Biharsharif News: पिछले साल जून-जुलाई में बाढ़ से मची थी तबाही, इस साल अगस्त में भी नदियों में उड़ रही धूल
Biharsharif News: नालंदा के किसान मानसून की अस्थिरता और नदियों की स्थिति को लेकर चिंतित हैं। पिछले साल की बाढ़ के बाद इस साल कम बारिश के कारण सूखे की स्थिति बन रही है। किसान निजी नलकूपों पर निर्भर हैं, लेकिन अच्छी बारिश नहीं होने पर खेती पर संकट गहराने का डर है।

Biharsharif News: पिछले साल जून-जुलाई में बाढ़ से मची थी तबाही, इस साल अगस्त में भी नदियों में उड़ रही धूल मानसून की दगाबाजी से किसानों के हौसले हो रहे पस्त नदियों के बूते खेती करने की उम्मीद अबतक पूरी नहीं निजी नलकूपों के बूते किसी तरह हो रही धान की रोपनी कम बारिश होने के कारण सूखे की बन रही स्थिति, चिंता में किसान फोटो नदी01 - सूखी पड़ी पंचाने नदी (वर्तमान)। नदी02 - करायपरसुराय के अकबरपुर-मुसाढ़ी के पास टूटा लोकाइन नदी तटबंध (जुलाई 2025) बिहारशरीफ, कार्यालय प्रतिनिधि।
किसानों की चिंता
मानसून की दगाबाजी और नदियों के मिजाज बदलने से नालंदा के किसान चिंता में पड़ गये हैं। पिछले साल जून व जुलाई में एक-दो नहीं, पांच से अधिक बार नदियां उफनाय थीं। तटबंधों के टूटने से बाढ़ की स्थिति बनी थी। फसलें तबाह हो गयी थीं। किसानों की कमर टूट गयी थी। इस साल नौबत ऐसी कि अगस्त प्रारंभ हो चुका है। बावजूद, जिले की छोटी-बड़ीं सभी नदियां प्यासी हैं। सतह पर पानी की जगह धूल उड़ रही हैं। नौबत ऐसी कि बारिश नहीं होने के कारण बीतते समय के साथ सूखे की स्थिति बन रही है। निजी नलकूपों के बूते किसान किसी तरह धनरोपनी कर पा रहे हैं। लेकिन, तीखी धूप उनके हौसले को पस्त कर रही है। अन्नदाताओं का कहना है कि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ की खेती पर गंभीर संकट मंडराने लगेगा।
पिछले वर्ष की स्थिति
पिछले साल जून और जुलाई में मानसून का साथ मिला था तो जिरायन, सकरी, गोइठवा, पंचाने, धनायन, लोकाइन, कुंभरी समेत सात नदियां पानी से लबालब भर गयी थीं। तटबंधों के टूटने से करायपरसुराय, हिलसा, एकंगरसराय, अस्थावां, कतरीसराय और बिंद इलाके को बाढ़ की मार झेलनी पड़ी थी। लेकिन, इस बार नदियों में पानी का नामोनिशान नहीं है। सरदार बिगहा के किसान धनंजय कुमार और नूरसराय के जगदीश प्रसाद बताते हैं कि जब नदियां भरी रहती थीं तो 80 फीसद खेतों की सिंचाई अपने आप हो जाती थी। अब बिचड़ा तैयार करने से लेकर रोपनी तक के लिए पूरी तरह बिजली और निजी मोटर पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इससे खेती की लागत बढ़ गयी है।
इस बार सबसे कम बारिश
इस बार सबसे कम बारिश: कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई महीने में औसतन 252.8 एमएम बारिश होनी चाहिए। लेकिन, इसबार 177.56 एमएम बारिश ही दर्ज की गई है। यानी सामान्य से करीब 75 एमएम कम। जबकि, पिछले साल जरूरत से अधिक यानी 276.2 एमएम बारिश दर्ज की गयी थी। अबतक 65 फीसद रोपनी : इसबार जिले में एक लाख 47 हजार 460 हेक्टेयर में धान की खेती होनी है। इसके विरुद्ध अबतक 65.84 (97089 हेक्टेयर) में ही रोपनी हो पायी है। किसानों का कहना है कि बारिश न होने और खिली धूप के कारण खेतों में दरारें पड़ रही हैं। फसल को बचाने के लिए हर एक दिन के बाद सिंचाई करनी पड़ रही है। बावजूद, वह रौनक नहीं दिखती जो बारिश होने पर रहती थी।
झारखंड की बारिश पर टिकी है उम्मीद
झारखंड की बारिश पर टिकी है उम्मीद जिले की नदियों का सीधा जुड़ाव पड़ोसी राज्य झारखंड से है। कोडरमा के जंगलों में तेज बारिश होती है, तब यहां की नदियों का जलस्तर बढ़ता है। झारखंड से आने वाली सकरी नदी अस्थावां इलाके में आकर जिराइन में मिल जाती है। वहीं, फल्गू से लोकाइन में पानी आता है। जब तक वहां अच्छी बारिश नहीं होगी, यहां की नदियां सूखी ही रहेंगी। कब-कब आयी थी बाढ़ (2025) 20 जून : लोकाइन नदी के तेज उफा व पानी के दबाव के कारण एकंगरसराय के केशोपुर व बेलदारी बिगहा, करायपरसुराय के बेरमा , मकरौता, पकरी, छितर बिगहा, हिलसा के धुरी बिगहा , मुर्गियाचक, बड़की घोसी यानी नौ स्थानों पर तटबंध टूट गये थे। बाढ़ से तीनों प्रखंडों में खूब तबाही मची थी। 16 जुलाई : लोकाइन नदी का जलस्तर बढ़ने से एक बार फिर से धुरी बिगहा और कोरथू के पास तटबंध टूटे थे। एकंगरसराय में लालबाग-मंडाच्छ सड़क क्षतिग्रस्त हो गयी थी। सकरी नदी का पानी गिरियक के सतौआ-भदाई गांव में घुसा था। 17 जुलाई : अस्थावां के सदरपुर के पास जिरायन नदी का तटबंध टूटा था। हिलसा के सोहरा पुल के पास गांव का सम्पर्क पथ लोकयन नदी की तेज धार में बहा था। करायपरसुराय के गुलरिया बिगहा के पास लोकाइन नदी का तटबंध क्षतिग्रस्त हो गया था। पंचाने नदी का जलस्तर बढ़ने से बिहारशरीफ शहर के निचले इलाके के मोहल्ले जलमग्न हो गये थे। 22 जुलाई : बेनार-सकसोहरा मुख्य सड़क पर जिरायन नदी का पानी चढ़ा था। छोटे वाहनों की आवाजाही ठप हो गयी थी। बिंद में मोहद्दीपुर के पास तटबंध क्षतिग्रस्त हो गये थे। 26 जुलाई : गुलरिया बिगहा के पास लोकाइन नदी का तटबंध टूटा था। करायपरसुराय के निचले इलाके खेत जलमग्न हो गये थे।


