्मचारी, कृषि समन्वयक, पंचायत लेखापाल, किसान सलाहकार, ग्रामीण आवास सहायक, कचहरी सचिव, पंचायत तकनीकी सहायक व विकास मित्र से स्पष्टीकरण करते हुए अगले आदेश तक वेतन भुगतान पर रोक लगा दी है।